ऐतिहासिक न्यायिक हस्तक्षेप
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक शादी को खत्म करने का एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। यह प्रावधान कोर्ट को ऐसे मामलों में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने की अनुमति देता है जहाँ मौजूदा कानून शायद पूरे न पड़ें।
इस मामले ने वैवाहिक विवादों में कानूनी तंत्रों के दुरुपयोग को उजागर किया। कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रियाओं के और दुरुपयोग को रोकने और दोनों पक्षों के बीच निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप किया।
स्टैटिक GK तथ्य: अनुच्छेद 142 भारतीय संविधान के भाग V का हिस्सा है, जो संघ न्यायपालिका से संबंधित है।
विवाद की पृष्ठभूमि
दंपति ने मध्यस्थता के ज़रिए आपसी सहमति से तलाक लेने पर सहमति जताई थी। समझौते के हिस्से के तौर पर, पति ने 75 लाख रुपये, एक कार के लिए अतिरिक्त 14 लाख रुपये दिए, और समझौते में बताए गए गहने वापस कर दिए।
हालाँकि, ये लाभ मिलने के बाद, पत्नी ने अपनी सहमति वापस ले ली। बाद में उसने पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कर दिया, जिससे कानूनी कार्यवाही और जटिल हो गई।
स्टैटिक GK टिप: भारत में आपसी सहमति से तलाक हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13B के तहत नियंत्रित होता है।
आरोपों पर कोर्ट की टिप्पणियाँ
पत्नी ने आरोप लगाया कि 120 करोड़ रुपये के गहने और 50 करोड़ रुपये के सोने के बिस्किट वापस नहीं किए गए। उसने दावा किया कि इन्हें जानबूझकर समझौते से बाहर रखा गया था।
कोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण इन दावों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे आरोप न तो समझौते में शामिल थे और न ही दोनों पक्षों के बीच किसी बातचीत में उनका ज़िक्र था।
बेंच ने उसके आचरण को “बेहद निंदनीय“ बताया और कानूनी प्रावधानों के दुरुपयोग की आलोचना की। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि अदालतें न्यायिक प्रक्रियाओं में हेरफेर की अनुमति नहीं दे सकतीं।
अनुच्छेद 142 की शक्तियों का महत्व
कोर्ट ने दोहराया कि अदालतों द्वारा अनुमोदित मध्यस्थता समझौते बाध्यकारी होते हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। मनमाने ढंग से सहमति वापस लेने की अनुमति देने से वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र कमज़ोर होंगे।
अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करके, कोर्ट ने शादी को खत्म करके और लंबी कानूनी लड़ाई को रोककर अंतिम समाधान सुनिश्चित किया। इस शक्ति का इस्तेमाल बहुत कम और केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाता है।
स्टैटिक GK तथ्य: अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को यह अधिकार देता है कि वह अपने सामने आए किसी भी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए कोई भी आवश्यक आदेश पारित कर सके।
अंतिम फैसला और इसके प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट ने शादी को भंग कर दिया और दोनों पक्षों के बीच चल रहे सभी लंबित दीवानी और फौजदारी मामलों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पति को अंतिम निपटारे के तौर पर बाकी बचे 70 लाख रुपये देने का निर्देश दिया।
यह फैसला मध्यस्थता की पवित्रता को और मज़बूत करता है और कानूनी उपायों के दुरुपयोग के खिलाफ एक कड़ा संदेश देता है। यह न्यायपालिका की निष्पक्ष परिणाम देने की क्षमता पर लोगों के भरोसे को भी बढ़ाता है।
स्टैटिक GK टिप: भारत के सुप्रीम कोर्ट की स्थापना 1950 में हुई थी और यह देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| मामला | अनुच्छेद 142 के तहत तलाक प्रदान किया गया |
| प्रमुख प्रावधान | भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 |
| मुद्दा | मध्यस्थता समझौते से पीछे हटना और कानूनी दुरुपयोग |
| न्यायालय की टिप्पणी | आरोपों में प्रमाण का अभाव था और वे गंभीर रूप से अनुचित थे |
| कानूनी सिद्धांत | मध्यस्थता समझौते बाध्यकारी होते हैं |
| की गई कार्रवाई | विवाह समाप्त किया गया और मामले खारिज किए गए |
| वित्तीय निर्देश | शेष 70 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश |
| महत्व | न्यायिक अधिकार और निष्पक्षता को सुदृढ़ करता है |





