मई 21, 2026 8:05 पूर्वाह्न

SEHAT मिशन भारत के निवारक स्वास्थ्य ढांचे को मज़बूत बनाता है

समसामयिक मामले: SEHAT पहल, ICMR, ICAR, बायोफोर्टिफाइड फसलें, निवारक स्वास्थ्य सेवा, वन हेल्थ दृष्टिकोण, एकीकृत कृषि प्रणालियाँ, गैर-संक्रामक रोग, कृषि परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य

SEHAT Mission Strengthens India’s Preventive Health Framework

SEHAT का शुभारंभ

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने संयुक्त रूप से 11 मई 2026 को नई दिल्ली में SEHAT पहल का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम का पूरा नाम ‘Science Excellence for Health through Agricultural Transformation‘ (कृषि परिवर्तन के माध्यम से स्वास्थ्य के लिए वैज्ञानिक उत्कृष्टता) है।

इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक समन्वय के माध्यम से कृषि, पोषण और स्वास्थ्य सेवा को आपस में जोड़ना है। यह भारत की नीति में आए उस बदलाव को दर्शाता है, जिसमें उपचारआधारित स्वास्थ्य सेवा से हटकर निवारक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों की ओर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

स्टेटिक GK तथ्य: नई दिल्ली, ICMR और भारत के कई अन्य प्रमुख राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों का मुख्यालय है।

कार्यक्रम के उद्देश्य

SEHAT एक राष्ट्रीय मिशनमोड कार्यक्रम के रूप में कार्य करता है, जिसका मुख्य ध्यान पोषण से जुड़े स्वास्थ्य परिणामों पर होता है। यह दीर्घकालिक रोग निवारण के लिए कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्रों के बीच वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देता है।

यह कार्यक्रम मुख्य रूप से कुपोषण, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी समस्याओं को लक्षित करता है। बदलती जीवनशैली और पोषण की कमी के कारण ये बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।

यह पहल साक्ष्यआधारित नीति निर्माण और सामुदायिक स्तर पर कार्यान्वयन की रणनीतियों का भी समर्थन करती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकेतकों को बेहतर बनाने के लिए यह ‘संपूर्णसरकारी दृष्टिकोण‘ (whole-of-government approach) का पालन करती है।

बायोफोर्टिफाइड फसलों का महत्व

SEHAT के प्रमुख घटकों में से एक बायोफोर्टिफाइड फसलों को बढ़ावा देना है। इन फसलों में चयनात्मक प्रजनन (selective breeding) विधियों के माध्यम से लौह, जस्ता और विटामिन जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का स्तर सामान्य से अधिक होता है।

ICAR के अनुसार, भारत में अब तक लगभग 203 बायोफोर्टिफाइड फसल किस्में विकसित की जा चुकी हैं। अब ICMR के सहयोग से इन किस्मों पर नैदानिक सत्यापन (clinical validation) अध्ययन किए जाएँगे।

कमज़ोर और वंचित आबादी के बीच सूक्ष्म पोषक तत्वों के सेवन को बेहतर बनाने के लिए बायोफोर्टिफिकेशन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह लोगों की खान-पान की आदतों में बिना किसी बदलाव के ‘छिपी हुई भूख‘ (hidden hunger) को कम कर सकता है और भोजन की गुणवत्ता में सुधार ला सकता है।

स्टेटिक GK सुझाव:छिपी हुई भूख‘ से तात्पर्य पर्याप्त मात्रा में कैलोरी का सेवन करने के बावजूद लौह, आयोडीन और विटामिन A जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से है।

वन हेल्थ और एकीकृत कृषि

SEHATवन हेल्थ‘ (One Health) की अवधारणा को भी बढ़ावा देता है। यह दृष्टिकोण मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के बीच के आपसी जुड़ाव को मान्यता देता है।

यह कार्यक्रम एकीकृत कृषि प्रणालियों को प्रोत्साहित करता है, जिसमें फसल उत्पादन, पशुधन पालन, मत्स्य पालन और इनसे जुड़ी अन्य गतिविधियों को आपस में जोड़ा जाता है। इस तरह के सिस्टम खेती की उत्पादकता को बढ़ाते हैं, साथ ही पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं।

खेती में काम करने वालों की सेहत (Occupational health) एक और अहम मुद्दा है। किसानों को अक्सर कीटनाशकों, तेज़ गर्मी और काम करने की असुरक्षित स्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिसका असर लंबे समय में लोगों की सेहत पर पड़ता है।

स्टैटिक GK तथ्य: COVID-19, निपाह वायरस और एवियन इन्फ्लूएंज़ा जैसी जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (zoonotic diseases) के फैलने के बाद ‘वन हेल्थ‘ (One Health) अप्रोच को दुनिया भर में अहमियत मिली।

लोगों की सेहत के लिहाज़ से इसकी अहमियत

भारत इस समय संक्रामक और गैरसंक्रामक, दोनों तरह की बीमारियों के दोहरे बोझ का सामना कर रहा है। कुपोषण के साथ-साथ, शहरों और गांवों में रहने वाले लोगों में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां भी तेज़ी से बढ़ रही हैं।

SEHAT का मकसद खेती में सुधार और पोषण को बेहतर बनाकर बीमारियों से बचाव करने वाले हेल्थकेयर सिस्टम बनाना है। इस पहल से खाद्य सुरक्षा मज़बूत हो सकती है, हेल्थकेयर का खर्च कम हो सकता है, और इंसानी विकास के कुल संकेतकों में सुधार हो सकता है।

यह कार्यक्रम भारत के टिकाऊ खेती और सेहतमंद जीवन से जुड़े बड़े लक्ष्यों को भी बढ़ावा देता है। स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों के बीच वैज्ञानिक तालमेल से नीतियों के असरदार होने की उम्मीद है।

Static Usthadian Current Affairs Table

विषय विवरण
SEHAT का पूर्ण रूप साइंस एक्सीलेंस फॉर हेल्थ थ्रू एग्रीकल्चरल ट्रांसफॉर्मेशन
लॉन्च तिथि 11 मई 2026
लॉन्च करने वाले संगठन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
मुख्य उद्देश्य कृषि को निवारक स्वास्थ्य सेवा से जोड़ना
प्रमुख फोकस क्षेत्र बायोफोर्टिफिकेशन, वन हेल्थ, एकीकृत कृषि
बायोफोर्टिफाइड किस्में ICAR द्वारा विकसित 203 फसल किस्में
वन हेल्थ अवधारणा मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य का एकीकरण
लक्षित प्रमुख बीमारियाँ मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर, कुपोषण
कार्यक्रम की प्रकृति मिशन-मोड राष्ट्रीय पहल
सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्य उपचारात्मक से निवारक स्वास्थ्य प्रणाली की ओर परिवर्तन
SEHAT Mission Strengthens India’s Preventive Health Framework
  1. ICMR और ICAR ने हाल ही में मिलकर राष्ट्रीय SEHAT पहल शुरू की है।
  2. SEHAT का पूरा नाम है – Science Excellence for Health through Agricultural Transformation (कृषि परिवर्तन के माध्यम से स्वास्थ्य के लिए वैज्ञानिक उत्कृष्टता)।
  3. इस पहल की शुरुआत 11 मई 2026 को नई दिल्ली में की गई थी।
  4. SEHAT पूरे देश में समन्वित वैज्ञानिक नीति के कार्यान्वयन के ज़रिए कृषि, पोषण और स्वास्थ्य सेवा को आपस में जोड़ता है।
  5. यह कार्यक्रम पूरे देश में निवारक स्वास्थ्य प्रणालियों की ओर भारत के बदलाव को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देता है।
  6. SEHAT एक राष्ट्रीय मिशनमोड कार्यक्रम के रूप में काम करता है, जिसका मुख्य ध्यान पोषण संबंधी स्वास्थ्य परिणामों पर होता है।
  7. यह पहल एक ही समय में मधुमेह (डायबिटीज़), उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), कैंसर और कुपोषण जैसी बीमारियों को लक्षित करती है।
  8. SEHAT राष्ट्रीय स्तर पर दीर्घकालिक सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए साक्ष्यआधारित नीति निर्माण का समर्थन करता है।
  9. SEHAT राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत बायोफोर्टिफाइड फसलें एक प्रमुख घटक हैं।
  10. इन फसलों में प्राकृतिक रूप से आयरन, जिंक और ज़रूरी विटामिन की मात्रा ज़्यादा होती है।
  11. ICAR ने हाल ही में पूरे भारत में सफलतापूर्वक लगभग 203 बायोफोर्टिफाइड फसल किस्में विकसित की हैं।
  12. ICMR पूरे देश में इन पोषणयुक्त फसल किस्मों के लिए नैदानिक सत्यापन अध्ययन करेगा।
  13. बायोफोर्टिफिकेशन कमज़ोर आबादी समूहों में खतरनाक छिपी हुई भूखको काफी हद तक कम करने में मदद करता है।
  14. छिपी हुई भूख का मतलब है कि रोज़ाना पर्याप्त कैलोरी का सेवन करने के बावजूद शरीर में सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrients) की कमी होना।
  15. SEHAT पूरे देश में विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण वन हेल्थअवधारणा को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा देता है।
  16. वन हेल्थ वैश्विक स्तर पर नीति समन्वय के लिए मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को आपस में जोड़ता है।
  17. यह कार्यक्रम कई कृषि गतिविधियों को शामिल करते हुए टिकाऊ एकीकृत कृषि प्रणालियों को प्रोत्साहित करता है।
  18. SEHAT पहल के तहत किसानों के बीच काम से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम महत्वपूर्ण फोकस क्षेत्र बने हुए हैं।
  19. किसानों को अक्सर रोज़ाना कीटनाशकों के संपर्क, गर्मी के तनाव और काम करने की असुरक्षित स्थितियों का सामना करना पड़ता है।
  20. SEHAT टिकाऊ कृषि और स्वस्थ जीवन से जुड़े भारत के व्यापक लक्ष्यों का समर्थन करता है।

Q1. SEHAT का पूर्ण रूप क्या है?


Q2. 2026 में SEHAT पहल को संयुक्त रूप से किन दो संगठनों ने शुरू किया?


Q3. SEHAT कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष रूप से किन प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं को लक्षित किया गया है?


Q4. SEHAT के अंतर्गत जैव-संवर्धित फसलों को बढ़ावा देने का मुख्य उद्देश्य क्या है?


Q5. वन हेल्थ (One Health) दृष्टिकोण क्या मान्यता देता है?


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