महाराष्ट्र ने रिन्यूएबल एनर्जी की एक बड़ी पहल शुरू की
महाराष्ट्र सरकार ने पूरे राज्य में रिन्यूएबल फ़्यूल के उत्पादन और वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन को मज़बूत करने के लिए कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) पॉलिसी 2026 को मंज़ूरी दे दी है। इस पॉलिसी को अप्रैल 2026 में राज्य कैबिनेट ने मंज़ूरी दी थी और मई 2026 में इसे आधिकारिक तौर पर जारी किया गया।
राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान इस पॉलिसी को लागू करने के लिए ₹500 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इस पहल का मकसद हर ज़िले में म्युनिसिपल कचरे और कृषि अवशेषों का इस्तेमाल करके CBG प्लांट स्थापित करना है।
स्टैटिक GK तथ्य: क्षेत्रफल के हिसाब से महाराष्ट्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है और मुंबई इसकी राजधानी है।
वेस्ट–टू–एनर्जी सिस्टम पर ज़ोर
इस पॉलिसी का मुख्य मकसद आधुनिक बायोगैस तकनीक के ज़रिए कचरे को साफ़–सुथरी ऊर्जा में बदलना है। कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन एनारोबिक डाइजेशन (हवा की गैर-मौजूदगी में कचरे का सड़ना) प्रक्रिया से होता है, जिसमें ऑर्गेनिक कचरा ऑक्सीजन की गैर-मौजूदगी में सड़ता है।
राज्य में हर दिन लगभग 24,500 मीट्रिक टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (शहरी ठोस कचरा) निकलता है। इसके अलावा, महाराष्ट्र में हर साल 20 मिलियन मीट्रिक टन से ज़्यादा कृषि अवशेष पैदा होता है।
सरकार की योजना इस कचरे को लैंडफ़िल में जमा होने देने या खुले में जलाने के बजाय, इसे रिन्यूएबल फ़्यूल में बदलने की है।
स्टैटिक GK टिप: एनारोबिक डाइजेशन प्रक्रिया से ऑर्गेनिक खाद भी बनती है, जिसे ‘डाइजेस्टेट‘ कहते हैं, जो खेती-बाड़ी के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है।
CBG पॉलिसी की मुख्य बातें
इस नए फ़्रेमवर्क के तहत, महाराष्ट्र के हर ज़िले में CBG के लिए खास प्रोजेक्ट शुरू किए जाएँगे। कचरा प्रोसेसिंग की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए, कचरे को उसके निकलने की जगह पर ही अलग-अलग करना (सेग्रीगेशन) अनिवार्य कर दिया गया है।
हर प्रोजेक्ट में हर दिन कम से कम 200 टन ऑर्गेनिक कचरे की प्रोसेसिंग करना ज़रूरी होगा। यह पॉलिसी म्युनिसिपल स्तर पर बायोडिग्रेडेबल (गलने वाला) और नॉन–बायोडिग्रेडेबल (न गलने वाला) कचरे को अलग-अलग करने को भी बढ़ावा देती है।
प्रोजेक्ट को तेज़ी से पूरा करने और निवेश जुटाने के लिए सरकार ने पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) और हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल को चुना है।
डेवलपर्स के लिए आर्थिक मदद
यह पॉलिसी ग्रीन एनर्जी इंफ़्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई बड़े प्रोत्साहन देती है। डेवलपर्स को प्रति टन क्षमता के हिसाब से ₹75 लाख तक की ‘वायबिलिटी गैप फ़ंडिंग‘ (आर्थिक मदद) मिल सकती है। हर प्रोजेक्ट के लिए ज़्यादा से ज़्यादा ₹15 करोड़ की आर्थिक मदद तय की गई है।
इसके अलावा, प्रोडक्शन शुरू होने के बाद 2.5% SGST रिफंड और बिजली–पानी की सप्लाई में प्राथमिकता जैसे फ़ायदे भी मिलेंगे।
राज्य सरकार ने काम शुरू करने के लिए सख़्त समय–सीमा भी तय की है। अगर कोई प्रोजेक्ट दो साल के अंदर चालू नहीं हो पाता, तो ज़मीन का अलॉटमेंट रद्द किया जा सकता है।
स्टैटिक GK फ़ैक्ट: SGST का मतलब है ‘स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स‘, जिसे भारत के GST सिस्टम के तहत राज्य सरकारें इकट्ठा करती हैं।
राष्ट्रीय हरित ऊर्जा योजनाओं से जुड़ाव
महाराष्ट्र की CBG पॉलिसी कई बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ तालमेल बिठाती है, जिनमें SATAT, GOBARdhan और स्वच्छ भारत मिशन शामिल हैं। ये योजनाएँ कचरे के सही मैनेजमेंट और रिन्यूएबल एनर्जी के प्रोडक्शन को बढ़ावा देती हैं।
यह पॉलिसी भारत की जलवायु से जुड़ी बड़ी प्रतिबद्धताओं को भी मज़बूती देती है, जिनमें ग्लासगो में हुए COP26 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित ‘नेट–ज़ीरो 2070‘ का लक्ष्य भी शामिल है।
CBG को अब ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले एक वैकल्पिक ईंधन के तौर पर ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है, क्योंकि जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) के मुकाबले इससे कार्बन उत्सर्जन काफ़ी कम होता है।
पर्यावरणीय और आर्थिक महत्व
इस पॉलिसी से शहरों में कचरे का बोझ कम होने की उम्मीद है, साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रामीण रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे। खेती के बचे हुए कचरे का बेहतर इस्तेमाल करने से पराली जलाने और वायु प्रदूषण की समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
जानकारों का मानना है कि इस पॉलिसी की वजह से महाराष्ट्र के ‘क्लीन एनर्जी‘ सेक्टर में निजी क्षेत्र से काफ़ी निवेश आ सकता है। यह पॉलिसी भारत को ‘सर्कुलर इकॉनमी‘ मॉडल की ओर ले जाने में भी अहम भूमिका निभाती है, जो कचरे की रीसाइक्लिंग और टिकाऊ ईंधन के प्रोडक्शन पर आधारित है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| नीति का नाम | संपीड़ित बायोगैस नीति 2026 |
| राज्य | महाराष्ट्र |
| वित्तीय आवंटन | ₹500 करोड़ |
| मुख्य उद्देश्य | अपशिष्ट से ऊर्जा और नवीकरणीय ईंधन उत्पादन |
| प्रतिदिन नगर निगम कचरा | लगभग 24,500 मीट्रिक टन |
| कृषि अवशेष | प्रतिवर्ष 20 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक |
| न्यूनतम अपशिष्ट प्रसंस्करण क्षमता | 200 टन प्रतिदिन |
| कार्यान्वयन मॉडल | PPP और हाइब्रिड एन्युटी मॉडल |
| संबद्ध राष्ट्रीय योजनाएँ | SATAT, GOBARdhan, स्वच्छ भारत मिशन |
| समर्थित जलवायु लक्ष्य | भारत का नेट-ज़ीरो 2070 लक्ष्य |





