केंद्र शासित प्रदेशों में कानून लागू
महिलाओं के लिए आरक्षण का ढांचा 17 अप्रैल, 2026 से जम्मू और कश्मीर और पुडुचेरी के केंद्र शासित प्रदेशों में आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया गया है। यह 16 अप्रैल, 2026 को संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के पहले लागू होने के बाद हुआ है।
यह सुधार लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक–तिहाई (33%) आरक्षण प्रदान करता है। यह शासन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
स्टेटिक GK तथ्य: भारतीय संसद में राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा शामिल होते हैं।
आरक्षण का संवैधानिक ढांचा
106वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2023 विधायी निकायों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का कानूनी आधार स्थापित करता है। इसे आमतौर पर ‘महिला आरक्षण अधिनियम‘ के नाम से जाना जाता है।
यह संशोधन ऐसे प्रावधान पेश करता है जो शासन के कई स्तरों पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करते हैं। हालाँकि, इसका कार्यान्वयन चुनावी सीमाओं से जुड़ी विशिष्ट शर्तों पर निर्भर करता है।
स्टेटिक GK टिप: भारत में संवैधानिक संशोधनों का संचालन अनुच्छेद 368 के तहत किया जाता है।
केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग कानूनी प्रावधान
राज्यों के विपरीत, विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों को अलग कानूनी समर्थन की आवश्यकता होती है। पुडुचेरी के लिए, ‘केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) अधिनियम, 2023′ के माध्यम से प्रावधान जोड़े गए थे।
जम्मू और कश्मीर के लिए, ‘J&K पुनर्गठन (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2023′ के माध्यम से बदलाव पेश किए गए थे। ये कानून सुनिश्चित करते हैं कि आरक्षण के प्रावधान इन केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में कानूनी रूप से लागू हों।
स्टेटिक GK तथ्य: 2019 में पुनर्गठन के बाद जम्मू और कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया।
परिसीमन और जनगणना की भूमिका
हालाँकि कानून अब सक्रिय है, लेकिन वास्तविक आरक्षण तुरंत लागू नहीं होगा। इसका कार्यान्वयन अगली जनगणना के बाद किए जाने वाले पहले परिसीमन अभ्यास से जुड़ा हुआ है।
आने वाली जनगणना 2027, जो 1 अप्रैल 2026 और 1 मार्च 2027 के बीच होनी है, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं फिर से तय करने का आधार बनेगी। इस प्रक्रिया के बाद ही महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें आवंटित की जाएंगी।
स्टैटिक GK टिप: परिसीमन (Delimitation) वह प्रक्रिया है जिसके तहत जनसंख्या में बदलाव के आधार पर चुनावी निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं फिर से तय की जाती हैं।
राजनीतिक घटनाक्रम और चुनौतियां
2026 में, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक जैसे कुछ अहम विधेयक पेश किए गए थे, ताकि 2029 से इन्हें लागू किया जा सके; लेकिन ये विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाए।
इसके बावजूद, 106वां संशोधन अधिनियम अभी भी मान्य है, जो यह सुनिश्चित करता है कि महिलाओं के लिए आरक्षण का कानूनी ढांचा बरकरार रहे। परिसीमन के समय और उसके क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक बहसें अभी भी जारी हैं।
स्टैटिक GK तथ्य: लोकसभा संसद का निचला सदन है, जिसके सदस्यों का चुनाव सीधे नागरिकों द्वारा किया जाता है।
आगे की राह
इस कानून का जम्मू और कश्मीर तथा पुडुचेरी तक विस्तार एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव परिसीमन और चुनावी चक्रों पर निर्भर करेगा।
उम्मीद है कि इस सुधार से महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व काफी हद तक बढ़ेगा, लेकिन इसके पूरे लाभ तभी दिखाई देंगे जब इसके क्रियान्वयन के सभी चरण पूरे हो जाएंगे।
स्टैटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स तालिका
| विषय | विवरण |
| कानून का नाम | महिला आरक्षण अधिनियम |
| संवैधानिक आधार | 106वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम 2023 |
| कार्यान्वयन तिथि | 17 अप्रैल 2026 |
| कार्यक्षेत्र | लोकसभा, राज्य विधानसभाएँ, दिल्ली विधानसभा |
| आरक्षण प्रतिशत | 33% |
| केंद्र शासित प्रदेश विशेष कानून | जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (दूसरा संशोधन) अधिनियम 2023, केंद्र शासित प्रदेश सरकार संशोधन अधिनियम 2023 |
| प्रमुख शर्त | जनगणना के बाद परिसीमन (Delimitation) |
| प्रासंगिक जनगणना | जनगणना 2027 |
| राजनीतिक मुद्दा | 2026 के विधेयक लोकसभा में पराजित |
| प्रभाव | विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधित्व में वृद्धि |





