प्रस्तावित संवैधानिक सुधार
केंद्र सरकार ने भारत की संसदीय प्रणाली का महत्वपूर्ण पुनर्गठन करने के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाना और परिसीमन के नियमों में संशोधन करना है।
इस सुधार का लक्ष्य भारत की बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है। इसका एक और उद्देश्य 2026 के बाद होने वाली जनगणना से जुड़ी देरी को दूर करना है, जिससे चुनावी समायोजन तेजी से किए जा सकें।
स्टेटिक GK तथ्य: लोकसभा की वर्तमान सदस्य संख्या 543 निर्वाचित सदस्य है, जिसमें मनोनीत सदस्य शामिल नहीं हैं।
लोकसभा सीटों का विस्तार
यह संशोधन लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव करता है। इसमें राज्यों से अधिकतम 815 प्रतिनिधि और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 तक सदस्य शामिल होंगे।
यह विस्तार जनसंख्या वृद्धि को दर्शाता है और विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है। इसका उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों के आकार में मौजूद असमानताओं को कम करना भी है।
स्टेटिक GK सुझाव: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 81 लोकसभा की संरचना को परिभाषित करता है।
2026 से पहले परिसीमन सुधार
इस विधेयक की एक प्रमुख विशेषता अनुच्छेद 82 में किया गया संशोधन है; वर्तमान में यह अनुच्छेद परिसीमन को 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना से जोड़ता है। यह संशोधन इस प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव करता है।
इस बदलाव से 2026 से पहले की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करना संभव हो जाएगा, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण पहले ही किया जा सकेगा। यह भारत की चुनावी नियोजन प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव है।
परिसीमन को समझना
परिसीमन से तात्पर्य जनसंख्या में हुए बदलावों के आधार पर संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने की प्रक्रिया से है। यह समान प्रतिनिधित्व और सीटों के निष्पक्ष वितरण को सुनिश्चित करता है।
इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी परिसीमन आयोग की होती है। यह सीटों के आवंटन का निर्धारण करता है, सीमाओं को फिर से निर्धारित करता है, और अनुसूचित जाति (SC) तथा अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणियों के लिए सीटें आरक्षित करता है।
स्टेटिक GK तथ्य: परिसीमन आयोग की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाती है, और इसमें चुनाव आयोग के अधिकारी भी शामिल होते हैं।
महिलाओं के आरक्षण पर असर
यह संशोधन अनुच्छेद 334A को भी लक्षित करता है, जो महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा है। यह 106वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2023 पर आधारित है, जो विधायिकाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करता है।
जल्दी परिसीमन को संभव बनाकर, यह विधेयक महिलाओं के आरक्षण को तेज़ी से लागू करने की अनुमति देता है। इससे 2026 के बाद की जनगणना के आंकड़ों का इंतज़ार करने की ज़रूरत खत्म हो जाती है।
संशोधन का महत्व
यह प्रस्ताव प्रतिनिधित्व में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान करता है, क्योंकि सीटों का मौजूदा आवंटन 1971 की जनगणना पर आधारित है। इसका उद्देश्य राजनीतिक प्रतिनिधित्व को वर्तमान जनसंख्या की वास्तविकताओं के अनुरूप बनाना है।
महिलाओं के आरक्षण को तेज़ी से लागू करने से शासन–प्रशासन में लैंगिक प्रतिनिधित्व में सुधार होगा। यह सुधार भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को भी मज़बूत करता है।
भारत में परिसीमन की पृष्ठभूमि
भारत में परिसीमन की प्रक्रिया को 1976 में राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए रोक दिया गया था। पिछली बड़ी प्रक्रिया 2002 में 2001 की जनगणना के आधार पर पूरी की गई थी।
अगला परिसीमन मूल रूप से 2026 की जनगणना के बाद निर्धारित था। नया प्रस्ताव चुनावी पुनर्गठन को पहले करने की दिशा में एक नीतिगत बदलाव का संकेत देता है।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| विधेयक का नाम | संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 |
| लोकसभा की संख्या | 850 सदस्यों तक बढ़ाने का प्रस्ताव |
| संशोधित अनुच्छेद | अनुच्छेद 81 और अनुच्छेद 82 |
| परिसीमन में बदलाव | 2026 की जनगणना से पहले अनुमति |
| महिला आरक्षण | अनुच्छेद 334A से संबंधित |
| आरक्षण प्रतिशत | महिलाओं के लिए 33% |
| पूर्व जनगणना आधार | 1971 (सीटें), 2001 (सीमाएं) |
| अंतिम परिसीमन | 2002 का अभ्यास |
| प्रमुख प्राधिकरण | परिसीमन आयोग |
| प्रमुख प्रभाव | बेहतर प्रतिनिधित्व और शीघ्र सुधार |





