रिपोर्ट का अवलोकन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा जारी भारतीय अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता रिपोर्ट 2025 (ISSAR 2025) वैश्विक और राष्ट्रीय अंतरिक्ष वातावरण का वार्षिक मूल्यांकन प्रदान करती है। यह उपग्रह गतिविधियों, मलबे के जोखिमों और कक्षीय रुझानों पर नज़र रखने के लिए तैयार की जाती है।
यह रिपोर्ट अंतरिक्ष में बढ़ती भीड़ को उजागर करती है और सतत अंतरिक्ष संचालन की आवश्यकता पर ज़ोर देती है। यह सरकारी और निजी अंतरिक्ष गतिविधियों में भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।
स्थैतिक GK तथ्य: ISRO की स्थापना 1969 में हुई थी और यह अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
वैश्विक अंतरिक्ष गतिविधि के रुझान
वर्ष 2025 में 328 प्रयासों में से 315 सफल प्रक्षेपण दर्ज किए गए, जिससे लगभग 4198 सक्रिय उपग्रह कक्षा में स्थापित हुए। यह उछाल अंतरिक्ष गतिविधियों के तेज़ी से व्यावसायीकरण और विस्तार का संकेत है।
एक उल्लेखनीय रुझान चंद्र अन्वेषण में बढ़ती रुचि थी, जिसमें निजी संस्थाओं द्वारा चार मिशन प्रक्षेपित किए गए। ब्लू घोस्ट मिशन 1 चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला निजी स्वामित्व वाला अंतरिक्ष यान बन गया।
स्थैतिक GK सुझाव: चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है और यह लगभग 27.3 दिनों में अपनी एक परिक्रमा पूरी करता है।
अंतरिक्ष में बढ़ती भीड़ के जोखिम
यह रिपोर्ट लगभग 1,60,000 ‘करीबी संपर्क चेतावनियों‘ को उजागर करती है, जो निचली पृथ्वी कक्षा (LEO) में बढ़ती भीड़ को दर्शाती हैं। इससे टकराव और अंतरिक्ष मलबे के निर्माण की संभावना बढ़ जाती है।
संचार उपग्रहों और मेगा–तारामंडलों (mega-constellations) की उपस्थिति के कारण LEO विशेष रूप से भीड़भाड़ वाला क्षेत्र बन गया है। इस भीड़ का प्रबंधन करना एक वैश्विक चुनौती बनता जा रहा है।
स्थैतिक GK तथ्य: निचली पृथ्वी कक्षा (LEO) पृथ्वी की सतह से लगभग 2000 किमी तक फैली हुई है।
भारतीय अंतरिक्ष परिदृश्य
वर्ष 2025 के अंत तक, भारत ने 144 अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित किए थे, जिसमें निजी और शैक्षणिक क्षेत्रों का भी योगदान शामिल था। GSLV-F15/NVS-02 मिशन सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया 100वाँ प्रक्षेपण था।
भारत सरकार के स्वामित्व में LEO में 22 और GEO में 31 सैटेलाइट ऑपरेट करता है। चल रहे मुख्य डीप स्पेस मिशन में चंद्रयान-2 ऑर्बिटर (CH2O) और आदित्य-L1 शामिल हैं, जो चंद्रमा और सूर्य के अध्ययन पर केंद्रित हैं।
Static GK Tip: जियोस्टेशनरी ऑर्बिट (GEO) पृथ्वी के भूमध्य रेखा से लगभग 35,786 km ऊपर स्थित है।
2025 के मुख्य मील के पत्थर
भारत ने SpaDeX मिशन जैसे महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए, जिसने स्पेस डॉकिंग क्षमताओं का प्रदर्शन किया। एक और मुख्य बात शुभांशु शुक्ला का Axiom-4 निजी मिशन की कमान संभालना था, जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए था।
ये घटनाक्रम मानव अंतरिक्ष उड़ान और उन्नत मिशन तकनीकों में भारत की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाते हैं।
Static GK fact: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी की परिक्रमा लगभग 400 km की ऊंचाई पर करता है।
अंतरिक्ष स्थिरता के लिए ISRO के प्रयास
ISRO ने Debris Free Space Mission (DFSM) के माध्यम से दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं, जिसका लक्ष्य 2030 तक कचरा–मुक्त संचालन करना है।
भारत ने श्रीहरिकोटा में NETRA (Network for Space Objects Tracking and Analysis) और Multi-Object Tracking Radar (MOTR) जैसी स्वदेशी प्रणालियाँ विकसित की हैं। नैनीताल में Baker-Nunn Schmidt Telescope (BNST) को भी अपग्रेड किया जा रहा है।
भारत Inter-Agency Space Debris Coordination Committee जैसी वैश्विक पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेता है, ताकि जिम्मेदार अंतरिक्ष प्रथाओं को बढ़ावा दिया जा सके।
Static GK Tip: अंतरिक्ष कचरे में खराब हो चुके सैटेलाइट, रॉकेट के चरण और पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे टकराव के टुकड़े शामिल होते हैं।
आगे की राह
ISSAR 2025 अंतरिक्ष के बदलते क्षेत्र में अवसरों और जोखिमों, दोनों पर प्रकाश डालता है। भारत को अपनी निगरानी प्रणालियों को मजबूत करना चाहिए, निजी क्षेत्र के नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए और सतत अंतरिक्ष शासन सुनिश्चित करना चाहिए।
विकास और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि अंतरिक्ष का क्षेत्र लगातार अधिक भीड़भाड़ वाला और प्रतिस्पर्धी होता जा रहा है।
स्टैटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स तालिका
| विषय | विवरण |
| रिपोर्ट का नाम | इंडियन स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस रिपोर्ट 2025 |
| जारीकर्ता | इसरो (ISRO) |
| सफल लॉन्च (2025) | 328 में से 315 |
| परिचालन उपग्रह | 4198 |
| क्लोज़ अप्रोच अलर्ट | ~1,60,000 |
| भारतीय अंतरिक्ष यान | 144 |
| प्रमुख मिशन | जीएसएलवी-एफ15 (GSLV-F15)/एनवीएस-02 (NVS-02) |
| सक्रिय मिशन | चंद्रयान-2 ऑर्बिटर, आदित्य-एल1 |
| स्थिरता पहल | डेब्रिस फ्री स्पेस मिशन |
| ट्रैकिंग सिस्टम | नेत्रा (NETRA), एमओटीआर (MOTR), बीएनएसटी (BNST) |





