बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता
घरेलू मांग में वृद्धि के बीच, भारत ने 2040 तक कोको के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने का एक दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में, भारत सालाना $866 मिलियन से अधिक मूल्य का कोको आयात करता है, जबकि घरेलू उत्पादन मांग का 20% से भी कम हिस्सा पूरा कर पाता है।
कोको चॉकलेट और कन्फेक्शनरी उद्योगों के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है, जो इसे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। खपत के बढ़ते रुझान स्थानीय उत्पादन को मजबूत करने की तात्कालिकता को और भी अधिक उजागर करते हैं।
स्टेटिक GK तथ्य: कोको मुख्य रूप से भूमध्य रेखा के 20 डिग्री अक्षांश के भीतर स्थित उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है।
राष्ट्रीय मिशन और प्रारंभिक चरण
इस रूपरेखा में 2026–2028 के दौरान ‘कोको पर राष्ट्रीय मिशन‘ शुरू करने का प्रस्ताव है। इस चरण का मुख्य उद्देश्य अनुसंधान और रोपण सामग्री के विकास के माध्यम से आधार को मजबूत करना है।
एक ‘उत्कृष्टता केंद्र (CoE)’ स्थापित किया जाएगा, जिसके साथ लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में पॉलीक्लोनल बीज उद्यान भी तैयार किए जाएंगे। इन पहलों का लक्ष्य उत्पादकता में सुधार करना और किसानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पौधे (सीडलिंग्स) सुनिश्चित करना है।
किसानों की क्षमता और डिजिटल प्रणालियाँ
2028 से 2030 तक, ध्यान किसानों के प्रशिक्षण और संस्थागत सहायता पर केंद्रित रहेगा। लगभग एक लाख किसानों को कोको की वैज्ञानिक खेती के तरीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा।
इस योजना में लगभग 25 मिलियन पौधे वितरित करना और एक डिजिटल किसान पंजीकरण प्रणाली शुरू करना शामिल है। कोको को खेत से बाजार तक ट्रैक करने के लिए ‘ट्रेसिबिलिटी सिस्टम‘ लागू किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।
स्टेटिक GK सुझाव: गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए वैश्विक कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं में ट्रेसिबिलिटी सिस्टम का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
विस्तार और प्रसंस्करण में वृद्धि
2030 और 2035 के बीच, इस रणनीति का लक्ष्य कोको की खेती का विस्तार करके इसे एक लाख हेक्टेयर तक पहुँचाना है। खेती की बेहतर तकनीकों और अनुसंधान के माध्यम से उपज बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे।
इस चरण के दौरान, भारत कोको प्रसंस्करण के बुनियादी ढांचे में भी निवेश करेगा, जिसका उद्देश्य ‘मूल्य संवर्धन (value addition)’ को मजबूत करना है। इसका लक्ष्य घरेलू मांग का कम से कम 50% हिस्सा स्थानीय उत्पादन के माध्यम से पूरा करना है।
अंतिम चरण और निर्यात की संभावनाएँ
2035 से 2040 तक, भारत का लक्ष्य पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनना और कोको प्रोसेसिंग का एक वैश्विक केंद्र बनना है। उम्मीद है कि देश आयातक से एक संभावित निर्यातक देश बन जाएगा।
घरेलू कोको की खपत 5.5% CAGR की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो 2040 तक लगभग 4.67 लाख टन तक पहुँच जाएगी। यह किसानों, उद्योगों और निर्यात के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है।
स्टेटिक GK तथ्य: आइवरी कोस्ट दुनिया का सबसे बड़ा कोको उत्पादक देश है, जो वैश्विक आपूर्ति में 40% से अधिक का योगदान देता है।
रणनीतिक महत्व
कोको मिशन ‘आत्मनिर्भर भारत‘ के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका मुख्य उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना है। यह किसानों की आय बढ़ाकर ग्रामीण आजीविका को भी संबल प्रदान करता है।
एक सुदृढ़ कोको इकोसिस्टम विकसित करने से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास, निर्यात की संभावनाओं और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में योगदान मिलेगा। यह कृषि विविधीकरण और मूल्य–वर्धित उत्पादन की दिशा में भारत के बढ़ते कदम को दर्शाता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| लक्ष्य वर्ष | 2040 तक कोको में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना |
| वर्तमान स्थिति | घरेलू मांग का 20% से कम पूरा |
| आयात मूल्य | प्रति वर्ष $866 मिलियन से अधिक |
| प्रमुख मिशन | राष्ट्रीय कोको मिशन |
| प्रारंभिक चरण | 2026–2028 में बीज उद्यान और उत्कृष्टता केंद्र पर ध्यान |
| किसान समर्थन | एक लाख किसानों को प्रशिक्षण |
| विस्तार लक्ष्य | एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती |
| प्रसंस्करण फोकस | कोको प्रसंस्करण इकाइयों का विकास |
| मांग अनुमान | 2040 तक 4.67 लाख टन |
| रणनीतिक लक्ष्य | आयात में कमी और निर्यात को बढ़ावा देना |





