राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य मूल्यांकन
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के 80वें दौर के तहत ‘घरेलू सामाजिक उपभोग: स्वास्थ्य‘ सर्वेक्षण जारी किया। इस सर्वेक्षण में जनवरी से दिसंबर 2025 तक की अवधि को शामिल किया गया।
यह भारत की स्वास्थ्य स्थिति की एक व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करता है, जिसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बीमारियों के पैटर्न, स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच और बीमा कवरेज पर विशेष ध्यान दिया गया है।
स्टेटिक GK तथ्य: राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) भारत के सबसे बड़े सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण तंत्रों में से एक है, जिसे 1950 में शुरू किया गया था।
रिपोर्ट की गई बीमारियों में वृद्धि
सर्वेक्षण में पाया गया कि 15 दिनों की संदर्भ अवधि में 13.1% व्यक्तियों ने किसी न किसी बीमारी से पीड़ित होने की जानकारी दी, जबकि 2017-18 में यह आँकड़ा 7.5% था। यह स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने या बीमारियों के प्रसार में हुई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
यह वृद्धि बेहतर जागरूकता और रिपोर्टिंग का संकेत है, लेकिन साथ ही यह आबादी के बीच बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों की ओर भी इशारा करती है।
आयु–वार अस्पताल में भर्ती होने के रुझान
अस्पताल में भर्ती होने की दर 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों में सबसे अधिक रही, जो 8.1% तक पहुँच गई। यह स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के प्रति बुजुर्ग आबादी की अधिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।
युवा आयु समूहों में अस्पताल में भर्ती होने की दर अपेक्षाकृत कम रही, जिससे यह संकेत मिलता है कि आयु–संबंधी स्वास्थ्य जोखिम अभी भी एक प्रमुख चिंता का विषय बने हुए हैं।
जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की ओर बदलाव
एक प्रमुख रुझान यह देखा गया है कि संक्रामक रोगों में कमी आई है, जबकि गैर–संक्रामक रोगों (NCDs) में वृद्धि हुई है। उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), मधुमेह (डायबिटीज़) और थायरॉइड संबंधी विकारों जैसी स्थितियों का योगदान इसमें सर्वाधिक रहा।
30 वर्ष की आयु के बाद, हृदय संबंधी और अंतःस्रावी/चयापचय (endocrine/metabolic) संबंधी बीमारियाँ सबसे अधिक रिपोर्ट की गईं। यह बदलती जीवनशैली के पैटर्न और तनाव से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में हुई वृद्धि को उजागर करता है।
स्टेटिक GK सुझाव: भारत में होने वाली 60% से अधिक मौतों के लिए गैर–संक्रामक रोग (NCDs) ही ज़िम्मेदार हैं।
मातृ स्वास्थ्य देखभाल में सुधार
सर्वेक्षण में लगभग 96% संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए, जो मातृ स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में हुई मज़बूत प्रगति का संकेत है। यह सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलों की सफलता को दर्शाता है। जननी सुरक्षा योजना जैसे कार्यक्रमों ने अस्पतालों में होने वाली डिलीवरी की संख्या बढ़ाने में योगदान दिया है, जिससे माँ और शिशु की मृत्यु दर में कमी आई है।
स्वास्थ्य बीमा का विस्तार
स्वास्थ्य बीमा कवरेज में काफ़ी विस्तार हुआ है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। ज़्यादातर लोग सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं में नामांकित हैं।
यह आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के प्रभाव को दर्शाता है, जिनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना है।
स्टेटिक GK तथ्य: आयुष्मान भारत दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है, जिसे 2018 में शुरू किया गया था।
स्टेटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| सर्वेक्षण का नाम | घरेलू सामाजिक उपभोग स्वास्थ्य सर्वेक्षण |
| आयोजित द्वारा | सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय |
| सर्वेक्षण अवधि | जनवरी से दिसंबर 2025 |
| बीमारी दर | 15-दिवसीय अवधि में 13.1% लोगों ने बीमारी की सूचना दी |
| अस्पताल में भर्ती | 60+ आयु वर्ग में सबसे अधिक (8.1%) |
| रोग प्रवृत्ति | गैर-संचारी रोगों में वृद्धि, संक्रामक रोगों में कमी |
| मातृ स्वास्थ्य | 96% संस्थागत प्रसव |
| बीमा कवरेज | वृद्धि हुई, मुख्यतः सरकारी योजनाओं के माध्यम से |





