स्वदेशी रक्षा को बढ़ावा
भारत ने स्वदेशी नवाचार के ज़रिए रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने आंतरिक सुरक्षा और नौसेना अभियानों के लिए दो अहम सिस्टम विकसित किए हैं। इनमें AI-आधारित प्रज्ञा सिस्टम और एयर ड्रॉपेबल कंटेनर ADC-150 शामिल हैं।
ये विकास रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर भारत के फोकस को उजागर करते हैं। ये ज़मीन और समुद्र, दोनों क्षेत्रों में परिचालन दक्षता को भी बेहतर बनाते हैं।
स्टैटिक GK तथ्य: DRDO की स्थापना 1958 में हुई थी और यह रक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है।
आंतरिक सुरक्षा के लिए प्रज्ञा सिस्टम
प्रज्ञा सिस्टम एक उन्नत AI-सक्षम सैटेलाइट इमेजिंग प्लेटफॉर्म है। इसे रियल–टाइम निगरानी को बेहतर बनाने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) को सौंपा गया है।
यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके संवेदनशील और सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी में मदद करता है। यह आतंकवाद–रोधी अभियानों और आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन में निर्णय लेने में सहायता करता है।
इस सिस्टम को DRDO की एक प्रमुख प्रयोगशाला, सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (CAIR) द्वारा विकसित किया गया था। यह आपात स्थितियों के दौरान तेज़ी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है और खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता को मज़बूत करता है।
स्टैटिक GK टिप: CAIR बेंगलुरु में स्थित है और AI तथा रोबोटिक्स अनुसंधान पर केंद्रित है।
नौसेना की लॉजिस्टिक्स के लिए ADC 150
ADC-150 एक स्वदेशी एयर ड्रॉपेबल कंटेनर सिस्टम है जिसे भारतीय नौसेना के लिए विकसित किया गया है। इसे समुद्र में आपात स्थितियों के दौरान ज़रूरी सामान पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
यह 150 किलोग्राम तक का पेलोड (सामान) ले जा सकता है, जिसमें मेडिकल किट, उपकरण और ज़रूरी भंडार शामिल हैं। यह तटरेखा से दूर संचालित होने वाले जहाज़ों के लिए लॉजिस्टिक्स सहायता को बेहतर बनाता है।
इस सिस्टम का परीक्षण P8I समुद्री गश्ती विमान से किए गए सफल परीक्षणों के ज़रिए किया गया था। विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए ये परीक्षण अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में किए गए थे।
स्टैटिक GK तथ्य: P8I विमान बोइंग P-8 पोसाइडन पर आधारित है और इसका उपयोग समुद्री निगरानी के लिए किया जाता है।
कई प्रयोगशालाओं का सहयोग
ADC-150 के विकास में DRDO की कई प्रयोगशालाएँ शामिल थीं। नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (NSTL) ने इस परियोजना का नेतृत्व किया। पैराशूट सिस्टम को एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE) ने विकसित किया था। इसका सर्टिफिकेशन सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC) ने किया।
इंस्ट्रूमेंटेशन सपोर्ट डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी (DRDL) ने दिया। इस मिलकर किए गए प्रयास से हाई–क्वालिटी डेवलपमेंट और टेस्टिंग पक्का हुआ।
आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
ये डेवलपमेंट डिफेंस के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत‘ पहल को सपोर्ट करते हैं। देश में बने सिस्टम विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कम करते हैं और रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाते हैं।
‘प्रज्ञा‘ सिस्टम रियल–टाइम इंटेलिजेंस के ज़रिए आंतरिक सुरक्षा को मज़बूत करता है। ADC-150 नौसेना के ऑपरेशन्स के लिए इमरजेंसी लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाता है।
ये सभी इनोवेशन मिलकर आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के खिलाफ भारत की तैयारी को और बेहतर बनाते हैं। ये भारत के डिफेंस रिसर्च इकोसिस्टम की बढ़ती क्षमताओं को भी दिखाते हैं।
स्टेटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| संगठन | रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन |
| प्रज्ञा प्रणाली | आंतरिक सुरक्षा के लिए एआई आधारित सैटेलाइट इमेजिंग |
| विकसित द्वारा | कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स केंद्र |
| संबंधित मंत्रालय | गृह मंत्रालय |
| एडीसी-150 | 150 किलोग्राम क्षमता वाला एयर ड्रॉपेबल कंटेनर |
| उपयोगकर्ता | भारतीय नौसेना |
| उपयोग किया गया विमान | पी8आई समुद्री गश्ती विमान |
| प्रमुख पहल | आत्मनिर्भर भारत |





