ऐतिहासिक चुनावी बदलाव
1967 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव भारतीय राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हुए। द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) ने पहली बार सरकार बनाई, जिससे राज्य में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लंबे समय से चला आ रहा दबदबा खत्म हो गया।
यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि स्वतंत्र भारत में यह पहला ऐसा मौका था जब किसी क्षेत्रीय पार्टी ने किसी राष्ट्रीय पार्टी को हराकर सत्ता हासिल की थी। यह बढ़ती क्षेत्रीय आकांक्षाओं और पहचान–आधारित राजनीति को दर्शाता था।
स्टेटिक GK तथ्य: तमिलनाडु को पहले ‘मद्रास राज्य‘ के नाम से जाना जाता था, जब तक कि 1969 में इसका आधिकारिक तौर पर नाम नहीं बदल दिया गया।
अन्नादुरई का उदय
द्रविड़ आंदोलन के एक प्रमुख नेता C. N. अन्नादुरई ने इस राजनीतिक बदलाव में केंद्रीय भूमिका निभाई। दिलचस्प बात यह है कि 1962 के विधानसभा चुनाव में वे कांचीपुरम सीट से S. V. नटेसा मुदलियार से लगभग 10,000 वोटों के अंतर से हार गए थे।
1967 में, अन्नादुरई ने विधानसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया। इसके बजाय, उन्होंने मद्रास दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जिससे उनकी ज़बरदस्त लोकप्रियता साबित हुई।
सरकार का गठन
DMK की शानदार जीत के बाद, अन्नादुरई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। चूंकि वे विधायक (MLA) नहीं थे, इसलिए संवैधानिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बाद में वे विधान परिषद के सदस्य बने।
DMK सरकार ने सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय पहचान और भाषाई गौरव पर केंद्रित नीतियां लागू कीं, जिससे शासन में द्रविड़ विचारधारा को और मज़बूती मिली।
स्टेटिक GK टिप: विधान परिषद उन राज्यों में उच्च सदन होता है जहां द्विसदनीय विधायिका होती है, हालांकि तमिलनाडु में फिलहाल विधान परिषद नहीं है।
कांग्रेस के वर्चस्व का अंत
1967 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की हार के साथ ही, आज़ादी के बाद से तमिलनाडु में चला आ रहा उसका निर्बाध शासन समाप्त हो गया। यह बदलाव केंद्र की नीतियों के प्रति असंतोष और क्षेत्रीय नेतृत्व की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता था।
DMK की सफलता ने पूरे भारत में क्षेत्रीय पार्टियों के उदय को भी प्रेरित किया, जिससे देश की संघीय राजनीतिक संरचना का स्वरूप ही बदल गया।
दीर्घकालिक प्रभाव
1967 के बाद से, तमिलनाडु में किसी भी राष्ट्रीय पार्टी ने अकेले दम पर सरकार नहीं बनाई है। राज्य की राजनीति पर DMK और AIADMK जैसी क्षेत्रीय पार्टियों का ही दबदबा रहा है।
इस राजनीतिक बदलाव ने तमिलनाडु को द्रविड़ राजनीति के एक गढ़ के रूप में स्थापित किया, जिसने दशकों तक शासन–प्रशासन, कल्याणकारी नीतियों और चुनावी रणनीतियों को प्रभावित किया।
स्टेटिक GK तथ्य: भारतीय राज्यों में तमिलनाडु में मतदाताओं की भागीदारी दर (voter turnout rate) सबसे अधिक में से एक है, जो यहाँ की मज़बूत राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| चुनाव वर्ष | 1967 |
| विजेता दल | DMK |
| प्रमुख नेता | सी. एन. अन्नादुरै |
| प्रमुख परिणाम | पहली क्षेत्रीय पार्टी की सरकार |
| कांग्रेस की स्थिति | लंबे शासन के बाद पराजित |
| अन्नादुरै की भूमिका | मुख्यमंत्री और MLC |
| लोकसभा सीट | मद्रास साउथ |
| राजनीतिक प्रभाव | क्षेत्रीय दलों का उदय |
| राज्य का नाम | मद्रास राज्य (1969 में नाम बदला) |
| दीर्घकालिक प्रवृत्ति | 1967 के बाद से कोई राष्ट्रीय दल का शासन नहीं |





