अद्वितीय शिलालेखों की खोज
तंजावुर के बृहदीश्वर मंदिर में कुछ दुर्लभ शिलालेख मिले हैं, जो शिवाजी महाराज और अफजल खान के बीच हुए प्रसिद्ध टकराव की कहानी बताते हैं। ये शिलालेख मंदिर के दक्षिण–पश्चिमी दीवारों पर, विनायक (गणेश) मंदिर के पास उकेरे गए हैं।
ये शिलालेख मराठी भाषा में लिखे गए हैं, जो तमिलनाडु में मराठा शासन के प्रभाव को दर्शाते हैं। यह उस काल में उत्तरी और दक्षिणी भारत के बीच हुए सांस्कृतिक मेलजोल को भी उजागर करता है।
स्टेटिक GK तथ्य: बृहदीश्वर मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में राजराजा चोल प्रथम ने करवाया था और यह एक UNESCO विश्व धरोहर स्थल है।
सरफोजी द्वितीय के शासनकाल से जुड़ाव
ये शिलालेख तंजावुर के भोंसले राजवंश के एक प्रमुख शासक, सरफोजी द्वितीय के शासनकाल से संबंधित हैं। वे शिक्षा और कला को बढ़ावा देने, तथा ऐतिहासिक घटनाओं का विस्तृत और सटीक ब्योरा रखने के लिए जाने जाते थे।
ये शिलालेख न केवल स्थानीय इतिहास को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि मराठा राजनीति के व्यापक घटनाक्रमों को भी दर्ज करते हैं। इससे पता चलता है कि किस तरह उस समय क्षेत्रीय मंदिरों का उपयोग इतिहास को दर्ज करने के माध्यम के रूप में किया जाता था।
स्टेटिक GK सुझाव: 17वीं शताब्दी में नायकों (Nayaks) के शासन के पतन के बाद, भोंसले राजवंश ने तंजावुर पर शासन किया था।
शिवाजी–अफजल खान टकराव का वर्णन
ये शिलालेख महाराष्ट्र के जावली (प्रतापगढ़ क्षेत्र) में हुई उस ऐतिहासिक मुलाकात का सजीव वर्णन करते हैं, जहाँ शिवाजी ने अफजल खान को मार गिराया था। इस विवरण के अनुसार, उस टकराव के दौरान अपनी आत्मरक्षा के लिए शिवाजी ने ‘वाघ नख‘ (बाघ के पंजे के आकार का हथियार) का इस्तेमाल किया था।
यह प्रसंग मराठा इतिहास की सबसे प्रसिद्ध घटनाओं में से एक है और यह शिवाजी की रणनीतिक कुशलता तथा उनके अदम्य साहस का प्रतीक है। मंदिर में मिले ये शिलालेख इस ऐतिहासिक गाथा को सुरक्षित रखने वाले एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत के रूप में कार्य करते हैं।
अन्य ऐतिहासिक घटनाओं के संदर्भ
इन शिलालेखों में इस बात का भी उल्लेख है कि सरफोजी द्वितीय ने तमिलनाडु के मरुदु बंधुओं के साथ हुए संघर्ष के दौरान अंग्रेजों का समर्थन किया था। यह घटना औपनिवेशिक काल के दौरान मौजूद जटिल राजनीतिक गठबंधनों की ओर संकेत करती है।
इसके अतिरिक्त, इन शिलालेखों में फ्रेडरिक क्रिश्चियन श्वार्ट्ज का भी संदर्भ मिलता है; वे एक डेनिश मिशनरी थे जिन्होंने तंजावुर के प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सरफ़ोजी II के साथ उनका जुड़ाव दक्षिण भारत में शुरुआती यूरोपीय प्रभाव को दर्शाता है।
स्टैटिक GK तथ्य: मरुदु भाई स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 18वीं सदी के आखिर में तमिलनाडु में ब्रिटिश शासन के खिलाफ़ प्रतिरोध का नेतृत्व किया था।
ऐतिहासिक महत्व
ये शिलालेख इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये मराठा इतिहास को तमिल विरासत से जोड़ते हैं और राजनीतिक, सांस्कृतिक और सैन्य घटनाओं के बारे में जानकारी देते हैं। ये यह भी दिखाते हैं कि मंदिर किस तरह ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के भंडार के रूप में काम करते थे।
तमिलनाडु में मराठी शिलालेखों की मौजूदगी इस क्षेत्र में मराठों की प्रशासनिक और सांस्कृतिक पहुँच को उजागर करती है।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| स्थान | बृहदीश्वर मंदिर, तंजावुर |
| भाषा | मराठी |
| काल | सेरफोजी द्वितीय का शासनकाल |
| वंश | भोंसले वंश |
| प्रमुख घटना | शिवाजी–अफजल खान मुठभेड़ |
| उल्लेखित हथियार | टाइगर-क्लॉ (वाघ नख) |
| अतिरिक्त संदर्भ | मरुदु बंधुओं के विरुद्ध ब्रिटिश को समर्थन |
| विदेशी व्यक्तित्व | फ्रेडरिक क्रिश्चियन श्वार्ट्ज |
| सांस्कृतिक पहलू | तमिलनाडु में मराठा प्रभाव |
| महत्व | शिलालेखों के माध्यम से ऐतिहासिक दस्तावेज़ीकरण |





