पुणे की शहरी प्रदूषण से निपटने की एक बड़ी पहल
पुणे शहर के सबसे व्यस्त कमर्शियल इलाकों में से एक, शिवाजीनगर क्षेत्र में भारत का पहला ‘लो एमिशन ज़ोन‘ (LEZ) बनाने की तैयारी कर रहा है। इस प्रोजेक्ट को पुणे नगर निगम (PMC) द्वारा ITDP इंडिया के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। इस पहल का मकसद वाहनों से होने वाले हानिकारक प्रदूषण को कम करना और शहरी हवा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
यह प्रस्ताव महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2021 से जुड़ा है, जो स्वच्छ परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देता है और प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन वाले वाहनों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित करता है। अधिकारियों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट प्रदूषण के बढ़ते स्तर का सामना कर रहे अन्य भारतीय शहरों के लिए एक मॉडल बन सकता है।
स्टेटिक GK तथ्य: पुणे महाराष्ट्र में मूला और मुठा नदियों के किनारे बसा है।
‘लो एमिशन ज़ोन‘ क्या है?
‘लो एमिशन ज़ोन‘ एक तय शहरी इलाका होता है, जहाँ ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक होती है या उसे नियंत्रित किया जाता है। इन ज़ोन का इस्तेमाल यूरोपीय देशों में पुराने डीज़ल और पेट्रोल वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। ये पाबंदियाँ आमतौर पर वाहन की उम्र, उत्सर्जन मानकों या प्रदूषण शुल्क पर आधारित होती हैं।
पुणे के प्रस्ताव के अनुसार, पुराने इंजन वाली तकनीक का इस्तेमाल करने वाले वाहनों पर या तो पाबंदी लगाई जा सकती है, या फिर उन्हें इस ज़ोन में प्रवेश करने के लिए प्रदूषण शुल्क देना पड़ सकता है। अधिकारियों को उम्मीद है कि पहले चरण में ‘भारत स्टेज-III‘ और उससे पुराने वाहनों पर, खासकर 2011 से पहले रजिस्टर्ड वाहनों पर ध्यान दिया जाएगा।
स्टेटिक GK टिप: ‘भारत स्टेज‘ उत्सर्जन मानकों को भारत सरकार द्वारा वाहनों से निकलने वाले वायु प्रदूषकों को नियंत्रित करने के लिए लागू किया जाता है।
दायरा और छूट
प्रस्तावित LEZ में शिवाजीनगर के आसपास पुणे शहर का लगभग 7% से 10% हिस्सा शामिल होने की उम्मीद है। कमर्शियल और परिवहन गतिविधियों के कारण इस इलाके में वाहनों की आवाजाही बहुत ज़्यादा होती है और हवा में प्रदूषण का स्तर भी काफी गंभीर रहता है।
वाहनों की कुछ खास श्रेणियों को इन पाबंदियों से छूट मिलने की उम्मीद है। इनमें ऑटो–रिक्शा, सार्वजनिक परिवहन बसें और आपातकालीन सेवाओं वाले वाहन शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि शहरी जीवन के लिए ज़रूरी सेवाओं में कोई रुकावट न आए, इसके लिए ऐसी छूट देना ज़रूरी है।
इस प्रोजेक्ट के तहत नियमों का पालन न करने वाले वाहनों पर रोज़ाना के हिसाब से प्रदूषण शुल्क भी लगाया जा सकता है। जो लोग शुल्क देने से बचेंगे या नियमों का उल्लंघन करेंगे, उन पर ज़्यादा जुर्माना लगाए जाने की उम्मीद है।
टेक्नोलॉजी–आधारित मॉनिटरिंग
लो एमिशन ज़ोन की मॉनिटरिंग के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों का इस्तेमाल करने की योजना है। ये सिस्टम गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर को अपने-आप पहचानने के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं।
ANPR टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दुनिया भर में पहले से ही ट्रैफिक मैनेजमेंट, टोल सिस्टम और कानून लागू करने के कामों के लिए किया जा रहा है। पुणे में, यह सिस्टम अधिकारियों को प्रतिबंधित इलाकों में घुसने वाली प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों पर नज़र रखने और कानून लागू करने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
स्टैटिक GK फैक्ट: ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) टेक्नोलॉजी छपे हुए या हाथ से लिखे टेक्स्ट को मशीन-पढ़ने लायक डिजिटल डेटा में बदल देती है।
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम से जुड़ाव
LEZ पहल 2019 में शुरू किए गए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) से जुड़ी हुई है। NCAP का मुख्य मकसद भारत के उन बड़े शहरों में पार्टिकुलेट प्रदूषण के स्तर को कम करना है जिन्हें ‘नॉन–अटेनमेंट सिटी‘ (प्रदूषण के तय मानकों को पूरा न करने वाले शहर) के तौर पर बांटा गया है।
2023 के एक सर्वे से पता चला कि पुणे और पिंपरी–चिंचवाड़ में लगभग 70% पेट्रोल, डीज़ल और CNG गाड़ियां अभी भी भारत स्टेज-IV या उससे पुराने मानकों के तहत चल रही थीं। इस बात ने प्रदूषण कंट्रोल के लिए और भी सख्त कदम उठाने की ज़रूरत को उजागर किया।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| प्रस्तावित पहल | लो एमिशन ज़ोन |
| शहर | पुणे |
| प्रमुख क्षेत्र | शिवाजीनगर |
| कार्यान्वयन संस्था | पुणे महानगरपालिका |
| सहयोगी संगठन | आईटीडीपी इंडिया |
| संबंधित नीति | महाराष्ट्र ईवी नीति 2021 |
| लक्षित वाहन | भारत स्टेज-III और उससे पुराने वाहन |
| निगरानी तकनीक | एएनपीआर कैमरे |
| राष्ट्रीय कार्यक्रम | राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम |
| NCAP प्रारंभ वर्ष | 2019 |





