लोकसभा की सदस्य संख्या का विस्तार
केंद्र सरकार ने लोकसभा का काफी विस्तार करने के लिए संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तावित किया है। इसमें सदस्यों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है, जो भारत की बढ़ती आबादी और लोकतांत्रिक ज़रूरतों को दर्शाता है।
यह संशोधन अनुच्छेद 81 में बदलाव करता है, जिसके तहत राज्यों से 815 तक और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्य हो सकते हैं। इसका उद्देश्य सभी क्षेत्रों को बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
स्टेटिक GK तथ्य: लोकसभा संसद का निचला सदन है, जिसकी संविधान के अनुसार वर्तमान अधिकतम सदस्य संख्या 552 है।
परिसीमन नियमों में बदलाव
एक बड़ा सुधार अनुच्छेद 82 से जुड़ा है, जो वर्तमान में परिसीमन को 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना से जोड़ता है। प्रस्तावित संशोधन इस प्रतिबंध को हटा देता है, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पहले ही फिर से निर्धारित करना संभव हो जाता है।
इसका मतलब है कि सीटों का पुनर्वितरण 2026 के बाद की जनगणना के आंकड़ों का इंतज़ार किए बिना किया जा सकता है। यह चुनावी पुनर्गठन की नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
स्टेटिक GK सुझाव: परिसीमन आबादी में बदलाव के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों को समायोजित करके समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है।
परिसीमन प्रक्रिया को समझना
परिसीमन का अर्थ है संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करना। यह राज्यों के बीच सीटों के आवंटन को भी तय करता है और SC/ST श्रेणियों के लिए सीटें आरक्षित करता है।
परिसीमन आयोग इस प्रक्रिया के लिए ज़िम्मेदार होता है और आमतौर पर इसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करते हैं, जिनके साथ चुनाव आयोग के अधिकारी भी होते हैं।
इसके निर्णय अंतिम होते हैं और उन्हें न्यायालयों में चुनौती नहीं दी जा सकती, जिससे चुनावी सीमाओं के निर्धारण में निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत में परिसीमन का पिछला कार्य 2001 की जनगणना के आधार पर 2002 में किया गया था।
महिला आरक्षण से जुड़ाव
यह संशोधन अनुच्छेद 334A पर भी प्रभाव डालता है, जो विधायिकाओं में महिलाओं के आरक्षण से संबंधित है। यह 106वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2023 पर आधारित है, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण प्रदान करता है।
पहले, इसका लागू होना 2026 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन पर निर्भर था। अब, परिसीमन के तुरंत बाद आरक्षण लागू किया जा सकता है, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में तेज़ी आएगी।
Static GK टिप: संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण, शासन–प्रशासन में लैंगिक समानता के लिए लंबे समय से चली आ रही एक माँग रही है।
इस सुधार का महत्व
इस संशोधन के बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक निहितार्थ हैं। लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ने से प्रतिनिधित्व बेहतर होता है और यह जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं को दर्शाता है।
वर्तमान में, सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना पर आधारित है, जबकि निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ 2001 की जनगणना पर निर्भर करती हैं। इस विसंगति के कारण सुधार की आवश्यकता महसूस हुई।
महिलाओं के लिए आरक्षण को तेज़ी से लागू करने से समावेशिता बढ़ेगी और लोकतांत्रिक संस्थाएँ मज़बूत होंगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में कई बार परिसीमन की प्रक्रियाएँ पूरी की गई हैं, लेकिन 1976 से 2026 के बीच इनमें बदलावों को रोक दिया गया था, ताकि अलग–अलग जनसंख्या वृद्धि दर वाले राज्यों के बीच संतुलन बना रहे।
यह रोक 2026 तक जारी रही, जिससे सीटों के पुनर्वितरण में देरी हुई। नया प्रस्ताव समय पर चुनावी समायोजन की दिशा में एक बदलाव का संकेत देता है।
Static GK तथ्य: परिसीमन पर यह रोक 42वें संवैधानिक संशोधन के दौरान जनसंख्या नियंत्रण उपायों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगाई गई थी।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| संशोधन विधेयक | संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 |
| लोकसभा की शक्ति | 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव |
| संशोधित प्रमुख अनुच्छेद | अनुच्छेद 81 और अनुच्छेद 82 |
| परिसीमन परिवर्तन | 2026 की जनगणना से पहले अनुमति |
| आयोग की भूमिका | निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण और सीटों का आवंटन |
| महिला आरक्षण | 106वें संशोधन अधिनियम, 2023 के तहत 33% |
| वर्तमान आधार | 1971 की जनगणना (सीटें), 2001 की जनगणना (सीमाएँ) |
| ऐतिहासिक स्थगन | 1976 से परिसीमन स्थगित |





