ऐतिहासिक पुनर्चुनाव
हरिवंश नारायण सिंह 17 अप्रैल 2026 को लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के उपसभापति के तौर पर निर्विरोध चुने गए। यह भारत के संसदीय इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
वह इस पद को संभालने वाले पहले मनोनीत सदस्य बन गए हैं। उन्होंने उस पुरानी परंपरा को तोड़ा है, जिसमें इस भूमिका पर चुने हुए सदस्यों का ही दबदबा रहता था। यह चुनाव उनके संसदीय आचरण पर सभी दलों की मज़बूत सहमति और भरोसे को दिखाता है।
निर्विरोध चुनाव का महत्व
उनके चुनाव का प्रस्ताव सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने पेश किया। विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया गया, जो राजनीतिक दलों के बीच एक दुर्लभ एकता का संकेत है।
उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया था, और यह पद बिना किसी मुकाबले के आसानी से भर दिया गया। यह संसदीय कामकाज में संस्थागत स्थिरता को दर्शाता है।
स्टेटिक GK तथ्य: राज्यसभा संसद का उच्च सदन है और यह भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है।
उपसभापति की भूमिका और शक्तियाँ
राज्यसभा के उपसभापति, सभापति (जो भारत के उपराष्ट्रपति होते हैं) की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता करते हैं। यह पद बहसों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करता है और सदन में अनुशासन बनाए रखता है।
उपसभापति का चुनाव राज्यसभा के सदस्यों द्वारा, उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से किया जाता है। यह चुनाव सभापति की देखरेख में संपन्न होता है।
स्टेटिक GK टिप: राज्यसभा के सभापति भारत के उपराष्ट्रपति होते हैं; वर्तमान में यह पद जगदीप धनखड़ के पास है।
कार्यकाल और पद से हटाने की शर्तें
उपसभापति का कार्यकाल आम तौर पर राज्यसभा में उनकी सदस्यता के कार्यकाल के साथ ही समाप्त होता है। हालाँकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में यह पद पहले भी रिक्त हो सकता है।
इन परिस्थितियों में सभापति को इस्तीफा देना, सदस्यता समाप्त हो जाना, या सदन के प्रभावी बहुमत द्वारा पद से हटाया जाना शामिल है। यह संसदीय प्रक्रियाओं के भीतर जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
हरिवंश का परिचय
हरिवंश एक पत्रकार से राजनेता बने हैं, जो अपने शांत और संतुलित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले, उन्होंने एक प्रमुख हिंदी समाचार पत्र ‘प्रभात खबर‘ के संपादक के रूप में कार्य किया था। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके अनुभव ने संसदीय कार्यवाही में उनके निष्पक्ष और अनुशासित आचरण में अहम योगदान दिया है। उनकी नेतृत्व शैली की सभी राजनीतिक दलों में व्यापक रूप से सराहना की जाती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी और संसदीय कामकाज में उनके योगदान की सराहना की। मल्लिकार्जुन खड़गे सहित विपक्षी नेताओं ने भी उन्हें अपना समर्थन दिया।
यह दुर्लभ द्विदलीय समर्थन लोकतांत्रिक संस्थाओं में आम सहमति पर आधारित नेतृत्व के महत्व को रेखांकित करता है। उनका पुनर्चयन प्रक्रियागत विशेषज्ञता और निष्पक्षता में विश्वास को और मज़बूत करता है।
स्टेटिक GK तथ्य: राज्यसभा के मनोनीत सदस्य की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में उनकी विशेषज्ञता के आधार पर की जाती है।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| घटना | राज्यसभा के उपसभापति का पुनः निर्वाचन |
| व्यक्ति | हरिवंश नारायण सिंह |
| तिथि | 17 अप्रैल 2026 |
| कार्यकाल | लगातार तीसरा कार्यकाल |
| विशेष विशेषता | इस पद पर रहने वाले पहले मनोनीत सदस्य |
| निर्वाचन विधि | उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का साधारण बहुमत |
| प्रस्ताव प्रस्तुत किया | जे. पी. नड्डा |
| राज्यसभा के सभापति | भारत के उपराष्ट्रपति |
| हटाने की विधि | प्रभावी बहुमत का प्रस्ताव |
| पृष्ठभूमि | पत्रकार और प्रभात खबर के पूर्व संपादक |





