पॉलिसी का विज़न और उद्देश्य
दिल्ली सरकार एक खास ‘दिल्ली सेमीकंडक्टर पॉलिसी‘ का मसौदा तैयार कर रही है, जिसका मकसद राजधानी को चिप डिज़ाइन और इनोवेशन के एक हब के तौर पर स्थापित करना है। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक निवेश को आकर्षित करना, युवाओं के कौशल को बढ़ाना और उद्योग के लिए तैयार इकोसिस्टम बनाना है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत‘ के राष्ट्रीय विज़न के साथ पूरी तरह से मेल खाती है।
यह पॉलिसी ज़्यादा पूंजी वाली फैब्रिकेशन यूनिट्स के बजाय, ज़्यादा मूल्य वाले सेगमेंट्स पर फोकस करती है। यह रणनीतिक बदलाव भारत की बदलती सेमीकंडक्टर प्राथमिकताओं को दिखाता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत ने 2021 में घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन‘ शुरू किया था।
रणनीतिक सेगमेंट्स पर फोकस
इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल और रक्षा प्रणालियों जैसे क्षेत्रों के लिए सेमीकंडक्टर बहुत ज़रूरी हैं। दिल्ली का लक्ष्य चिप डिज़ाइन, रिसर्च और डेवलपमेंट, और बौद्धिक संपदा (IP) निर्माण में विशेषज्ञता हासिल करना है। इन सेगमेंट्स में कम पूंजी की ज़रूरत होती है, लेकिन इनसे तकनीकी रूप से बहुत ज़्यादा मूल्य मिलता है।
यह पॉलिसी वेफर फैब्रिकेशन में भारी निवेश से बचती है, जिसके लिए बहुत बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की ज़रूरत होती है। इसके बजाय, यह इनोवेशन–आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
स्टैटिक GK टिप: सेमीकंडक्टर मुख्य रूप से सिलिकॉन से बने होते हैं, जो पृथ्वी पर सबसे ज़्यादा पाए जाने वाले तत्वों में से एक है।
पॉलिसी के पाँच मुख्य स्तंभ
पॉलिसी का मसौदा पाँच मुख्य स्तंभों पर आधारित है। इनमें डिज़ाइन और IP विकास, रिसर्च और इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग–सक्षम गतिविधियाँ, टैलेंट डेवलपमेंट और स्टार्टअप को सहायता देना शामिल है। यह एकीकृत दृष्टिकोण इकोसिस्टम के लंबे समय तक विकास को सुनिश्चित करता है।
मैन्युफैक्चरिंग–सक्षम गतिविधियों में ATMP (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) और OSAT (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग) यूनिट्स शामिल हैं। ये सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के लिए बहुत ज़रूरी हैं।
प्रोत्साहन और इकोसिस्टम का विकास
उम्मीद है कि यह पॉलिसी निवेशकों को वित्तीय और गैर–वित्तीय, दोनों तरह के प्रोत्साहन देगी। इनमें पूंजीगत सहायता, इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुँच और ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस (व्यापार करने में आसानी)‘ से जुड़े उपाय शामिल हैं। ऐसे प्रोत्साहनों का उद्देश्य काम–काज में आने वाली रुकावटों को कम करना है।
दिल्ली सेमीकंडक्टर इनपुट्स और सेवाओं से जुड़ी सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा देने की योजना बना रही है। इससे एक व्यापक और आपस में जुड़ा हुआ औद्योगिक इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलेगी।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत अपनी सेमीकंडक्टर ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे घरेलू उत्पादन रणनीतिक रूप से बहुत ज़रूरी हो जाता है।
रोज़गार और कौशल विकास
पॉलिसी का एक मुख्य फोकस, ज़्यादा कौशल वाले क्षेत्रों में रोज़गार पैदा करना है। चिप डिज़ाइन, सेमीकंडक्टर रिसर्च और पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में रोज़गार के काफ़ी अवसर हैं। सरकार का लक्ष्य है कि वह खास स्किलिंग प्रोग्राम के ज़रिए युवाओं को इसके लिए तैयार करे।
यह पहल इंडस्ट्री की ज़रूरतों और वर्कफ़ोर्स की क्षमताओं के बीच के अंतर को कम कर सकती है। यह भारत के ज्ञान–आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने में भी मदद करती है।
राष्ट्रीय महत्व और भविष्य की संभावनाएँ
दिल्ली सेमीकंडक्टर पॉलिसी इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी राष्ट्रीय पहलों को पूरा करती है। यह निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है और घरेलू तकनीकी प्रगति में मदद करती है। यह पॉलिसी ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भरता को भी कम करती है।
अगर इसे असरदार तरीके से लागू किया जाए, तो दिल्ली भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक अहम इनोवेशन और डिज़ाइन हब के तौर पर उभर सकती है। इससे आर्थिक विकास और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| दिल्ली सेमीकंडक्टर नीति | चिप डिजाइन और नवाचार हब विकसित करने का लक्ष्य |
| इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन | 2021 में शुरू की गई राष्ट्रीय पहल |
| प्रमुख फोकस क्षेत्र | डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, बौद्धिक संपदा सृजन, उन्नत पैकेजिंग |
| ATMP | असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग |
| OSAT | आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग |
| नीति उद्देश्य | निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन |
| रणनीतिक लक्ष्य | सेमीकंडक्टर में आयात निर्भरता कम करना |
| रोजगार फोकस | चिप डिजाइन और अनुसंधान में उच्च-कौशल नौकरियाँ |





