VB-G RAM G, MGNREGA की जगह लेगा
‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025′, जिसे आमतौर पर VB-G RAM G के नाम से जाना जाता है, 1 जुलाई 2026 से ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी एक्ट‘ (MGNREGA) की जगह लेने वाला है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने नए ढांचे को लागू करने के लिए आठ ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। सरकार ने नियमों को औपचारिक रूप से अधिसूचित करने से पहले जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: MGNREGA 2005 में लागू किया गया था और यह उन ग्रामीण परिवारों को कानूनी रोज़गार गारंटी देता है जो बिना कौशल वाले शारीरिक काम करने के इच्छुक हैं।
MGNREGA: पुराना ढांचा
MGNREGA के तहत, ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिन के गारंटीड वेतन वाले रोज़गार का अधिकार था।
यह प्रोग्राम मुख्य रूप से मांग–आधारित मॉडल पर चलता था, जिसमें आवंटन राज्यों द्वारा जमा किए गए लेबर बजट से जुड़े होते थे। 2025–26 में, इस स्कीम से पांच करोड़ से ज़्यादा ग्रामीण परिवारों को फायदा हुआ, जबकि केंद्र ने वेतन का पूरा खर्च उठाया।
रोज़गार गारंटी 125 दिन तक बढ़ाई गई
VB-G RAM G के तहत एक बड़ा बदलाव गारंटीड रोज़गार को हर साल 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करना है।
यह कानूनी रोज़गार गारंटी में 25% की बढ़ोतरी है।
हालांकि, नया ढांचा खेती के मुख्य बुवाई और कटाई के मौसम के दौरान 60 दिन का ब्रेक लाता है। इसका मकसद खेती के अहम समय के दौरान खेती के लिए मज़दूरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
स्टैटिक GK टिप: अतिरिक्त 25 दिन सालाना रोज़गार गारंटी को बढ़ाते हैं, लेकिन मौसमी ब्रेक यह बदल देता है कि लाभार्थी कब रोज़गार मांग सकते हैं।
राज्यों को फंडिंग का 40% बोझ उठाना होगा
एक बड़ा ढांचागत बदलाव फाइनेंसिंग से जुड़ा है।
पुराने MGNREGA ढांचे के तहत, केंद्र वेतन बिल का 100% खर्च उठाता था। VB-G RAM G के तहत, राज्य आम तौर पर फंडिंग का 40% बोझ उठाएंगे, जिससे उनकी वित्तीय ज़िम्मेदारी बढ़ेगी।
कुछ क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्थाएँ लागू हैं:
- पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य: केंद्र 90% खर्च उठाता है।
- विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश: केंद्र 90% खर्च उठाता है।
- बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश: केंद्र 100% खर्च उठाता है।
इस बदलाव से उन राज्यों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है जहाँ ग्रामीण रोज़गार की माँग ज़्यादा है।
माँग–आधारित से मानक आवंटन (Normative Allocation) की ओर
VB-G RAM G फंड आवंटन के तरीके को बदलता है।
मुख्य रूप से राज्यों द्वारा जमा किए गए लेबर बजट पर निर्भर रहने के बजाय, केंद्र सरकार हर राज्य के लिए एक मानक आवंटन तय करेगी। यह माँग–आधारित मॉडल से हटकर ऊपर से नीचे (top-down) आवंटन के तरीके की ओर एक बदलाव है।
इस बदलाव से केंद्र का फंड के प्रवाह पर ज़्यादा नियंत्रण हो जाएगा, लेकिन स्थानीय रोज़गार की माँग में अचानक बढ़ोतरी होने पर राज्यों की प्रतिक्रिया देने की लचीलापन कम हो सकती है।
16वें वित्त आयोग का फ़ॉर्मूला
केंद्र मानक आवंटन तय करने के लिए 16वें वित्त आयोग के हॉरिज़ॉन्टल डिवोल्यूशन (क्षैतिज हस्तांतरण) फ़ॉर्मूले का इस्तेमाल करेगा।
बताए गए फ़्रेमवर्क के आधार पर, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को तुलनात्मक रूप से कम आवंटन मिल सकता है, जबकि उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, असम, हरियाणा, पंजाब और बिहार को ज़्यादा आवंटन मिल सकता है।
स्टैटिक GK फ़ैक्ट: हॉरिज़ॉन्टल डिवोल्यूशन फ़ॉर्मूला यह तय करता है कि केंद्रीय करों का विभाज्य पूल (divisible pool) तय मानदंडों का इस्तेमाल करके राज्यों के बीच कैसे बांटा जाए।
प्रदर्शन–आधारित आवंटन
VB-G RAM G एक ऐसा प्रावधान लाता है जिससे केंद्र मानक आवंटन का कुछ हिस्सा रोक सकता है और उसे राज्य के प्रदर्शन के आधार पर बांट सकता है।
संभावित प्रदर्शन संकेतकों में शामिल हैं:
- मज़दूरी का समय पर भुगतान।
- सोशल ऑडिट की ज़रूरतों का पालन।
- एक वित्तीय वर्ष के दौरान पूरे किए गए कामों का प्रतिशत।
- केंद्र द्वारा बताए गए अन्य संकेतक।
रोके जाने वाले हिस्से का सटीक अनुपात अभी तय नहीं किया गया है। यह प्रावधान अगले वित्तीय वर्ष से लागू होने वाला है।
अतिरिक्त खर्च का बोझ राज्यों पर
एक और महत्वपूर्ण वित्तीय प्रावधान तब लागू होता है जब रोज़गार की माँग राज्य के मानक आवंटन से ज़्यादा हो जाती है।
अगर आवंटन से ज़्यादा माँग के कारण खर्च केंद्र के हिस्से से ज़्यादा हो जाता है, तो अतिरिक्त खर्च राज्य को उठाना होगा।
इससे उन राज्यों पर काफ़ी वित्तीय दबाव पड़ सकता है जहाँ ग्रामीण परिवार खेती की कम गतिविधि या आर्थिक तंगी के समय नियमित रूप से रोज़गार कार्यक्रमों पर निर्भर रहते हैं।
DBT-आधारित मज़दूरी का भुगतान
VB-G RAM G के तहत, मज़दूरी और बेरोज़गारी भत्ते डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए लाभार्थियों के बैंक या पोस्ट–ऑफिस खातों में ट्रांसफर किए जाएंगे।
इस सिस्टम का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना, लीकेज कम करना और भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक नए ढांचे के तहत मज़दूरी की दर की घोषणा नहीं की है।
मौजूदा MGNREGS वर्करों का क्या होगा?
मौजूदा MGNREGS जॉब कार्ड रिन्यूअल और वेरिफिकेशन के बाद भी मान्य रहेंगे।
e-KYC के ज़रिए।
जब तक राज्य सरकारें नए ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्ड जारी नहीं करतीं, तब तक इनका इस्तेमाल VB-G RAM G के तहत रोज़गार पाने के लिए किया जा सकता है।
इस अंतरिम व्यवस्था का मकसद यह पक्का करना है कि पुराने कानून से नए ढांचे में बदलाव के दौरान मज़दूरों का रोज़गार का अधिकार खत्म न हो।
आठ ड्राफ़्ट नियम
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने VB-G RAM G को लागू करने से जुड़े आठ ड्राफ़्ट नियम जारी किए हैं:
- राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति के नियम।
- शिकायत निवारण नियम।
- प्रशासनिक खर्च के नियम।
- अंतरिम प्रावधानों के नियम।
- मानक आवंटन के लिए उद्देश्यपूर्ण मापदंडों के नियम।
- केंद्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी परिषद के नियम।
- मज़दूरी और बेरोज़गारी भत्ते के भुगतान के तरीके से जुड़े नियम।
- मानक आवंटन से ज़्यादा खर्च करने वाले राज्यों के लिए नियम।
केंद्र सरकार ने 2026–27 के लिए VB-G RAM G के लिए ₹95,692.31 करोड़ आवंटित किए हैं।
मुख्य चिंताएं और असर
राज्यों के लिए, 40% फंडिंग की ज़िम्मेदारी एक बड़ी वित्तीय चुनौती बन सकती है, खासकर उन राज्यों के लिए जहां ग्रामीण रोज़गार की मांग ज़्यादा है और आवंटन कम हो सकता है।
मज़दूरों के लिए, 125 गारंटीड दिनों की बढ़ोतरी फायदेमंद है, लेकिन 60 दिनों का मौसमी अंतराल और अभी तक घोषित न की गई मज़दूरी दर अनिश्चितता पैदा करते हैं। अगर राज्यों को नियमों का पालन करने में मुश्किल होती है, तो परफॉर्मेंस–बेस्ड फंडिंग भी अप्रत्यक्ष रूप से इसे लागू करने पर असर डाल सकती है।
केंद्र-राज्य संबंधों के लिए, मांग–आधारित आवंटन से मानक आवंटन की ओर बढ़ना और साथ ही परफॉर्मेंस–बेस्ड फंड वितरण, ग्रामीण कल्याण के एक बड़े कार्यक्रम के संचालन में एक बड़ा बदलाव है।
इसलिए, नए ढांचे का असर न केवल ग्रामीण रोज़गार और कल्याणकारी सेवाओं पर पड़ेगा, बल्कि वित्तीय संघवाद और केंद्र–राज्य संबंधों पर भी पड़ेगा।
स्थैतिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स तालिका
| तथ्य | विवरण |
| नया कानून | विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 |
| लोकप्रिय नाम | VB-G RAM G |
| किसकी जगह लेता है | MGNREGA |
| MGNREGA अधिनियमित | 2005 |
| नया ढाँचा | 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी |
| रोजगार गारंटी | प्रति वर्ष 125 दिन |
| पहले की गारंटी | प्रति वर्ष 100 दिन |
| वृद्धि | 25 दिन |
| मौसमी विराम | बुवाई और कटाई के चरम समय के दौरान 60 दिन |
| सामान्य राज्यों की वित्तीय हिस्सेदारी | 40% |
| विशेष राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए केंद्र की हिस्सेदारी | निर्दिष्ट श्रेणियों में 90% |
| बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेश | केंद्र 100% खर्च वहन करेगा |
| आवंटन मॉडल | मानक-आधारित, ऊपर से नीचे आवंटन |
| पहले का MGNREGA मॉडल | मांग-आधारित |
| आवंटन सूत्र | सोलहवें वित्त आयोग का क्षैतिज हस्तांतरण सूत्र |
| प्रदर्शन-आधारित आवंटन | एक हिस्सा रोका जा सकता है और प्रदर्शन के आधार पर वितरित किया जा सकता है |
| मजदूरी भुगतान | प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) |
| मजदूरी दर | अभी घोषित नहीं |
| मौजूदा जॉब कार्ड | संक्रमण के दौरान नवीनीकरण और e-KYC के बाद जारी रहेंगे |
| नया कार्ड | ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड |
| जारी मसौदा नियम | 8 |
| 2026–27 आवंटन | ₹95,692.31 करोड़ |
| प्रमुख चिंता | राज्यों पर बढ़ता राजकोषीय बोझ और केंद्र-राज्य संघवाद |





