नई डिफेंस एविएशन पहल
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले के पुट्टपर्थी में एक एयरक्राफ्ट इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना बना रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय से सैद्धांतिक मंज़ूरी मिल गई है।
यह प्रस्तावित सुविधा स्वदेशी लड़ाकू विमानों और उन्नत मानवरहित हवाई प्रणालियों के विकास में मदद करेगी। यह एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम से गहराई से जुड़ा है, जो भारत का महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर प्रोजेक्ट है।
स्टैटिक GK तथ्य: DRDO की स्थापना 1958 में हुई थी और यह रक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है।
प्रस्तावित कॉम्प्लेक्स की विशेषताएं
आंध्र प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 350 एकड़ ज़मीन का प्रस्ताव दिया है। इसमें से 150 एकड़ ज़मीन मौजूदा पुट्टपर्थी रनवे के पास स्थित है, जबकि बाकी 200 एकड़ ज़मीन एक सैटेलाइट ऑफिस कॉम्प्लेक्स और आवासीय टाउनशिप के लिए आरक्षित है।
राज्य सरकार रनवे की लंबाई बढ़ाकर 10,000 फीट करने की भी योजना बना रही है। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर, नेविगेशनल सिस्टम और मौसम संबंधी सहायता सुविधाओं जैसे अतिरिक्त बुनियादी ढांचे भी विकसित किए जाएंगे।
इस प्रोजेक्ट से लगभग ₹1 लाख करोड़ का निवेश आने की उम्मीद है। यह सुविधा एक ही जगह पर विमानों की असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन, ग्राउंड टेस्टिंग और फ्लाइट ट्रायल का काम संभालेगी।
स्टैटिक GK टिप: 8,000 फीट से लंबे रनवे आम तौर पर उन्नत सैन्य विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त होते हैं।
एयरक्राफ्ट इंटीग्रेशन सुविधाओं का महत्व
एयरक्राफ्ट इंटीग्रेशन कॉम्प्लेक्स विशेष विमानन सुविधाएं होती हैं, जहां अलग-अलग विमान प्रणालियों को ऑपरेशनल तैनाती से पहले एक साथ असेंबल और टेस्ट किया जाता है। इन केंद्रों में आमतौर पर रनवे, हैंगर, टेस्टिंग स्टेशन, संचार प्रणालियां और मौसम निगरानी के बुनियादी ढांचे शामिल होते हैं।
ऐसी एकीकृत सुविधाएं विमानों के विकास में होने वाली देरी को कम करती हैं और डिज़ाइन, असेंबली और सर्टिफिकेशन गतिविधियों के बीच तालमेल को बेहतर बनाती हैं। स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करने वाले देशों के लिए ये सुविधाएं बहुत महत्वपूर्ण होती हैं।
पुट्टपर्थी जगह को इसलिए चुना गया क्योंकि यह बेंगलुरु के करीब है, जो भारत का एक प्रमुख एयरोस्पेस हब है। यह क्षेत्र टेस्टिंग गतिविधियों के लिए एक खास एयरस्पेस भी देता है, जिससे कमर्शियल हवाई ट्रैफिक से होने वाली रुकावट कम हो जाती है।
स्टैटिक GK फैक्ट: बेंगलुरु को अक्सर “भारत की एयरोस्पेस राजधानी“ कहा जाता है क्योंकि यहाँ कई रक्षा और विमानन संस्थान मौजूद हैं।
AMCA प्रोग्राम और रणनीतिक महत्व
एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) भारत का प्रस्तावित पाँचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम है। इसका मकसद एडवांस्ड रक्षा विमानन टेक्नोलॉजी में भारत की आत्मनिर्भरता को मज़बूत करना है।
पहले AMCA प्रोटोटाइप के 2026 के आखिर और 2027 की शुरुआत के बीच आने की उम्मीद है, जबकि इसकी पहली उड़ान 2028 तक होने की संभावना है। इस प्रोग्राम के तहत लगभग 140 फाइटर जेट बनाने की योजना है।
इस एयरक्राफ्ट में स्टेल्थ फीचर्स, एडवांस्ड एवियोनिक्स, अंदरूनी हथियार रखने की जगह (internal weapon bays), और ज़्यादा देर तक टिके रहने की क्षमताएँ होंगी। यह प्रोजेक्ट रक्षा क्षेत्र में सरकार की बड़ी ‘आत्मनिर्भर भारत‘ पहल को भी बढ़ावा देता है।
स्टैटिक GK टिप: पाँचवीं पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट अपनी स्टेल्थ क्षमता, सेंसर फ्यूजन, और एडवांस्ड नेटवर्क–सेंट्रिक युद्ध प्रणालियों के लिए जाने जाते हैं।
आंध्र प्रदेश और एयरोस्पेस विकास
यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश एयरोस्पेस और रक्षा नीति 4.0 से भी जुड़ा है, जिसका मुख्य मकसद राज्य में एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा निवेश को बढ़ावा देना है।
पुट्टपर्थी कॉम्प्लेक्स के विकास से रोज़गार के नए मौके पैदा हो सकते हैं और भारत का स्वदेशी विमानन इकोसिस्टम मज़बूत हो सकता है। यह एडवांस्ड रक्षा मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में दक्षिण भारत की बढ़ती भूमिका को भी दिखाता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| संबंधित संगठन | DRDO और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी |
| परियोजना स्थान | पुट्टपर्थी, श्री सत्य साई ज़िला, आंध्र प्रदेश |
| मुख्य उद्देश्य | विमान एकीकरण और उड़ान परीक्षण |
| संबंधित कार्यक्रम | एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) |
| विमान की पीढ़ी | पाँचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान |
| प्रस्तावित भूमि क्षेत्र | 350 एकड़ |
| प्रस्तावित रनवे लंबाई | 10,000 फीट |
| अनुमानित निवेश | ₹1 लाख करोड़ |
| प्रथम AMCA उड़ान लक्ष्य | 2028 |
| संबंधित राज्य नीति | आंध्र प्रदेश एयरोस्पेस एवं रक्षा नीति 4.0 |





