NSO सर्वेक्षण के निष्कर्ष
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने अप्रैल 2026 में ‘स्वास्थ्य पर घरेलू सामाजिक उपभोग‘ पर अपना 80वाँ दौर का सर्वेक्षण जारी किया। इस सर्वेक्षण में पूरे भारत में स्वास्थ्य सेवा की पहुँच, सामर्थ्य और बीमा कवरेज में हुए बड़े सुधारों पर प्रकाश डाला गया। इसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती भूमिका भी दिखाई दी।
सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में से एक था ‘जेब से होने वाले खर्च‘ (OOPE) में कमी। सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने के आधे से ज़्यादा मामलों में खर्च लगभग ₹1,100 ही आया। यह गरीब और कमज़ोर परिवारों के लिए बेहतर वित्तीय सुरक्षा का संकेत है।
स्टेटिक GK तथ्य: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय , सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अधीन कार्य करता है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा का विस्तार
सर्वेक्षण में सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के उपयोग में लगातार वृद्धि देखी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सुविधाओं में बाह्य रोगी (OPD) उपचार 2014 के 28% से बढ़कर 2025 में 35% हो गया। यह वृद्धि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को मज़बूत करने और सरकारी सुविधाओं के विस्तार के कारण संभव हुई।
1.84 लाख से ज़्यादा ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर‘ (AAMs) की स्थापना से ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवा की पहुँच में सुधार हुआ। ये केंद्र निवारक स्वास्थ्य सेवा, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और सामान्य बीमारियों के उपचार पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
स्टेटिक GK सुझाव: आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को पहले ‘आयुष्मान भारत कार्यक्रम‘ के तहत ‘स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र‘ के नाम से जाना जाता था।
मातृ स्वास्थ्य सेवा में सुधार
भारत ने संस्थागत प्रसवों के मामले में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव बढ़कर 95.6% हो गए, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आँकड़ा 97.8% तक पहुँच गया। यह सुधार मातृ स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों के मज़बूत होने और महिलाओं में बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।
‘जननी सुरक्षा योजना‘ (JSY) और ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान‘ (PMSMA) जैसी योजनाओं ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। ये पहलें वित्तीय सहायता, प्रसव–पूर्व देखभाल और सुरक्षित प्रसव सेवाएँ प्रदान करती हैं।
स्टैटिक GK तथ्य: जननी सुरक्षा योजना 2005 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत शुरू की गई थी।
गैर–संक्रामक रोगों का बढ़ना
सर्वेक्षण ने भारत में चल रहे महामारी विज्ञान संबंधी बदलाव को उजागर किया। संक्रामक रोग कम हो रहे हैं, जबकि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसे गैर–संक्रामक रोग (NCDs) तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
इस बदलाव के लिए दीर्घकालिक स्वास्थ्य देखभाल योजना, जीवनशैली के प्रति जागरूकता और निवारक स्वास्थ्य उपायों की आवश्यकता है। सरकारी कार्यक्रम अब प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर शीघ्र निदान और पुरानी बीमारियों के प्रबंधन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
स्वास्थ्य बीमा और सस्ती दवाएँ
सरकार द्वारा समर्थित स्वास्थ्य बीमा कवरेज में काफी विस्तार हुआ है। ग्रामीण कवरेज बढ़कर 45.5% हो गया, जबकि शहरी कवरेज 31.8% तक पहुँच गया। प्रमुख योजना ‘प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना‘ (PM-JAY) प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख का कैशलेस उपचार कवरेज प्रदान करती है।
‘प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना‘ (PMBJP) और ‘अफोर्डेबल मेडिसिन्स एंड रिलायबल इम्प्लांट्स फॉर TREATMENT’ (AMRIT) जैसी सस्ती दवा योजनाओं ने आम नागरिकों के लिए दवाओं की लागत कम कर दी है। इन पहलों ने आवश्यक दवाओं और चिकित्सा प्रत्यारोपणों तक पहुँच को बेहतर बनाया है।
स्टैटिक GK टिप: PM-JAY दुनिया का सबसे बड़ा सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य आश्वासन कार्यक्रम है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| सर्वेक्षण का नाम | स्वास्थ्य पर 80वाँ दौर घरेलू सामाजिक उपभोग सर्वेक्षण |
| आयोजित करने वाली संस्था | राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय |
| प्रमुख निष्कर्ष | जेब से होने वाले स्वास्थ्य व्यय में कमी |
| ग्रामीण संस्थागत प्रसव | 95.6% |
| शहरी संस्थागत प्रसव | 97.8% |
| प्रमुख स्वास्थ्य योजना | प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना |
| बीमा कवरेज | प्रति परिवार प्रतिवर्ष ₹5 लाख |
| सस्ती दवा योजना | PMBJP और AMRIT |
| स्वास्थ्य केंद्र | आयुष्मान आरोग्य मंदिर |
| प्रमुख स्वास्थ्य प्रवृत्ति | गैर-संचारी रोगों में वृद्धि |





