भारत ने अपने मौसम रडार नेटवर्क का विस्तार किया
भारत ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘मिशन मौसम‘ योजना के तहत अपने डॉपलर वेदर रडार (DWR) नेटवर्क का काफ़ी विस्तार किया है। देश में DWR की स्थापना में 250% से ज़्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे वास्तविक समय में मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान प्रणालियों को मज़बूत बनाया जा सके।
इस पहल का उद्देश्य चक्रवात, भारी बारिश, बाढ़ और तूफ़ान जैसी गंभीर मौसमी घटनाओं के दौरान मौसम के पूर्वानुमान की सटीकता को बेहतर बनाना है। यह विस्तार विशेष रूप से संवेदनशील तटीय और कृषि क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की स्थापना 1875 में हुई थी और यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अधीन कार्य करता है।
डॉपलर वेदर रडार को समझना
डॉपलर वेदर रडार एक वैज्ञानिक उपकरण है जिसका उपयोग बारिश की तीव्रता, बादलों की गति, हवा की दिशा और तूफ़ान के चक्रण का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह ‘डॉपलर प्रभाव‘ (Doppler Effect) के सिद्धांत पर काम करता है, जो वैज्ञानिकों को मौसम प्रणालियों की गति का अध्ययन करने में मदद करता है।
डॉपलर प्रभाव का तात्पर्य किसी तरंग की प्रेक्षित आवृत्ति या तरंगदैर्ध्य में होने वाले उस परिवर्तन से है, जो तरंग के स्रोत और प्रेक्षक के बीच सापेक्ष गति होने पर उत्पन्न होता है। यह सिद्धांत आमतौर पर ध्वनि तरंगों और विद्युतचुंबकीय तरंगों में देखा जाता है।
f’ = fleft(frac{v pm v_o}{v mp v_s}right)
मौसम विज्ञान में, रडार बादलों और बारिश की बूंदों की ओर माइक्रोवेव संकेत भेजता है। परावर्तित संकेत यह निर्धारित करने में मदद करते हैं कि मौसम प्रणालियाँ पास आ रही हैं या दूर जा रही हैं। इससे गंभीर मौसमी परिस्थितियों के दौरान पूर्व चेतावनी प्रणालियों में सुधार होता है।
स्टेटिक GK सुझाव: भारत का पहला डॉपलर वेदर रडार चेन्नई में स्थापित किया गया था, ताकि बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में चक्रवातों की निगरानी को बेहतर बनाया जा सके।
मिशन मौसम और इसके उद्देश्य
मिशन मौसम को 2024 में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम के लिए दो वर्षों की अवधि हेतु लगभग ₹2,000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
इस मिशन का कार्यान्वयन भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), राष्ट्रीय मध्यम–अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF), और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) जैसे प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को एक “मौसम के लिए तैयार” (Weather Ready) और “जलवायु के प्रति समझदार” (Climate Smart) राष्ट्र बनाना है। यह कार्यक्रम ऑब्ज़र्वेशन सिस्टम, मौसम मॉडलिंग और पूर्वानुमान तकनीकों को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
यह मिशन कृषि, विमानन, मत्स्य पालन, जल प्रबंधन और आपदा प्रतिक्रिया जैसे क्षेत्रों के लिए सटीक मौसम जानकारी उपलब्ध कराने में भी सहायता करता है। बेहतर पूर्वानुमान प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आर्थिक नुकसान को कम कर सकता है और लोगों की जान बचा सकता है।
स्टैटिक GK तथ्य: भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
आपदा प्रबंधन के लिए इसका महत्व
भारत को अक्सर चक्रवात, अचानक आने वाली बाढ़, लू और भूस्खलन जैसी जलवायु–संबंधी आपदाओं का सामना करना पड़ता है। रडार-आधारित सटीक पूर्वानुमान अधिकारियों को समय से पहले चेतावनी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने (evacuation) के अलर्ट जारी करने में मदद करता है।
बेहतर DWR नेटवर्क पूरे देश में मानसून की निगरानी को भी बेहतर बनाता है। चूँकि भारतीय कृषि काफी हद तक मानसून की बारिश पर निर्भर करती है, इसलिए किसानों और खाद्य सुरक्षा के लिए सटीक पूर्वानुमान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
आधुनिक रडार प्रणालियों का उपयोग जलवायु के प्रति लचीलेपन और तकनीकी तैयारियों में भारत के बढ़ते निवेश को दर्शाता है। उम्मीद है कि ‘मिशन मौसम‘ भारत के दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन ढांचे और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| मिशन का नाम | मिशन मौसम |
| लॉन्च वर्ष | 2024 |
| मंत्रालय | पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय |
| बजट | ₹2,000 करोड़ |
| मुख्य उद्देश्य | वेदर रेडी और क्लाइमेट स्मार्ट इंडिया |
| प्रमुख तकनीक | डॉप्लर वेदर रडार |
| वैज्ञानिक सिद्धांत | डॉप्लर प्रभाव |
| प्रमुख एजेंसियाँ | IMD, NCMRWF, IITM |
| IMD मुख्यालय | नई दिल्ली |
| प्रमुख लाभ | सटीक मौसम पूर्वानुमान और आपदा चेतावनी |





