डिफेंस टेक्नोलॉजी में नया माइलस्टोन
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दो एडवांस्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म्स पेश किए हैं। यह डेवलपमेंट भारत के डिफेंस मॉडर्नाइजेशन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम है।
इन प्लेटफॉर्म्स को युद्ध के मैदान की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो बेहतर मोबिलिटी, फायरपावर और सुरक्षा देते हैं। ये स्वदेशी डिफेंस क्षमताओं पर भारत के बढ़ते फोकस को दिखाते हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: DRDO 1958 में बना था और यह रक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है।
प्लेटफॉर्म डिजाइन और वेरिएंट्स
नए पेश किए गए सिस्टम्स में ट्रैक्ड और व्हील्ड दोनों वेरिएंट्स शामिल हैं, जो अलग-अलग इलाकों में अडैप्टेबिलिटी को मुमकिन बनाते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स को व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (VRDE) ने डेवलप किया है, जो DRDO की एक अहम लैबोरेटरी है। दोनों वेरिएंट में देश में ही बना 30 mm का क्रूलेस टरेट लगा है, जो लड़ाई के दौरान इंसानों के संपर्क में आने को कम करके ऑपरेशनल सेफ्टी को बढ़ाता है।
स्टैटिक GK टिप: ट्रैक्ड गाड़ियां आमतौर पर ऊबड़–खाबड़ इलाकों में इस्तेमाल होती हैं, जबकि पहियों वाली गाड़ियां सड़कों पर स्पीड देती हैं।
एडवांस्ड फायरपावर क्षमताएं
इन प्लेटफॉर्म की एक बड़ी ताकत उनके पावरफुल आर्मामेंट सिस्टम हैं। 30 mm की तोप के साथ 7.62 mm PKT मशीन गन का इंटीग्रेशन मजबूत अटैकिंग क्षमता सुनिश्चित करता है।
इसके अलावा, ये प्लेटफॉर्म एंटी–टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) लॉन्च कर सकते हैं, जिससे वे भारी आर्मर्ड खतरों के खिलाफ असरदार बन जाते हैं। एडवांस्ड टारगेटिंग सिस्टम मॉडर्न लड़ाई के हालात में एक्यूरेसी को बेहतर बनाते हैं।
मोबिलिटी और प्रोटेक्शन फीचर्स
इन प्लेटफॉर्म को हाई पावर–टू–वेट रेश्यो के साथ डिज़ाइन किया गया है, जिससे बेहतर स्पीड और फुर्ती सुनिश्चित होती है। हाई–पावर इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन से लैस, ये मुश्किल इलाकों में भी अच्छे से चल सकते हैं।
ये खड़ी ढलानों पर चढ़ सकते हैं और रुकावटों को पार कर सकते हैं, जिससे ये अलग-अलग ऑपरेशनल कंडीशन के लिए सही हैं। प्रोटेक्शन लेवल STANAG लेवल 4 और 5 स्टैंडर्ड के हिसाब से हैं, जो बैलिस्टिक खतरों और धमाकों से बचाव पक्का करते हैं।
इन सिस्टम में मॉड्यूलर प्रोटेक्शन भी है, जो लड़ाई के माहौल में बचने की क्षमता को बढ़ाता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: STANAG स्टैंडर्ड NATO एग्रीमेंट हैं जो मिलिट्री इक्विपमेंट के स्पेसिफिकेशन बताते हैं।
इंडिजिनल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
एक खास बात यह है कि आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत देसी प्रोडक्शन पर ज़ोर दिया जा रहा है। अभी, प्लेटफॉर्म में लगभग 65% देसी कंटेंट है, जिसके भविष्य में 90% तक बढ़ने की उम्मीद है।
इसके डेवलपमेंट में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड जैसी भारतीय कंपनियों के साथ-साथ MSMEs का भी योगदान रहा है। यह सहयोग भारत के डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को मज़बूत करता है।
स्ट्रेटेजिक महत्व
ये प्लेटफॉर्म ज़मीनी लड़ाई और पानी और ज़मीन पर चलने वाले ऑपरेशन में भारत की क्षमता को बढ़ाते हैं। इनका मॉड्यूलर डिज़ाइन कई लड़ाकू भूमिकाओं में तैनाती की इजाज़त देता है, जिससे ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है।
ये विदेशी डिफेंस इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने में भी मदद करते हैं। यह भारत के ग्लोबल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के बड़े लक्ष्य से मेल खाता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| संगठन | Defence Research and Development Organisation (DRDO) |
| प्रक्षेपण स्थान | अहिल्यानगर, महाराष्ट्र |
| प्रमुख विशेषता | 30 मिमी क्रू-रहित टरेट |
| प्रकार | ट्रैक्ड और व्हील्ड |
| मारक क्षमता | ATGM, 7.62 मिमी PKT गन |
| सुरक्षा स्तर | STANAG स्तर 4 और 5 |
| स्वदेशी सामग्री | वर्तमान में 65%, लक्ष्य 90% |
| सहयोगी कंपनियाँ | टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, भारत फोर्ज |





