पृष्ठभूमि और शुरुआत
दालों में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी और इसे 1 अक्टूबर 2025 को आधिकारिक तौर पर मंज़ूरी दी गई। यह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत के तहत एक केंद्रित पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के दाल क्षेत्र को मज़बूत करना है।
हाल ही में, बिहार ने अपनी पहली संरचित दाल खरीद पहल शुरू की, जो राज्य स्तर पर इस मिशन के कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, फिर भी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए उसे दालों का आयात करना पड़ता है।
मिशन का उद्देश्य
इसका मुख्य उद्देश्य दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। यह मिशन आयात पर निर्भरता कम करने पर ज़ोर देता है, साथ ही किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करता है।
यह पोषण सुरक्षा को भी बढ़ावा देता है, क्योंकि दालें भारतीय आहार में प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत हैं, विशेष रूप से शाकाहारियों के लिए।
स्टेटिक GK टिप: दालों को उनके उच्च पोषण मूल्य और किफायती होने के कारण “गरीबों का प्रोटीन” कहा जाता है।
लक्ष्य और समय–सीमा
मिशन ने 2030-31 तक उत्पादन को बढ़ाकर 350 लाख टन तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अतिरिक्त, खेती का क्षेत्र बढ़कर 310 लाख हेक्टेयर तक पहुँचने की उम्मीद है।
मिशन की कुल अवधि 6 वर्ष है, जो 2025-26 से 2030-31 तक चलेगी, जिससे इसका संरचित और समय–बद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत के प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक शामिल हैं।
केंद्रित फसलें
यह मिशन मुख्य रूप से तूर/अरहर (अरहर दाल), उड़द (काली उड़द) और मसूर (लाल मसूर) जैसी प्रमुख दाल फसलों पर केंद्रित है। इन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और इनकी घरेलू मांग भी बहुत अधिक है।
बेहतर बीज, सिंचाई और प्रौद्योगिकी के माध्यम से इन फसलों की उत्पादकता बढ़ाना इस मिशन की एक प्रमुख रणनीति है।
स्टेटिक GK टिप: अरहर (तूर) भारत में सबसे ज़्यादा खाई जाने वाली दालों में से एक है और दाल जैसे व्यंजनों का मुख्य हिस्सा है।
लागू करने में बिहार की भूमिका
बिहार में संरचित खरीद प्रणाली शुरू होने से यह सुनिश्चित होता है कि किसानों को उनकी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिले। इससे बाज़ार का जोखिम कम होता है और दालों की खेती को बढ़ावा मिलता है।
यह सार्वजनिक खरीद व्यवस्था को भी मज़बूत करता है, ठीक वैसे ही जैसे चावल और गेहूँ के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रणालियाँ करती हैं।
स्टेटिक GK तथ्य: MSP की घोषणा भारत सरकार द्वारा कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफ़ारिशों के आधार पर की जाती है।
महत्व और आगे की राह
इस मिशन से खाद्य सुरक्षा में सुधार, आयात पर विदेशी मुद्रा खर्च में कमी और किसानों के मुनाफ़े में वृद्धि की उम्मीद है। यह फसलों में विविधता को भी बढ़ावा देता है, जिससे अनाज पर अत्यधिक निर्भरता कम होती है।
हालाँकि, जलवायु परिवर्तन, कम उत्पादकता और बाज़ार में उतार–चढ़ाव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर बुनियादी ढाँचे और मज़बूत नीतिगत समर्थन की ज़रूरत है।
स्टैटिक उस्थादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| मिशन का नाम | दालों में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन |
| लॉन्च | केंद्रीय बजट 2025-26 |
| स्वीकृति तिथि | 1 अक्टूबर 2025 |
| अवधि | 6 वर्ष (2025-26 से 2030-31) |
| मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय |
| उत्पादन लक्ष्य | 350 लाख टन |
| क्षेत्र लक्ष्य | 310 लाख हेक्टेयर |
| प्रमुख फसलें | तूर, उड़द, मसूर |
| प्रमुख राज्य पहल | बिहार दाल खरीद प्रणाली |
| उद्देश्य | आत्मनिर्भरता और किसानों की आय में वृद्धि |





