अक्टूबर 20, 2026 4:17 अपराह्न

ज्वाला-MK1 (JWALA-MK1) स्वदेशी काउंटर-ड्रोन मिसाइल

करंट अफेयर्स: ज्वाला-MK1, IG डिफेंस, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, ग्रिड डिफेंड, सॉलिड रॉकेट मोटर, काइनेटिक इंटरसेप्टर, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण, मानवरहित हवाई वाहन (UAVs)

JWALA-MK1 Indigenous Counter-Drone Missile

ज्वाला-MK1 क्या है?

ज्वाला-MK1 एक स्वदेशी माइक्रो-मिसाइल है, जिसे भारतीय रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी ‘IG डिफेंस‘ द्वारा विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दुश्मन के मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) को रोकना और नष्ट करना है। इसे कम दूरी की, सतह से हवा में मार करने वाली इंटरसेप्टर मिसाइल के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो खतरनाक ड्रोनों को भौतिक रूप से नष्ट कर देती है।

रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2026 में कंपनी ने इस कार्यक्रम के लिए दो सॉलिड रॉकेट मोटरों का परीक्षण पूरा कर लिया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके बाद के चरणों में प्रायोगिक परीक्षण और सब–सिस्टम इंटीग्रेशन (विभिन्न प्रणालियों को एक साथ जोड़ना) शामिल हैं। इसलिए, ज्वाला-MK1 अभी भी विकास के चरण में है, न कि पूरी तरह से चालू (ऑपरेशनल) मिसाइल।

स्टैटिक GK तथ्य: सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) को ज़मीन पर स्थित लॉन्च प्लेटफॉर्म से हवा में मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।

प्रमुख विशेषताएं और बताई गई तकनीकी खूबियां

रक्षा क्षेत्र की मीडिया रिपोर्टों में इस प्रस्तावित प्रणाली को एक कॉम्पैक्ट इंटरसेप्टर के रूप में वर्णित किया गया है, जिसे दुश्मन के ड्रोनों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई (rapid response) के लिए बनाया गया है। नीचे दी गई तकनीकी खूबियां रिपोर्टों पर आधारित हैं या इनकी परिकल्पना की गई है; इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित (verified) प्रदर्शन नहीं माना जाना चाहिए।

  • डेवलपर: IG डिफेंस
    • मूल देश: भारत
    • प्रकार: काउंटर-ड्रोन अभियानों के लिए माइक्रो-मिसाइल
    • प्रोपल्शन (प्रणोदन): डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर
    • नियंत्रण: फिन-नियंत्रित (Fin-controlled)
    • बताई गई मारक दूरी (रेंज): 2–5 किमी
    • बताई गई ऊंचाई की सीमा: 50 मीटर – 5,000 मीटर
    • बताई गई सटीकता: अधिकतम दूरी पर ‘सर्कुलर एरर प्रोबेबल‘ (CEP) 2 मीटर से कम
    • प्रस्तावित वॉरहेड: प्री-फ्रैगमेंटेड हाई-एक्सप्लोसिव पेलोड (विस्फोटक सामग्री)
    • प्रस्तावित लॉन्चर: ट्रक पर लगा, मल्टी-कैनिस्टर सिस्टम
    • विकास का चरण: प्रोपल्शन परीक्षण पूरे हो चुके हैं, और रिपोर्ट के अनुसार आगे के परीक्षणों की योजना है।

स्टैटिक GK टिप: ‘सर्कुलर एरर प्रोबेबल‘ (CEP) किसी हथियार की सटीकता मापने का एक सांख्यिकीय पैमाना है। यह उस दायरे (त्रिज्या) को दर्शाता है, जिसके भीतर हथियार के 50% हमले (इम्पैक्ट) होने की उम्मीद होती है।

काउंटर–ड्रोन तकनीक का महत्व

सस्ते ड्रोनों का बढ़ता इस्तेमाल पारंपरिक वायु–रक्षा प्रणालियों (air-defence systems) के लिए चुनौतियां पैदा करता है। सस्ते UAVs (ड्रोन) के खिलाफ महंगे इंटरसेप्टर का इस्तेमाल करने से लागत का असंतुलन पैदा हो सकता है, खासकर तब जब कई ड्रोन एक साथ हमला करें।

JWALA-MK1 का उद्देश्य एक समर्पित ‘काइनेटिक इंटरसेप्शन‘ (भौतिक रूप से रोकने वाला) विकल्प प्रदान करना है। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम के विपरीत, जो ड्रोन के संचार या नेविगेशन को बाधित कर सकते हैं, एक काइनेटिक इंटरसेप्टर लक्ष्य को भौतिक रूप से टकराकर या नष्ट करके बेअसर करने का प्रयास करता है।

इसकी वास्तविक लागत–प्रभावशीलता (cost-effectiveness) इसके उत्पादन खर्च, विश्वसनीयता, पता लगाने की क्षमता और निगरानी व कमांड सिस्टम के साथ इसके सफल एकीकरण (integration) पर निर्भर करेगी।

GRID Defend के साथ जुड़ाव

JWALA-MK1 को IG Defence के व्यापक ‘GRID Defend’ सिस्टम के हिस्से के रूप में काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार, यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक बैटल–मैनेजमेंट नेटवर्क है।

GRID Defend को सेंसर से मिली जानकारी को एक साथ लाने, खतरों का आकलन करने और जवाबी कार्रवाई में समन्वय (coordination) बिठाने के लिए बनाया गया है। इस व्यापक ढांचे के भीतर, JWALA-MK1 एक इंटरसेप्शन हथियार के रूप में काम करेगा।

इस तरह के एकीकृत सिस्टम की प्रभावशीलता भरोसेमंद सेंसर, संचार लिंक, समय पर लिए गए निर्णयों और खतरों का पता लगाने वाले व उन्हें रोकने वाले घटकों के बीच बेहतर तालमेल पर निर्भर करती है।

स्टैटिक GK तथ्य: UAV का पूरा नाम ‘अनमैन्ड एरियल व्हीकल‘ (Unmanned Aerial Vehicle) है। UAVs का इस्तेमाल नागरिक कार्यों (जैसे सर्वे और कृषि) के साथ-साथ सैन्य निगरानी और अभियानों में भी किया जाता है।

भारत के लिए महत्व

यह कार्यक्रम उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए स्वदेशी तकनीकें विकसित करने में निजी भारतीय रक्षा कंपनियों की भूमिका को दर्शाता है। देश में ही तकनीक विकसित करने से रक्षा विनिर्माण (defence manufacturing) को बढ़ावा मिल सकता है, तकनीकी नवाचार (innovation) हो सकता है और विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम हो सकती है।

हालांकि, इसकी वास्तविक कार्यक्षमता का आकलन जरूरी परीक्षणों, सत्यापन (validation) और एकीकरण (integration) के पूरा होने के बाद ही किया जा सकता है। अंततः, JWALA-MK1 का महत्व इसके प्रदर्शन और भारत की बहु–स्तरीय वायु–रक्षा (layered air-defence) जरूरतों के लिए इसकी उपयुक्तता पर निर्भर करेगा।

स्थिर उस्तादियन करेंट अफेयर्स तालिका

तथ्य विवरण
मिसाइल JWALA-MK1
विकासकर्ता आईजी डिफेंस
देश भारत
प्रमुख भूमिका ड्रोन-रोधी अवरोधन
प्रणोदन प्रणाली रिपोर्ट के अनुसार, दोहरे पल्स वाली ठोस रॉकेट मोटर
रक्षा पद्धति गतिज अवरोधन
संबंधित प्रणाली ग्रिड डिफेंड
GRID Defend की भूमिका कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से युद्ध प्रबंधन और खतरों के विरुद्ध समन्वय
विकास की स्थिति विकासाधीन; आगे और परीक्षणों की आवश्यकता
राष्ट्रीय महत्त्व स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी और विनिर्माण को बढ़ावा देना
JWALA-MK1 Indigenous Counter-Drone Missile
  1. ज्वाला-MK1 एक स्वदेशी काउंटर–ड्रोन माइक्रो–मिसाइल है, जिसे भारत की IG डिफेंस (IG Defence) द्वारा विकसित किया जा रहा है।
  2. ज्वाला-MK1 को दुश्मन के मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) को रोकने (इंटरसेप्ट करने) के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  3. इस मिसाइल को ‘शॉर्ट–रेंज सरफेस–टू–एयर इंटरसेप्टर‘ (सतह से हवा में मार करने वाली इंटरसेप्टर मिसाइल) की श्रेणी में रखा गया है।
  4. रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2026 में दो सॉलिड रॉकेट मोटर्स का परीक्षण पूरा हो गया था।
  5. ज्वाला-MK1 अभी भी विकास के चरण में है; इसके आगे और परीक्षण किए जाने हैं और सब–सिस्टम को एकीकृत (इंटीग्रेट) किया जाना है।
  6. रिपोर्ट के अनुसार, ज्वाला-MK1 की मारक रेंज (engagement range) 2 से 5 किलोमीटर है।
  7. इसकी ऊंचाई की मारक रेंज 50 मीटर से 5,000 मीटर बताई गई है।
  8. इसके प्रस्तावित प्रोपल्शन सिस्टम (प्रणोदन प्रणाली) में ‘डुअल–पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर‘ का उपयोग किया गया है।
  9. ज्वाला-MK1 को ‘फिन–कंट्रोल्ड इंटरसेप्टर‘ (पंखों से नियंत्रित होने वाली इंटरसेप्टर मिसाइल) के रूप में बताया गया है।
  10. अधिकतम रेंज पर इसकी ‘सर्कुलर एरर प्रोबेबल‘ (CEP) 2 मीटर से कम बताई गई है।
  11. इसमें ‘प्री–फ्रैगमेंटेड हाई–एक्सप्लोसिव पेलोड‘ (पहले से टुकड़ों में बंटा हुआ शक्तिशाली विस्फोटक) वाला वॉरहेड इस्तेमाल किया गया है।
  12. इसे लॉन्च करने के लिए ट्रक पर लगा ‘मल्टी–कैनिस्टर सिस्टम‘ प्रस्तावित है।
  13. ‘सरफेस–टू–एयर मिसाइल‘ (SAM) ज़मीन पर स्थित लॉन्च प्लेटफॉर्म से हवा में मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाती है।
  14. ‘काइनेटिक इंटरसेप्टर‘ लक्ष्य से भौतिक रूप से टकराकर उसे नष्ट करने या बेअसर करने का प्रयास करता है।
  15. ‘इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम‘ लक्ष्य को भौतिक रूप से नष्ट करने के बजाय, उसके संचार (कम्युनिकेशन) या नेविगेशन सिस्टम को बाधित कर सकते हैं।
  16. ‘GRID Defend’ (ग्रिड डिफेंड), IG डिफेंस का प्रस्तावित AI-आधारित बैटल–मैनेजमेंट नेटवर्क है।
  17. ‘GRID Defend’ को सेंसर इंटीग्रेशन, खतरों का आकलन (थ्रेट असेसमेंट) और जवाबी कार्रवाई के समन्वय (रिस्पॉन्स कोऑर्डिनेशन) में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  18. एक एकीकृत काउंटर–ड्रोन सिस्टम की प्रभावशीलता सेंसर, कम्युनिकेशन लिंक और इंटरसेप्शन (लक्ष्य को रोकने) की विश्वसनीयता पर निर्भर करती है।
  19. ज्वाला-MK1 का स्वदेशी विकास भारतीय रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा दे सकता है और आयातित प्रणालियों पर निर्भरता को कम कर सकता है।
  20. ज्वाला-MK1 की परिचालन उपयुक्तता सफल परीक्षणों, सत्यापन और भारत की वायु–रक्षा प्रणालियों के साथ इसके एकीकरण पर निर्भर करेगी।

Q1. JWALA-MK1 काउंटर-ड्रोन मिसाइल का विकास कौन-सी कंपनी कर रही है?


Q2. JWALA-MK1 की मुख्य भूमिका क्या है?


Q3. JWALA-MK1 में कौन-सी प्रणोदन प्रणाली बताई गई है?


Q4. GRID Defend की मुख्य भूमिका क्या है?


Q5. मिसाइल की सटीकता में CEP का पूर्ण रूप क्या है?


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