BS-VII मानकों को लागू करने का प्रस्ताव
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 12 अक्टूबर 2026 को एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें वाहनों के लिए अधिक सख्त ‘भारत चरण VII’ (BS-VII) उत्सर्जन मानकों का प्रस्ताव रखा गया है। इसे 1 अप्रैल 2029 से लागू करने का प्रस्ताव है, जो 2035 तक तीन चरणों में पूरा होगा।
इस पहल का उद्देश्य मोटर वाहनों से निकलने वाले हानिकारक प्रदूषकों को कम करना, हवा की गुणवत्ता में सुधार करना और स्वच्छ ऑटोमोटिव तकनीकों को बढ़ावा देना है। चूंकि यह प्रस्ताव अभी केवल एक ड्राफ्ट (मसौदे) के रूप में है, इसलिए उत्सर्जन की अंतिम सीमाएं और इसे लागू करने की शर्तें सरकार के निर्णयों पर निर्भर करेंगी।
लागू करने की प्रस्तावित समय–सीमा
इस ड्राफ्ट में मानकों को चरणों में लागू करने का प्रस्ताव है, ताकि वाहन निर्माताओं को नई जरूरतों के अनुसार तकनीक विकसित करने और उसे अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
| चरण | प्रस्तावित तिथि |
| चरण 1 | 1 अप्रैल 2029 |
| चरण 2 | 1 अप्रैल 2031 |
| चरण 3 | 1 अप्रैल 2035 |
दी गई रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती चरण में नई कारों और SUV को शामिल किया जाएगा। अंतिम नियमों से यह स्पष्ट हो जाएगा कि इसमें किस तरह के वाहन आएंगे और उनके लिए क्या-क्या अनुपालन शर्तें (compliance requirements) होंगी।
भारत स्टेज उत्सर्जन मानक (Bharat Stage Emission Standards) क्या हैं?
भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानक, भारत सरकार द्वारा मोटर वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों को नियंत्रित करने के लिए तय किए गए नियम हैं। ये अलग-अलग तरह के वाहनों के लिए उत्सर्जन की स्वीकार्य सीमाएं निर्धारित करते हैं।
इन मानकों के तहत नियंत्रित किए जाने वाले मुख्य प्रदूषकों में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), हाइड्रोकार्बन (HC) और पार्टिकुलेट मैटर (PM) शामिल हैं। जैसे-जैसे नए चरण आते हैं, बेहतर इंजन परफॉरमेंस, एग्जॉस्ट-ट्रीटमेंट सिस्टम और उत्सर्जन–नियंत्रण तकनीकों की आवश्यकता होती है।
स्टैटिक GK तथ्य: भारत के BS उत्सर्जन मानक काफी हद तक यूरोपीय उत्सर्जन मानदंडों (European emission norms) से मिलते-जुलते हैं, हालांकि इनकी सटीक शर्तें भारतीय नियमों के अनुसार तय की जाती हैं।
प्रस्तावित BS-VII की मुख्य विशेषताएं
प्रस्तावित मानकों का उद्देश्य प्रदूषकों, विशेष रूप से नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और पार्टिकुलेट मैटर पर और अधिक सख्त नियंत्रण रखना है। ये प्रदूषक हवा की गुणवत्ता खराब करते हैं और इंसानी सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं।
चरणबद्ध तरीके से लागू करने से वाहन निर्माताओं को रिसर्च करने, वाहनों के सिस्टम को फिर से डिज़ाइन करने और बेहतर उत्सर्जन–नियंत्रण तकनीकें लाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सटीक सीमाएं, टेस्टिंग के तरीके और अनुपालन की शर्तें अंतिम नोटिफिकेशन पर निर्भर करेंगी।
इस प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा वाहनों को कबाड़ (scrapped) कर देना होगा। इनका आगे इस्तेमाल किया जा सकेगा या नहीं, यह लागू कानूनों और भविष्य के नियमों पर निर्भर करेगा।
BS-VI और BS-VII के बीच अंतर
| तथ्य | विवरण |
| BS-VI की शुरुआत | अप्रैल 2020 से पूरे देश में लागू |
| BS-VI का उद्देश्य | निर्धारित सीमाओं के माध्यम से वाहन उत्सर्जन को नियंत्रित करना |
| प्रस्तावित BS-VII का उद्देश्य | उत्सर्जन नियंत्रण को और अधिक सख्त करना |
| प्रस्तावित कार्यान्वयन | 2029 से 2035 तक तीन चरणों में |
| नियामक स्थिति | BS-VI वर्तमान में लागू है; दी गई रिपोर्ट में BS-VII अभी प्रस्तावित है |
नियामक स्थिति: BS-VI लागू है; दी गई रिपोर्ट में BS-VII का प्रस्ताव है।
भारत ने BS-V को क्यों छोड़ दिया?
भारत ने अप्रैल 2020 में सीधे BS-IV से BS-VI में कदम रखा। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उत्सर्जन (emission) संबंधी कड़े नियमों को जल्द से जल्द अपनाया जा सके, जिसके चलते BS-V को छोड़ दिया गया। BS-VI में बदलाव के साथ पूरे देश में 10 ppm सल्फर वाले ईंधन को भी पेश किया गया, जो आधुनिक उत्सर्जन-नियंत्रण प्रणालियों (emission-control systems) के इस्तेमाल में मददगार है।
स्टैटिक GK टिप: ईंधन में मौजूद सल्फर, वाहनों की निकास-उपचार प्रणालियों (exhaust-treatment systems) को नुकसान पहुंचा सकता है या उनकी कार्यक्षमता को कम कर सकता है। कम सल्फर वाला ईंधन आधुनिक वाहनों को उत्सर्जन की सख्त सीमाओं को पूरा करने में मदद करता है।
पर्यावरण और जन स्वास्थ्य के लिए महत्व
सख्त मानक, स्वच्छ इंजनों, उन्नत निकास–उपचार प्रणालियों और वाहनों की बेहतर टेस्टिंग को बढ़ावा दे सकते हैं। इनकी सफलता ईंधन की गुणवत्ता, वाहनों के रखरखाव, सार्वजनिक परिवहन, नियमों के सख्ती से पालन और कम उत्सर्जन वाले परिवहन साधनों को अपनाने पर निर्भर करेगी।
प्रस्तावित BS-VII ढांचा ऑटोमोटिव रिसर्च, निर्माण लागत और भविष्य की वाहन तकनीक को प्रभावित कर सकता है। सरकार द्वारा नियम तय किए जाने के बाद ही इसका वास्तविक प्रभाव स्पष्ट हो पाएगा।
स्थिर उस्तादियन करेंट अफेयर्स तालिका
| तथ्य | विवरण |
| जिम्मेदार मंत्रालय | सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय |
| प्रस्तावित मानक | भारत स्टेज VII |
| मसौदा अधिसूचना की तिथि | रिपोर्ट के अनुसार 12 अक्टूबर 2026 |
| पहला प्रस्तावित चरण | 1 अप्रैल 2029 |
| दूसरा प्रस्तावित चरण | 1 अप्रैल 2031 |
| तीसरा प्रस्तावित चरण | 1 अप्रैल 2035 |
| वर्तमान राष्ट्रीय मानक | BS-VI |
| BS-VI का देशव्यापी कार्यान्वयन | अप्रैल 2020 |
| प्रमुख प्रदूषक | CO, NOx, HC और PM |
| पर्यावरणीय उद्देश्य | वाहन उत्सर्जन को कम करना और वायु गुणवत्ता में सुधार करना |





