मई 29, 2026 11:53 अपराह्न

भारत ने 2035 के लिए अपने जलवायु लक्ष्यों को और स्पष्ट किया

समसामयिक घटनाएँ: UNFCCC, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs), पेरिस समझौता, उत्सर्जन तीव्रता, गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता, कार्बन सिंक, नवीकरणीय ऊर्जा, नेट-ज़ीरो लक्ष्य, CBDR-RC, ग्रीन हाइड्रोजन

India Sharpens Climate Vision for 2035

भारत ने अपने जलवायु लक्ष्यों को अपडेट किया

भारत ने आधिकारिक तौर पर 2031–2035 की अवधि के लिए अपने अपडेट किए गए जलवायु लक्ष्यों को जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन‘ (UNFCCC) को सौंप दिया है। ये संशोधित लक्ष्य वैश्विक जलवायु शासन में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हैं, साथ ही आर्थिक विकास और विकासात्मक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन भी बनाते हैं।

इन नए लक्ष्यों को मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंज़ूरी दी गई थी। ये लक्ष्य 2070 तक नेटज़ीरो‘ (शुद्धशून्य) उत्सर्जन हासिल करने की भारत की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा के अनुरूप हैं। इस अपडेटेड रोडमैप का मुख्य ज़ोर उत्सर्जन को कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को मज़बूत करने और वनों के माध्यम से कार्बन अवशोषण को बेहतर बनाने पर है।

स्टेटिक GK तथ्य: UNFCCC को 1992 में रियो डी जनेरियो में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाया गया था, और यह 1994 में लागू हुआ था।

नए NDC के तीन मुख्य स्तंभ

भारत के संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान‘ (NDCs) तीन प्रमुख उद्देश्यों पर आधारित हैं। इनमें उत्सर्जन तीव्रता को कम करना, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाना, और वनों तथा वृक्षों के आवरण के माध्यम से कार्बन अवशोषण (कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन) का विस्तार करना शामिल है।

सरकार ने 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 47% तक कम करने का लक्ष्य घोषित किया है। भारत का लक्ष्य अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 60% हिस्सा गैरजीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करना भी है। एक अन्य प्रमुख लक्ष्य वनों और वृक्षारोपण के माध्यम से 3.5–4 अरब टन का अतिरिक्त कार्बन सिंक तैयार करना है।

ये लक्ष्य 2015 में पेरिस समझौते के तहत भारत द्वारा प्रस्तुत किए गए पिछले जलवायु लक्ष्यों की तुलना में एक महत्वपूर्ण वृद्धि को दर्शाते हैं।

भारत की पिछली जलवायु सफलताएँ

भारत ने अपने कई पिछले जलवायु लक्ष्यों को निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर लिया है। 2020 तक, देश ने 2005 के स्तरों की तुलना में अपनी उत्सर्जन तीव्रता में लगभग 36% की कमी की थी। इस उपलब्धि ने अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं में भारत की विश्वसनीयता को और मज़बूत किया।

फरवरी 2026 तक, भारत की गैरजीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता 52.57% के स्तर को पार कर गई, जो पिछली अपेक्षाओं से कहीं अधिक थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से सौर, पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों के योगदान से संभव हुई। Static GK टिप: भारत अभी दुनिया में रिन्यूएबल एनर्जी, खासकर सोलर पावर सेक्टर का सबसे बड़ा उत्पादक है।

रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन डेवलपमेंट

भारत की क्लाइमेट स्ट्रेटेजी काफी हद तक रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन टेक्नोलॉजी के विस्तार पर निर्भर करती है। सरकार ने फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करने और सस्टेनेबल आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई खास प्रोग्राम शुरू किए हैं।

इनमें मुख्य पहलें हैं: नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, और क्लीन मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीमPM-KUSUM स्कीम ग्रामीण इलाकों में सोलरपावर्ड कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को भी सपोर्ट करती है।

भारत इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) जैसे प्लेटफॉर्म के ज़रिए इंटरनेशनल क्लाइमेट सहयोग को बढ़ावा देना जारी रखे हुए है। ये पहलें क्लाइमेट डिप्लोमेसी में विकासशील देशों की एक प्रमुख आवाज़ के तौर पर भारत की छवि को मज़बूत करती हैं।

नेशनली डिटरमिन्ड कंट्रीब्यूशन्स को समझना

नेशनली डिटरमिन्ड कंट्रीब्यूशन्स (NDCs) वे क्लाइमेट एक्शन प्लान हैं जिन्हें देश पेरिस समझौते के फ्रेमवर्क के तहत जमा करते हैं। हर देश अपनी घरेलू क्षमताओं और विकास की स्थितियों के आधार पर अपने खुद के क्लाइमेट लक्ष्य तय करता है।

देशों को हर पाँच साल में इन प्रतिबद्धताओं को अपडेट करना ज़रूरी होता है। यह फ्रेमवर्क कॉमन बट डिफरेंशिएटेड रिस्पॉन्सिबिलिटीज एंड रिस्पेक्टिव कैपेबिलिटीज‘ (CBDR-RC) के सिद्धांत का पालन करता है, जो यह मानता है कि वैश्विक उत्सर्जन के लिए विकसित देशों की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी ज़्यादा है।

Static GK तथ्य: पेरिस समझौता 2015 में फ्रांस के पेरिस में COP21 के दौरान अपनाया गया था।

Static Usthadian Current Affairs Table

विषय विवरण
UNFCCC 1992 में अपनाई गई वैश्विक जलवायु संधि
भारत का नेट-ज़ीरो लक्ष्य लक्ष्य वर्ष 2070 है
नया उत्सर्जन लक्ष्य उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी
गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य 60% स्थापित विद्युत क्षमता
कार्बन सिंक लक्ष्य 3.5–4 बिलियन टन
पेरिस समझौता 2015 में अपनाया गया अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौता
CBDR-RC सिद्धांत साझा लेकिन विभेदित जलवायु जिम्मेदारी
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन भारत और फ्रांस द्वारा शुरू की गई पहल
पीएम-कुसुम योजना कृषि के लिए सौर ऊर्जा सहायता योजना
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन स्वच्छ हाइड्रोजन ईंधन को बढ़ावा देने वाली पहल
India Sharpens Climate Vision for 2035
  1. भारत ने 2031–2035 की अवधि के लिए अपने अपडेटेड जलवायु लक्ष्य पेश किए।
  2. ये नए लक्ष्य 2070 तक भारत के ‘नेटज़ीरो‘ (शुद्धशून्य) लक्ष्य के अनुरूप हैं।
  3. भारत की योजना 2035 से पहले उत्सर्जन की तीव्रता को 47% तक कम करने की है।
  4. देश का लक्ष्य बिजली उत्पादन में 60% क्षमता गैरजीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल करना है।
  5. भारत का उद्देश्य वनों और वृक्षारोपण के माध्यम से अतिरिक्त ‘कार्बन सिंक‘ (कार्बन अवशोषक) बनाना है।
  6. यह अपडेटेड रोडमैप वैश्विक जलवायु शासन में भारत की स्थिति को और मज़बूत करता है।
  7. UNFCCC को 1992 में ‘रियो अर्थ समिट‘ के दौरान अपनाया गया था।
  8. भारत ने 2005 के स्तरों की तुलना में उत्सर्जन में लगभग 36% की कमी हासिल की है।
  9. फरवरी 2026 के दौरान भारत की गैरजीवाश्म बिजली उत्पादन क्षमता 57% के पार पहुँच गई।
  10. सौर और पवन ऊर्जा क्षेत्र भारत के बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार को गति प्रदान कर रहे हैं।
  11. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन‘ पूरे देश में स्वच्छ ईंधन के विकास को बढ़ावा देता है।
  12. PM-KUSUM‘ योजना ग्रामीण क्षेत्रों में सौरऊर्जा संचालित कृषि बुनियादी ढांचे को सहायता प्रदान करती है।
  13. भारतअंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन‘ पहल के माध्यम से जलवायु कूटनीति को बढ़ावा देता है।
  14. आपदारोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन‘ (CDRI) वैश्विक जलवायु सहयोग के प्रयासों को मज़बूत करता है।
  15. राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान‘ (NDCs), ‘पेरिस समझौते‘ के तहत निर्धारित जलवायु कार्य योजनाएँ हैं।
  16. सभी देशों के लिए यह अनिवार्य है कि वे हर पाँच साल में नियमित रूप से अपने NDC लक्ष्यों को अपडेट करें।
  17. CBDR-RC‘ सिद्धांत विकसित और विकासशील देशों के बीच अलग-अलग (विभेदित) जिम्मेदारियों को मान्यता देता है।
  18. पेरिस समझौते‘ को आधिकारिक तौर पर 2015 में आयोजित ‘COP21‘ सम्मेलन के दौरान अपनाया गया था।
  19. आज भी भारत सौर ऊर्जा के उत्पादन के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक बना हुआ है।
  20. हरित प्रौद्योगिकियाँ भारत की सतत विकास रणनीति का एक केंद्रीय हिस्सा बनती जा रही हैं।

Q1. भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय को किस अवधि के लिए अपने अद्यतन जलवायु लक्ष्य प्रस्तुत किए?


Q2. 2035 तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता कम करने का लक्ष्य कितना है?


Q3. कौन-सा सिद्धांत देशों के बीच अलग-अलग जलवायु जिम्मेदारियों को मान्यता देता है?


Q4. भारत का शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य वर्ष कौन-सा है?


Q5. पेरिस समझौता किस वैश्विक आयोजन के दौरान अपनाया गया था?


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