हैदराबाद में पुरस्कार सम्मान
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के डायरेक्टर डॉ. चेरुकुमल्ली श्रीनिवास राव को प्रतिष्ठित 9वां प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार समारोह हैदराबाद (2026) में आयोजित किया गया था, जिसमें जलवायु–अनुकूल कृषि में उनके योगदान को मान्यता दी गई।
यह सम्मान भारतीय कृषि में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए सतत खेती के तरीकों को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका को उजागर करता है। उनका काम पर्यावरण की स्थिरता सुनिश्चित करते हुए उत्पादकता में सुधार पर केंद्रित है।
स्टेटिक GK तथ्य: हैदराबाद तेलंगाना की राजधानी है, जो जैव प्रौद्योगिकी और कृषि अनुसंधान का एक प्रमुख केंद्र है।
जलवायु-अनुकूल कृषि में योगदान
डॉ. राव ने जलवायु–अनुकूल फसल प्रणालियों को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका शोध मिट्टी के स्वास्थ्य प्रबंधन, पानी के कुशल उपयोग और अप्रत्याशित मौसम का सामना करने वाले किसानों के लिए अनुकूलन रणनीतियों पर जोर देता है।
उन्होंने ऐसी तकनीकों को बढ़ावा दिया है जो किसानों को सूखे, बाढ़ और तापमान में उतार–चढ़ाव से निपटने में मदद करती हैं। इन नवाचारों का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा और किसानों की स्थिर आय सुनिश्चित करना है।
स्टेटिक GK टिप: जलवायु–अनुकूल कृषि में ऐसे तरीके शामिल होते हैं जो उत्पादकता बढ़ाते हैं, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होते हैं, और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करते हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की भूमिका
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), जिसे पूसा संस्थान के नाम से भी जाना जाता है, भारत का प्रमुख कृषि अनुसंधान निकाय है। यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत काम करता है।
IARI ने हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विशेष रूप से गेहूं और चावल की अधिक उपज देने वाली किस्मों को विकसित करने में। आज भी, यह आधुनिक कृषि तकनीकों में अनुसंधान का नेतृत्व करना जारी रखे हुए है।
स्टेटिक GK तथ्य: IARI नई दिल्ली में स्थित है और मूल रूप से 1905 में पूसा (बिहार) में स्थापित किया गया था।
एम. एस. स्वामीनाथन पुरस्कार की विरासत
इस पुरस्कार का नाम एम. एस. स्वामीनाथन के नाम पर रखा गया है, जिन्हें भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है। यह कृषि और ग्रामीण विकास में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है।
यह पुरस्कार प्राप्त करके डॉ. राव उन अग्रणी वैज्ञानिकों की श्रेणी में शामिल हो गए हैं जिन्होंने भारत की कृषि प्रगति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है। यह जलवायु चुनौतियों से निपटने में नवाचार के महत्व को भी पुष्ट करता है।
स्टैटिक GK टिप: हरित क्रांति (1960–70 के दशक) ने भारत को भोजन की कमी वाले देश से भोजन की अधिकता वाले देश में बदल दिया।
भारतीय कृषि के लिए इसका महत्व
जलवायु में बदलाव के कारण भारत के कृषि क्षेत्र को बढ़ते जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ता तापमान, अनियमित बारिश और मौसम की चरम घटनाएँ फ़सलों की पैदावार के लिए खतरा बन रही हैं।
डॉ. राव जैसे विशेषज्ञ ऐसी अनुकूलन रणनीतियाँ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो लंबे समय तक स्थिरता सुनिश्चित करती हैं। उन्हें मिला यह सम्मान, जलवायु–अनुकूल कृषि नीतियों पर भारत के बढ़ते ज़ोर को दर्शाता है।
यह पुरस्कार युवा शोधकर्ताओं को भी टिकाऊ खेती के समाधानों में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
स्टेटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| पुरस्कार का नाम | प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन पुरस्कार |
| संस्करण | 9वां |
| पुरस्कार विजेता | डॉ. चेरुकुमल्ली श्रीनिवास राव |
| पद | निदेशक, IARI |
| आयोजन का स्थान | हैदराबाद |
| प्रमुख योगदान | जलवायु-सहिष्णु कृषि |
| संस्थान | भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान |
| मूल संस्था | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद |





