सफल एयर ड्रॉप टेस्ट एक मील का पत्थर
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 11 अप्रैल 2026 को गगनयान मिशन के लिए दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया। इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य क्रू मॉड्यूल के सुरक्षित नीचे उतरने और लैंडिंग सिस्टम को प्रमाणित करना था।
इसमें विशेष रूप से उड़ान की नकली स्थितियों (simulated flight conditions) के तहत पैराशूट खुलने के क्रम की जांच की गई। इस तरह के टेस्ट अंतरिक्ष यात्रियों की पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश (re-entry) और लैंडिंग के चरणों के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
स्टेटिक GK तथ्य: ISRO की स्थापना 1969 में हुई थी और इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है।
गगनयान मिशन का उद्देश्य
गगनयान मिशन का उद्देश्य भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन करना है। इसके तहत तीन अंतरिक्ष यात्रियों के एक दल को 400 km की ऊंचाई पर स्थित लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में तीन दिनों के लिए भेजने की योजना है।
इस मिशन में दो मानवरहित मिशन शामिल हैं, जिनके बाद एक मानवयुक्त मिशन भेजा जाएगा। अंतरिक्ष यात्रियों का दल भारतीय समुद्री जल में उतरकर सुरक्षित रूप से वापस लौटेगा, जिससे नियंत्रित रिकवरी ऑपरेशन सुनिश्चित हो सकेंगे।
स्टेटिक GK टिप: लो अर्थ ऑर्बिट आमतौर पर पृथ्वी से 160 km से 2000 km की ऊंचाई के बीच स्थित होता है।
मिशन के मुख्य घटक
ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल
LVM3 से विकसित HLVM-3 को मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह तीन चरणों वाला रॉकेट है, जिसमें सॉलिड बूस्टर, लिक्विड इंजन और एक क्रायोजेनिक ऊपरी चरण (CE-20 इंजन) लगा है।
यह संरचना मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक उच्च विश्वसनीयता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करती है।
ऑर्बिटल मॉड्यूल
ऑर्बिटल मॉड्यूल में क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल शामिल होते हैं। क्रू मॉड्यूल, एनवायरनमेंटल कंट्रोल और लाइफ सपोर्ट सिस्टम (ECLSS) की मदद से रहने योग्य वातावरण प्रदान करता है।
सर्विस मॉड्यूल मिशन के दौरान प्रोपल्शन, बिजली की आपूर्ति और थर्मल मैनेजमेंट में सहायता करता है।
क्रू एस्केप सिस्टम
क्रू एस्केप सिस्टम (CES) एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र है। यह लॉन्च में किसी भी विफलता की स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को तेजी से बाहर निकालने में सक्षम बनाता है, जिससे उनके जीवित बचने की संभावना अधिकतम हो जाती है।
स्टेटिक GK तथ्य: क्रायोजेनिक इंजन तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं, जो अंतरिक्ष मिशनों के लिए उच्च दक्षता प्रदान करते हैं।
भारत के लिए इसका महत्व
गगनयान मिशन भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा ऐसा देश बना देगा, जो स्वतंत्र रूप से मानव अंतरिक्ष उड़ान की क्षमता हासिल करेगा। इससे वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भारत की स्थिति और मज़बूत होगी।
यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए रास्ते खोलकर ‘स्पेस डिप्लोमेसी‘ को बढ़ावा देगा। यह मिशन भारत की भविष्य की परियोजनाओं, जैसे कि प्रस्तावित ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन‘, के लिए भी उसकी क्षमताओं को और सुदृढ़ करता है।
इसके अलावा, यह आर्थिक विकास में योगदान देता है, उच्च–कौशल वाले रोज़गार को बढ़ावा देता है, और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में शिक्षा जगत व उद्योग के बीच साझेदारी को प्रोत्साहित करता है।
स्टेटिक GK टिप: भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री, राकेश शर्मा, ने वर्ष 1984 में एक सोवियत मिशन के तहत अंतरिक्ष की यात्रा की थी।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| परीक्षण किया गया | दूसरा एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण |
| संचालित एजेंसी | इसरो |
| मिशन का नाम | गगनयान मिशन |
| उद्देश्य | मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन |
| कक्षा लक्ष्य | 400 किमी निम्न पृथ्वी कक्षा |
| क्रू आकार | 3 अंतरिक्ष यात्री |
| प्रमुख प्रक्षेपण यान | एचएलवीएम-3 (संशोधित एलवीएम3) |
| सुरक्षा विशेषता | क्रू एस्केप सिस्टम |
| वैश्विक स्थिति | मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता वाला चौथा देश |





