सरकार की हालिया पहल
प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण एक अत्यंत आवश्यक कदम है। यह बयान केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा महिला आरक्षण अधिनियम को उम्मीद से पहले लागू करने के लिए एक मसौदा संशोधन विधेयक को मंज़ूरी दिए जाने के बाद आया है।
सरकार की योजना इस कानून को 2029 के आम चुनावों से लागू करने की है। इस प्रक्रिया पर चर्चा करने और इसे गति देने के लिए संसद का एक विशेष सत्र भी बुलाए जाने की उम्मीद है।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत की संसद में लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति शामिल होते हैं।
लोकसभा के विस्तार का प्रस्ताव
एक प्रमुख प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का विचार है। यह विस्तार एक नई परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसके तहत जनसंख्या के आधार पर चुनावी क्षेत्रों (निर्वाचन क्षेत्रों) की सीमाओं को फिर से निर्धारित किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, SC/ST कोटे के भीतर ही महिलाओं के लिए एक ‘ऊर्ध्वाधर आरक्षण (vertical reservation)’ देने पर भी विचार किया जा रहा है। यह हाशिए पर पड़े समुदायों के बीच समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है।
स्टेटिक GK टिप: परिसीमन का कार्य एक ‘परिसीमन आयोग‘ द्वारा किया जाता है, जिसके निर्णयों को कानून का दर्जा प्राप्त होता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
अधिनियम की पृष्ठभूमि
वर्ष 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम‘ को आधिकारिक तौर पर ‘संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम‘ के नाम से जाना जाता है। यह अधिनियम लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक–तिहाई (1/3) आरक्षण अनिवार्य करता है।
हालाँकि, मूल रूप से इसका कार्यान्वयन 2023 के बाद होने वाली पहली जनगणना और उसके बाद की परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था। इस वजह से इसके लागू होने में देरी की आशंकाएँ उत्पन्न हो गई थीं।
कार्यान्वयन की रणनीति में बदलाव
2027 की जनगणना का इंतज़ार करने से बचने के लिए, सरकार परिसीमन हेतु 2011 की जनगणना के आँकड़ों का उपयोग करने पर विचार कर रही है। इस कदम का उद्देश्य आरक्षण को तेज़ी से लागू करना सुनिश्चित करना है।
यह बदलाव राजनीतिक गति को बनाए रखने और प्रशासनिक विलंब से बचने के एक रणनीतिक निर्णय को दर्शाता है। साथ ही, यह लैंगिक रूप से समावेशी शासन की दिशा में सरकार की मज़बूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी संकेत देता है।
स्टैटिक GK तथ्य: भारत की जनगणना हर 10 साल में जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत की जाती है।
अधिनियम के मुख्य प्रावधान
यह अधिनियम महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करता है:
• लोकसभा में
• राज्य विधानसभाओं में
• दिल्ली की विधानसभा में
यह उन सीटों पर भी लागू होता है जो पहले से ही अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए आरक्षित हैं, जिससे व्यापक समावेशिता सुनिश्चित होती है।
एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि हर परिसीमन के बाद आरक्षित सीटों में रोटेशन (बदलाव) होता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि आरक्षण का लाभ समय के साथ अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में वितरित हो।
पेश किए गए संवैधानिक संशोधन
यह अधिनियम आरक्षण को औपचारिक रूप देने के लिए नए संवैधानिक प्रावधान जोड़ता है:
• लोकसभा के लिए अनुच्छेद 330A
• राज्य विधानसभाओं के लिए अनुच्छेद 332A
• दिल्ली विधानसभा के लिए अनुच्छेद 239AA में संशोधन
ये प्रावधान महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के लिए संवैधानिक ढांचे को मजबूत करते हैं।
महत्व और आगे की राह
भारत में विधायी निकायों में महिलाओं की हिस्सेदारी अभी भी काफी कम है। इस सुधार का उद्देश्य नीति–निर्माण में लैंगिक संतुलन को बेहतर बनाना और लोकतंत्र को मजबूत करना है।
2029 के चुनावों से पहले इसका समय पर कार्यान्वयन भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव ला सकता है। यह शासन और नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की अधिक भागीदारी को भी प्रेरित कर सकता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| अधिनियम का नाम | नारी शक्ति वंदन अधिनियम |
| संशोधन | संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम 2023 |
| आरक्षण | महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें |
| कवरेज | लोकसभा, राज्य विधानसभाएँ, दिल्ली विधानसभा |
| प्रमुख अनुच्छेद | 330ए, 332ए, 239एए |
| कार्यान्वयन लक्ष्य | 2029 आम चुनाव |
| लोकसभा सदस्य संख्या प्रस्ताव | 543 से बढ़ाकर 816 |
| परिसीमन आधार | 2011 जनगणना के उपयोग का प्रस्ताव |
| विशेष विशेषता | आरक्षित सीटों का रोटेशन |
| समावेशन | एससी और एसटी आरक्षित सीटों पर लागू |





