प्रोजेक्ट का ओवरव्यू
कलाई II हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट एक बड़ा पनबिजली प्रोजेक्ट है, जिसे अप्रैल 2026 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने मंज़ूरी दी थी। इस प्रोजेक्ट को अरुणाचल प्रदेश के अंजाव ज़िले में लोहित नदी पर बनाने की योजना है।
इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹14,105.83 करोड़ है और इसका मकसद 1200 MW साफ बिजली पैदा करना है। यह भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
स्टैटिक GK फैक्ट: लोहित नदी, ब्रह्मपुत्र नदी की एक सहायक नदी है, जो एशिया की प्रमुख नदी प्रणालियों में से एक है।
मुख्य विशेषताएं और क्षमता
इस प्रोजेक्ट में 7 बिजली पैदा करने वाली यूनिट होंगी, जिनमें 190 MW की 6 यूनिट और 60 MW की 1 यूनिट शामिल है। इससे हर साल लगभग 4,852.95 मिलियन यूनिट (MU) बिजली पैदा होने की उम्मीद है।
इसके निर्माण में अनुमानित तौर पर 78 महीने (लगभग 6.5 साल) लगेंगे। इस वजह से यह पूर्वोत्तर भारत में आने वाले सबसे बड़े पनबिजली प्रोजेक्ट में से एक बन गया है।
स्टैटिक GK टिप: भारत में सौर ऊर्जा के बाद पनबिजली रिन्यूएबल बिजली का सबसे बड़ा स्रोत है।
कार्यान्वयन और पार्टनरशिप
इस प्रोजेक्ट को THDC इंडिया लिमिटेड और अरुणाचल प्रदेश सरकार के बीच एक जॉइंट वेंचर के ज़रिए विकसित किया जाएगा। इससे तकनीकी विशेषज्ञता और क्षेत्रीय भागीदारी, दोनों का मेल सुनिश्चित होगा।
केंद्र सरकार सड़कों, पुलों और ट्रांसमिशन लाइनों जैसे सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹599.88 करोड़ देगी। इससे इस क्षेत्र में ऊर्जा और भौतिक कनेक्टिविटी, दोनों में सुधार होगा।
रणनीतिक महत्व
यह प्रोजेक्ट लोहित बेसिन में पनबिजली का पहला बड़ा प्रोजेक्ट है, जो इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। इससे अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत में बिजली की उपलब्धता मज़बूत होगी।
ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने में पनबिजली की अहम भूमिका होती है, क्योंकि यह बिजली की मांग (पीक डिमांड) को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन को तेज़ी से घटा-बढ़ा सकती है। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय ग्रिड के संतुलन और ऊर्जा सुरक्षा में मदद करेगा।
स्टैटिक GK तथ्य: भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता 400 GW से ज़्यादा है, जिसमें पनबिजली का योगदान लगभग 10–12% है।
समांतर विकास
Kalai II के साथ-साथ, सरकार ने ₹26,069.5 करोड़ के निवेश के साथ Kamala Hydro Electric Project को भी मंज़ूरी दे दी है। इसकी क्षमता 1720 MW होगी और यह सालाना 6,870 MU बिजली पैदा करेगा।
कुल मिलाकर, ये दोनों प्रोजेक्ट ₹40,000 करोड़ से ज़्यादा के निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पूर्वोत्तर में पनबिजली विकास पर भारत के फोकस को उजागर करता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| परियोजना का नाम | कलई द्वितीय जलविद्युत परियोजना |
| स्थान | अंजाव जिला, अरुणाचल प्रदेश |
| नदी | लोहित नदी |
| स्वीकृति | आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (2026) |
| कुल लागत | ₹14,105.83 करोड़ |
| क्षमता | 1200 मेगावाट |
| वार्षिक उत्पादन | 4,852.95 मिलियन यूनिट |
| डेवलपर्स | टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड और अरुणाचल प्रदेश सरकार |
| निर्माण अवधि | 78 महीने |
| रणनीतिक भूमिका | नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रिड स्थिरता |





