तमिलनाडु तट के पास एक बड़ी सफलता वाला टेस्ट
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) ने तमिलनाडु के मुत्तोम तट के पास एक स्वदेशी फ्लोटिंग LiDAR बोय सिस्टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह भारत के उन्नत समुद्री तकनीकों की ओर बढ़ते कदम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
इस बोय को समुद्र की कठोर परिस्थितियों में काम करने और सटीक वायुमंडलीय डेटा इकट्ठा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ऑफशोर पवन ऊर्जा के विकास में भारत की बढ़ती रुचि को बढ़ावा देता है।
स्टेटिक GK तथ्य: NIOT, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत काम करता है, जिसका मुख्यालय चेन्नई में है।
LiDAR तकनीक को समझना
यह सिस्टम लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (LiDAR) तकनीक का उपयोग करके समुद्र के ऊपर हवा की गति, दिशा और वायुमंडलीय मापदंडों को मापता है। यह लेज़र पल्स भेजकर और हवा में मौजूद कणों से उनके परावर्तन का विश्लेषण करके काम करता है।
यह हवा के पैटर्न की उच्च–रिज़ॉल्यूशन वाली ऊर्ध्वाधर प्रोफाइलिंग को संभव बनाता है, जो ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ज़रूरी है। यह तकनीक मौसम संबंधी मास्ट जैसे पारंपरिक तरीकों की तुलना में ज़्यादा सटीक है।
स्टेटिक GK टिप: LiDAR का उपयोग रिमोट सेंसिंग, स्वायत्त वाहनों और भू–स्थानिक मैपिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
ऑफशोर पवन ऊर्जा के लिए इसका महत्व
भारत में ऑफशोर पवन ऊर्जा की काफी संभावनाएँ हैं, खासकर तमिलनाडु और गुजरात के तटों पर। LiDAR बोय से इकट्ठा किया गया डेटा पवन फार्मों के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करने में मदद करेगा।
हवा का सटीक आकलन जोखिमों को कम करता है और ऊर्जा उत्पादन में दक्षता को बढ़ाता है। यह नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और जलवायु लक्ष्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर–जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।
स्वदेशी नवाचार और इसके फायदे
यह बोय सिस्टम पूरी तरह से स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है, जिससे विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम होती है। यह किफायती है और भारत की समुद्री परिस्थितियों के अनुकूल है।
यह स्वायत्त रूप से काम कर सकता है और तट पर स्थित स्टेशनों को वास्तविक समय का डेटा भेज सकता है। इससे लगातार निगरानी और लंबे समय तक डेटा इकट्ठा करने की क्षमताएँ बेहतर होती हैं।
स्टेटिक GK टिप: समुद्र की हवाओं के स्थिर होने के कारण, ऑफशोर पवन फार्म आमतौर पर तट पर स्थित पवन फार्मों की तुलना में ज़्यादा लगातार ऊर्जा पैदा करते हैं।
आगे की राह
इस सफल परीक्षण से भारत के पूरे समुद्र तट पर ऐसे बोय को बड़े पैमाने पर लगाने के अवसर खुल गए हैं। यह समुद्री अनुसंधान को मज़बूत करेगा और नवीकरणीय ऊर्जा की योजना बनाने में सहायता करेगा।
और अधिक प्रगति के साथ, भारत महासागर–आधारित तकनीकी नवाचारों में एक अग्रणी के रूप में उभर सकता है। ऐसी प्रणालियों का एकीकरण सतत विकास में एक अहम भूमिका निभाएगा।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| संस्थान | राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान |
| परीक्षण का स्थान | मुत्तोम तट, तमिलनाडु |
| उपयोग की गई तकनीक | लाइडार |
| उद्देश्य | पवन और मौसम संबंधी डेटा का मापन |
| मंत्रालय | पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय |
| प्रमुख लाभ | अपतटीय पवन ऊर्जा को समर्थन |
| प्रकृति | स्वदेशी प्रणाली |
| नवीकरणीय लक्ष्य | 2030 तक 500 गीगावाट |





