परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक बड़ा कदम
भारत ने एक अहम मील का पत्थर हासिल किया है, जब तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 2026 में क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली। यह एक स्व–पोषक परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया की शुरुआत का प्रतीक है।
इस रिएक्टर को इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) में भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा विकसित और संचालित किया जाता है। यह प्रगति भारत के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश का संकेत देती है।
क्रिटिकैलिटी को समझना
क्रिटिकैलिटी एक स्थिर अवस्था को संदर्भित करती है, जहाँ प्रत्येक परमाणु विखंडन इतनी मात्रा में न्यूट्रॉन मुक्त करता है कि अभिक्रिया निरंतर जारी रह सके। यह सुनिश्चित करता है कि रिएक्टर बिना किसी बाहरी न्यूट्रॉन स्रोत के संचालित होता रहे।
यह चरण रिएक्टर की सुरक्षा सत्यापन के लिए अनिवार्य है और पूर्ण पैमाने पर बिजली उत्पादन से पहले आता है।
स्टैटिक GK तथ्य: परमाणु विखंडन का सर्वप्रथम प्रदर्शन 1938 में ओटो हैन और फ्रिट्ज़ स्ट्रासमैन द्वारा किया गया था, जिसने परमाणु रिएक्टरों की नींव रखी।
PFBR की विशेषताएँ
PFBR एक 500 MWe क्षमता वाला, सोडियम–कूल्ड फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है, जिसे 20 वर्षों से अधिक की अवधि में स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। यह यूरेनियम के स्थान पर प्लूटोनियम–आधारित मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग करता है।
पारंपरिक रिएक्टरों के विपरीत, यह जितना विखंडनीय पदार्थ (fissile material) उपभोग करता है, उससे कहीं अधिक उत्पन्न करता है, जिससे ईंधन की दक्षता में सुधार होता है। सोडियम का उपयोग शीतलक (coolant) के रूप में किया जाता है, क्योंकि इसमें ऊष्मा स्थानांतरण के उत्कृष्ट गुण विद्यमान होते हैं।
तीन–चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम में भूमिका
भारत की परमाणु रणनीति का प्रारूप डॉ. होमी जहाँगीर भाभा द्वारा तैयार किया गया था। इसमें तीन चरण शामिल हैं, जिनका उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करना है।
दूसरे चरण में, प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टरों (PHWRs) से प्राप्त प्लूटोनियम का उपयोग PFBR जैसे फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों में किया जाता है। यह तीसरे चरण में थोरियम–आधारित रिएक्टरों की ओर भविष्य के संक्रमण को संभव बनाता है।
स्टैटिक GK सुझाव: भारत के पास थोरियम के विश्व के सबसे विशाल भंडारों में से एक मौजूद है, जो मुख्य रूप से केरल और तमिलनाडु के तटों पर पाई जाने वाली मोनाजाइट रेत में पाया जाता है।
सामरिक एवं आर्थिक महत्व
PFBR भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करता है और आयातित यूरेनियम पर निर्भरता को कम करता है। यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों का समर्थन करता है, जिसमें 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करना भी शामिल है।
फ़ास्ट ब्रीडर टेक्नोलॉजी ईंधन की रीसाइक्लिंग को संभव बनाती है, जिससे परमाणु ऊर्जा ज़्यादा टिकाऊ हो जाती है। यह वैश्विक स्तर पर उन्नत परमाणु टेक्नोलॉजी में भारत की स्थिति को भी मज़बूत करता है।
आगे की राह
PFBR के सफल चालू होने से भारत में और ज़्यादा फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टरों के लिए रास्ता साफ़ होगा। सरकार की योजना 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 100 GW तक पहुँचाने की है।
परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए अनुसंधान, सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे में लगातार निवेश करना बहुत ज़रूरी होगा।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| रिएक्टर का नाम | प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर |
| स्थान | कल्पक्कम, तमिलनाडु |
| क्षमता | 500 मेगावाट (विद्युत) |
| संचालक | भाविनी |
| प्रमुख विशेषता | उपभोग से अधिक विखंडनीय ईंधन का उत्पादन |
| कार्यक्रम चरण | परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण |
| ईंधन प्रकार | प्लूटोनियम आधारित मिश्रित ऑक्साइड ईंधन |
| रणनीतिक लक्ष्य | ऊर्जा सुरक्षा और यूरेनियम आयात में कमी |





