परमाणु क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि
भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, क्योंकि तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 2026 में क्रिटिकैलिटी (criticality) हासिल कर ली है। इस रिएक्टर का संचालन भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के लिए एक निर्णायक क्षण बताया। यह उपलब्धि उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं को उजागर करती है।
स्टेटिक GK तथ्य: कल्पक्कम एक प्रमुख परमाणु केंद्र है, जहाँ इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) की विभिन्न सुविधाएँ स्थित हैं।
क्रिटिकैलिटी को समझना
क्रिटिकैलिटी उस चरण को संदर्भित करती है, जब एक स्व–पोषक परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया (nuclear chain reaction) शुरू होती है। पूर्ण पैमाने पर बिजली उत्पादन शुरू होने से पहले यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होता है।
इस चरण में, रिएक्टर का कोर (core) ठीक वैसे ही काम करता है, जैसा कि उसे डिज़ाइन किया गया है; जिससे स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है। क्रिटिकैलिटी हासिल करना इस बात की पुष्टि करता है कि रिएक्टर तकनीकी रूप से पूरी तरह से सुदृढ़ है।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों की अनूठी विशेषताएँ
पारंपरिक रिएक्टरों के विपरीत, एक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) जितना ईंधन खपत करता है, उससे कहीं अधिक ईंधन का उत्पादन करता है। यह प्लूटोनियम–आधारित ईंधन का उपयोग करता है और अतिरिक्त विखंडनीय सामग्री (fissile material) उत्पन्न करता है।
यह तकनीक ईंधन दक्षता में सुधार करती है और सीमित यूरेनियम संसाधनों पर निर्भरता को कम करती है। भारत के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके पास थोरियम के विशाल भंडार मौजूद हैं।
स्टेटिक GK सुझाव: भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है, जो मुख्य रूप से केरल और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में पाया जाता है।
तीन-चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम में इसकी भूमिका
भारत की परमाणु ऊर्जा रणनीति एक तीन–चरणों वाले कार्यक्रम का अनुसरण करती है, जिसे होमी जे. भाभा द्वारा तैयार किया गया था।
चरण 1 में, प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टरों (PHWRs) में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग किया जाता है।
चरण 2 में, अधिक विखंडनीय सामग्री उत्पन्न करने के लिए PFBR जैसे फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों का उपयोग शामिल है।
चरण 3 दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए थोरियम–आधारित रिएक्टरों पर केंद्रित है।
PFBR की यह उपलब्धि भारत के तीसरे चरण की ओर संक्रमण की प्रक्रिया को काफी तेज करती है, जिससे सतत परमाणु ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
रणनीतिक और वैश्विक महत्व
PFBR के साथ, भारत रूस के बाद दूसरा ऐसा देश बनने की राह पर है, जो एक वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का संचालन करेगा। यह वैश्विक परमाणु जगत के अग्रणी देशों के बीच भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ बनाता है। इस प्रोजेक्ट में 200 से ज़्यादा भारतीय उद्योगों का योगदान रहा, जिनमें MSME भी शामिल हैं। यह हाई-टेक सेक्टर में ‘आत्मनिर्भर भारत‘ की सफलता को दिखाता है।
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को बढ़ावा
कार्बन उत्सर्जन कम करने में परमाणु ऊर्जा की अहम भूमिका है। PFBR, स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मज़बूती देता है।
यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता भी कम करता है और लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यह भारत के जलवायु लक्ष्यों और वैश्विक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
आगे की राह
भारत को परमाणु इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और रिसर्च व कुशल मानव संसाधन में निवेश पर ध्यान देना चाहिए। रेगुलेटरी ढांचों को मज़बूत बनाना और जन जागरूकता बढ़ाना भी ज़रूरी है।
लगातार इनोवेशन के ज़रिए, भारत उन्नत परमाणु तकनीकों के क्षेत्र में एक वैश्विक लीडर के तौर पर उभर सकता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| रिएक्टर का नाम | प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर |
| स्थान | कल्पक्कम, तमिलनाडु |
| क्षमता | 500 मेगावाट |
| संचालक | Bharatiya Nabhikiya Vidyut Nigam Limited |
| प्रमुख उपलब्धि | 2026 में क्रिटिकलिटी प्राप्त की |
| प्रौद्योगिकी | प्लूटोनियम ईंधन पर आधारित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर |
| कार्यक्रम चरण | परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण |
| रणनीतिक महत्व | स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता को समर्थन |





