मुद्दे की पृष्ठभूमि
पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से ईंधन की कीमतों में हालिया उछाल, सभी उद्योगों में परिचालन लागत को बढ़ा रहा है। इसका विशेष रूप से उन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर असर पड़ रहा है जो प्रवासी मज़दूरों पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं।
उद्योग निकायों ने चेतावनी दी है कि बढ़ती लागत से रोज़गार के अवसर कम हो सकते हैं। इससे विपरीत प्रवासन (reverse migration) शुरू हो सकता है, जैसा कि COVID-19 महामारी के दौरान हुआ था।
स्थैतिक GK तथ्य: भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85% ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे यह वैश्विक कीमतों में होने वाले झटकों के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
भारत में प्रवासी मज़दूरों की स्थिति
जनगणना 2011 के अनुसार, भारत में लगभग 4.14 करोड़ अंतर–राज्यीय प्रवासी मज़दूर हैं। प्रवासन लगातार बढ़ रहा है, हालिया सर्वेक्षणों में 28.9% की प्रवासन दर दर्ज की गई है।
अधिकांश प्रवासी ग्रामीण क्षेत्रों (26.5%) से आते हैं और रोज़गार के लिए शहरों की ओर रुख करते हैं। वे निर्माण, विनिर्माण और सेवा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्थैतिक GK सुझाव: ‘श्रम‘ भारतीय संविधान की समवर्ती सूची का एक विषय है, जिससे केंद्र और राज्य दोनों को इस पर कानून बनाने का अधिकार मिलता है।
सामने आने वाली मुख्य चुनौतियाँ
लगभग 90% प्रवासी मज़दूर अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं, जहाँ उन्हें न तो नौकरी की सुरक्षा मिलती है और न ही सामाजिक सुरक्षा। इससे वे आर्थिक झटकों के दौरान अत्यधिक असुरक्षित हो जाते हैं।
किफायती आवास अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। प्रवासी अक्सर शहरों की भीड़भाड़ वाली बस्तियों में रहते हैं, जहाँ रहने की स्थितियाँ बहुत खराब होती हैं।
दस्तावेज़ों से जुड़ी बाधाओं के कारण कल्याणकारी योजनाओं तक उनकी पहुँच सीमित रहती है। उदाहरण के लिए, आधार से जुड़ाव न होने के कारण उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का लाभ नहीं मिल पाता।
अन्य समस्याओं में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा तक सीमित पहुँच, तथा सामाजिक भेदभाव शामिल हैं।
आर्थिक प्रभाव और जोखिम
ईंधन की बढ़ती कीमतों से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ जाती है, जिससे MSMEs को अपनी लागत में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप प्रवासी मज़दूरों की भर्ती कम हो सकती है या उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है।
बड़े पैमाने पर होने वाला विपरीत प्रवासन शहरी अर्थव्यवस्थाओं को बाधित कर सकता है और ग्रामीण आजीविका पर दबाव डाल सकता है। इसका असर आपूर्ति श्रृंखलाओं और औद्योगिक उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
स्थैतिक GK तथ्य: MSMEs भारत की GDP में लगभग 30% का योगदान देते हैं और 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार प्रदान करते हैं।
सरकारी पहलें
ई–श्रम पोर्टल (2021) का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना है। यह बेहतर नीति निर्धारण और कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में सहायता करता है।
‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड‘ (ONORC) योजना राज्यों के बीच खाद्य सुरक्षा लाभों की सुवाह्यता (पोर्टेबिलिटी) सुनिश्चित करती है।
PMAY-U के तहत ‘किफायती किराया आवास परिसर‘ (ARHC) जैसी योजनाओं का उद्देश्य प्रवासी श्रमिकों को कम लागत पर आवास उपलब्ध कराना है।
अन्य पहलों में PM स्वनिधि, PM श्रम योगी मानधन और PM गरीब कल्याण योजना शामिल हैं।
आगे की राह
औद्योगिक समूहों में सामुदायिक रसोई और रियायती भोजन जैसी तत्काल सहायता उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। इससे संकट के कारण होने वाले पलायन को रोका जा सकता है।
लक्षित सब्सिडी के लिए ‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण‘ (DBT) प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया जाना चाहिए। यह कमजोर वर्ग के श्रमिकों तक समय पर सहायता पहुँचाना सुनिश्चित करता है।
नीतियों पर त्वरित प्रतिक्रिया (Real-time policy responses) देने के लिए, उद्योगों की भागीदारी के साथ एक अंतर–मंत्रालयी समन्वय तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता है।
MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को ऋण संबंधी राहत प्रदान करने से रोजगार को बनाए रखने और श्रमिकों के विस्थापन को रोकने में मदद मिल सकती है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| मुद्दा | बढ़ती ईंधन लागत का प्रवासी श्रमिकों पर प्रभाव |
| कारण | पश्चिम एशिया संघर्ष |
| प्रवासी जनसंख्या | 4.14 करोड़ (जनगणना 2011) |
| प्रवासन दर | 28.9% |
| प्रमुख क्षेत्र | असंगठित क्षेत्र (90%) |
| मुख्य जोखिम | रिवर्स माइग्रेशन |
| सरकारी पोर्टल | eShram Portal |
| खाद्य सुरक्षा योजना | One Nation One Ration Card |
| आवास योजना | Affordable Rental Housing Complexes |
| आर्थिक प्रभाव | एमएसएमई पर वित्तीय दबाव |





