प्रोग्राम के बारे में
भारत ने घातक UCAV प्रोग्राम के ज़रिए अपनी हवाई युद्ध क्षमता को आगे बढ़ाया है, जो स्वदेशी रक्षा विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने मार्च 2026 में स्टेल्थ कॉम्बैट ड्रोन की खरीद को मंज़ूरी दी।
यह प्रोग्राम रक्षा आधुनिकीकरण के लिए भारत के दीर्घकालिक विज़न 2047 के अनुरूप है। इसका उद्देश्य अगली पीढ़ी के मानवरहित प्रणालियों के साथ भारतीय वायु सेना (IAF) को मज़बूत करना है।
स्टेटिक GK तथ्य: रक्षा अधिग्रहण परिषद की अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्री करते हैं और यह प्रमुख रक्षा खरीद को मंज़ूरी देती है।
विकास और पृष्ठभूमि
घातक UCAV को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है। इसे पहले AURA (ऑटोनॉमस अनमैन्ड रिसर्च एयरक्राफ्ट) के नाम से जाना जाता था।
यह प्रोजेक्ट उन्नत एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों को दर्शाता है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी सैन्य प्लेटफॉर्म पर निर्भरता को कम करना है।
स्टेटिक GK टिप: DRDO की स्थापना 1958 में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
डिज़ाइन और तकनीकी विशेषताएं
घातक 13-टन श्रेणी का जेट–संचालित स्टेल्थ ड्रोन है। यह पूंछ–रहित फ्लाइंग–विंग डिज़ाइन का उपयोग करता है, जो रडार पर इसकी दृश्यता को काफी कम कर देता है।
यह विमान 80–90% कार्बन–फाइबर कम्पोजिट का उपयोग करके बनाया गया है, जिससे इसकी स्टेल्थ क्षमता और स्थायित्व बढ़ जाता है। यह अपने आंतरिक हिस्सों में 1.5 टन तक हथियार ले जा सकता है।
यह स्वदेशी कावेरी इंजन द्वारा संचालित है, जो इंजन विकास के क्षेत्र में भारत की प्रगति को दर्शाता है।
स्टेटिक GK तथ्य: फ्लाइंग–विंग डिज़ाइन का उपयोग B-2 स्पिरिट बॉम्बर जैसे उन्नत स्टेल्थ विमानों में भी किया जाता है।
रणनीतिक महत्व
यह UCAV गहरे हमले (deep strike) के मिशन और दुश्मन की हवाई सुरक्षा को दबाने (SEAD) के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पायलटों की जान को जोखिम में डाले बिना उच्च–जोखिम वाले क्षेत्रों में काम कर सकता है।
यह HAL तेजस जैसे विमानों के साथ मिलकर काम करेगा, जिससे समन्वित युद्ध अभियानों की क्षमता बढ़ेगी।
भारत चार स्क्वाड्रन में 60–80 ड्रोन शामिल करने की योजना बना रहा है, जिससे उसकी नेटवर्क–केंद्रित युद्ध क्षमता और मज़बूत होगी।
Static GK टिप: SEAD ऑपरेशन्स में दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम को निशाना बनाया जाता है, ताकि हवाई श्रेष्ठता सुनिश्चित की जा सके।
रक्षा इकोसिस्टम में भूमिका
‘घातक‘ प्रोग्राम रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण और इनोवेशन को बढ़ावा देता है। यह एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में घरेलू उद्योगों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करता है।
यह भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में भी शामिल करता है, जिनके पास उन्नत ‘स्टेल्थ ड्रोन‘ क्षमताएं हैं। इससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलती है।
यह प्रोग्राम भारत को स्वायत्त और AI-आधारित युद्ध प्रणालियों की ओर आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| कार्यक्रम का नाम | घटक यूसीएवी |
| पूर्व नाम | औरा |
| विकसित करने वाला | DRDO |
| स्वीकृति निकाय | Defence Acquisition Council |
| विमान प्रकार | स्टेल्थ मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहन |
| वजन वर्ग | 13 टन |
| इंजन | कावेरी इंजन |
| प्रमुख विशेषता | फ्लाइंग-विंग स्टेल्थ डिजाइन |
| भूमिका | गहरी हमला (डीप स्ट्राइक) और SEAD मिशन |
| तैनाती योजना | चार स्क्वाड्रनों में 60–80 ड्रोन |





