भारत की डिजिटल जनगणना पहल
भारत 2027 में अपनी 16वीं जनगणना करेगा, जो पूरी तरह से डिजिटल गणना की दिशा में एक बड़ा बदलाव होगा। यह स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी और विश्व स्तर पर डेटा संग्रह का सबसे बड़ा अभ्यास होगा।
जनगणना गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाले रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त द्वारा आयोजित की जाती है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान में गणनाकारों और पर्यवेक्षकों सहित 3 मिलियन से अधिक अधिकारी भाग लेंगे।
स्थैतिक GK तथ्य: भारत दशकीय जनगणना प्रणाली का पालन करता है, जो 1881 से हर 10 साल में आयोजित की जाती है।
गणना में डिजिटल परिवर्तन
पहली बार, जनगणना डेटा पारंपरिक कागज़–आधारित तरीकों के बजाय मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके एकत्र किया जाएगा। यह बदलाव तेज़ प्रोसेसिंग, बेहतर सटीकता और रीयल–टाइम निगरानी सुनिश्चित करता है।
एक प्रमुख नवाचार स्व–गणना की शुरुआत है, जहाँ नागरिक 16 भाषाओं में उपलब्ध एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना विवरण जमा कर सकते हैं। जमा करने के बाद, सत्यापन के लिए एक स्व–गणना ID (Self-Enumeration ID) जेनरेट की जाएगी।
स्थैतिक GK सुझाव: भारत में डिजिटल शासन पहलें 2015 में शुरू किए गए व्यापक ‘डिजिटल इंडिया कार्यक्रम‘ का हिस्सा हैं।
कानूनी ढाँचा और संदर्भ तिथियाँ
जनगणना जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत आयोजित की जाएगी, जो डेटा संग्रह के लिए कानूनी आधार प्रदान करते हैं। जनगणना में भागीदारी अनिवार्य है, जो व्यापक कवरेज सुनिश्चित करती है।
भारत के अधिकांश हिस्सों के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 है। हालाँकि, लद्दाख, जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बर्फ़ से ढके क्षेत्रों के लिए, संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 है।
जनगणना की दो–चरण संरचना
जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। चरण I (अप्रैल–सितंबर 2026) में घरों की सूची बनाने और आवास की स्थितियों को शामिल किया जाएगा, जिसमें सुविधाएँ और संपत्तियाँ शामिल हैं।
चरण II, जो फरवरी 2027 के लिए निर्धारित है, में जनसांख्यिकीय, सामाजिक–आर्थिक, शैक्षिक और जाति संबंधी डेटा एकत्र किया जाएगा। यह चरण नीति निर्माण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
स्टैटिक GK तथ्य: जनगणना के डेटा का इस्तेमाल निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन, संसाधनों के आवंटन और सरकारी योजनाओं को बनाने के लिए किया जाता है।
पैमाना और बुनियादी ढांचा
सरकार ने 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना कराने के लिए ₹11,718.24 करोड़ आवंटित किए हैं। इस काम में 7,000 से ज़्यादा उप–जिले और लगभग 6.4 लाख गांव शामिल होंगे।
एक मज़बूत डिजिटल इकोसिस्टम बनाया गया है, जिसमें मोबाइल ऐप, GIS-आधारित मैपिंग टूल और रियल–टाइम डैशबोर्ड शामिल हैं। नवंबर 2025 में पूरे देश में किया गया एक प्री–टेस्ट यह पक्का करता है कि सिस्टम तैयार है।
महत्व और आगे की राह
जनगणना 2027 डिजिटल टूल के ज़रिए डेटा की सटीकता, पारदर्शिता और कार्यक्षमता को बढ़ाएगी। यह खुद से गिनती करने (self-enumeration) के ज़रिए नागरिकों की भागीदारी को भी बेहतर बनाएगी।
इकट्ठा किया गया डेटा स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में भारत की भविष्य की नीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगा। इसका सफल क्रियान्वयन भारत को डिजिटल शासन और बड़े पैमाने पर डेटा प्रबंधन में एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करेगा।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| जनगणना वर्ष | 2027 |
| प्रकार | पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना |
| कुल जनगणना संख्या | भारत की 16वीं जनगणना |
| कानूनी ढांचा | जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 |
| प्रमुख नवाचार | ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना |
| चरण I | मकान सूचीकरण और आवास जनगणना |
| चरण II | जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक और जाति डेटा |
| बजट आवंटन | ₹11,718.24 करोड़ |
| कवरेज | 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश, 6.4 लाख गांव |





