विज़न और पृष्ठभूमि
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ‘पेमेंट्स विज़न 2028‘ लॉन्च किया है, जो भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को बेहतर बनाने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पूरे देश में लेन–देन को सुरक्षित, कुशल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाना है।
भारत पहले से ही UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के माध्यम से रियल–टाइम पेमेंट्स के मामले में दुनिया में सबसे आगे है। इस विज़न का लक्ष्य उपयोगकर्ताओं का भरोसा बढ़ाना और डिजिटल लेन–देन की पहुँच को और अधिक विस्तृत करना है।
स्टैटिक GK तथ्य: RBI की स्थापना 1935 में हुई थी और यह भारत की मौद्रिक और वित्तीय प्रणाली को विनियमित करता है।
इस विज़न के मुख्य उद्देश्य
इस रोडमैप में डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढाँचे को बेहतर बनाने के लिए लगभग 15 लक्षित पहलें शामिल हैं। यह उपयोगकर्ता सशक्तिकरण, धोखाधड़ी की रोकथाम और पहुँच (accessibility) पर विशेष ज़ोर देता है।
इसका एक प्रमुख लक्ष्य व्यक्तियों और व्यवसायों, दोनों के लिए भुगतान को तेज़ और सुरक्षित बनाना है। यह भुगतान की दक्षता और तरलता (liquidity) में सुधार करके MSMEs को भी सहायता प्रदान करता है।
‘स्विच ऑन/ऑफ‘ सुविधा
एक प्रमुख सुधार ‘स्विच ऑन/ऑफ‘ सुविधा का सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों तक विस्तार करना है। पहले यह सुविधा केवल कार्ड तक सीमित थी, लेकिन अब इसमें UPI, वॉलेट और अन्य प्लेटफॉर्म भी शामिल होंगे।
यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को यह नियंत्रित करने की अनुमति देती है कि लेन–देन कब और कहाँ सक्षम (enable) होगा। इससे अनधिकृत लेन–देन और साइबर धोखाधड़ी के जोखिमों में काफी कमी आती है।
स्टैटिक GK टिप: डिजिटल भुगतान की सुरक्षा ‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007‘ (Payment and Settlement Systems Act, 2007) के तहत विनियमित होती है।
पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS)
‘पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस (PaSS)‘ की शुरुआत एक प्रमुख संरचनात्मक सुधार है। यह ग्राहकों द्वारा बैंक बदलने पर भुगतान निर्देशों के सुचारू हस्तांतरण को संभव बनाता है।
PaSS आवर्ती भुगतानों (recurring payments) के प्रबंधन के लिए एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड प्रदान करेगा। यह आने वाले और जाने वाले, दोनों प्रकार के लेन–देन के निर्बाध हस्तांतरण को सुनिश्चित करता है।
इससे ग्राहकों की सुविधा में वृद्धि होती है, विशेष रूप से बैंकों के विलय या खातों में बदलाव के समय।
साझा उत्तरदायित्व ढाँचा (Shared Responsibility Framework)
RBI डिजिटल भुगतानों में होने वाली धोखाधड़ी से निपटने के लिए एक ‘साझा उत्तरदायित्व ढाँचा (Shared Responsibility Framework)‘ का प्रस्ताव करता है। वर्तमान में, इसकी जवाबदेही (liability) मुख्य रूप से कार्ड जारी करने वाले बैंक पर होती है।
नई प्रणाली के तहत, कार्ड जारी करने वाला बैंक और लाभार्थी बैंक, दोनों ही इस उत्तरदायित्व को साझा करेंगे। इससे बेहतर समन्वय को बढ़ावा मिलता है और धोखाधड़ी का पता लगाने वाली प्रणालियाँ और अधिक मज़बूत होती हैं।
MSMEs और TReDS के लिए सहायता
यह विज़न अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म के बीच इंटरऑपरेबिलिटी लाकर Trade Receivables Discounting System (TReDS) को बेहतर बनाता है। इससे MSMEs के लिए वर्किंग कैपिटल तक पहुँच आसान हो जाएगी।
नई सुविधाओं में ‘फैक्टरिंग विद रिकोर्स‘ और एक्सपोर्ट से मिलने वाली रकम के लिए सहायता शामिल है। ये कदम वित्तीय समावेशन और ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस‘ (व्यापार करने में आसानी) को बढ़ावा देते हैं।
स्टैटिक GK तथ्य: MSMEs भारत की GDP में लगभग 30% का योगदान देते हैं और रोज़गार पैदा करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक चेक की शुरुआत
RBI इलेक्ट्रॉनिक चेक (e-cheques) शुरू करने की भी योजना बना रहा है। ये पारंपरिक चेक की विश्वसनीयता को डिजिटल सिस्टम की तेज़ी के साथ जोड़ते हैं।
यह सिस्टम चेक के फ़ॉर्मेट को मानकीकृत करेगा और उन्हें आधुनिक भुगतान इंफ़्रास्ट्रक्चर में एकीकृत करेगा। इससे कागज़–आधारित लेन–देन से डिजिटल लेन–देन की ओर बदलाव और भी आसान हो जाएगा।
भविष्य की संभावनाएँ
Payments Vision 2028 का लक्ष्य भारत में एक मज़बूत और लचीला डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम तैयार करना है। यह विश्वास, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित है।
लगातार सुधारों के साथ, भारत डिजिटल वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी बना रहेगा, जिससे आर्थिक विकास और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| पहल | आरबीआई पेमेंट्स विज़न 2028 |
| प्रारंभ किया गया द्वारा | भारतीय रिज़र्व बैंक |
| मुख्य फोकस | सुरक्षित और कुशल डिजिटल भुगतान |
| प्रमुख विशेषता | भुगतान को चालू/बंद करने का नियंत्रण |
| नई प्रणाली | पेमेंट्स स्विचिंग सेवा (PaSS) |
| धोखाधड़ी सुधार | साझा जिम्मेदारी ढांचा |
| एमएसएमई समर्थन | टीआरईडीएस इंटरऑपरेबिलिटी |
| नया नवाचार | इलेक्ट्रॉनिक चेक (ई-चेक) |
| कानूनी ढांचा | भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 |
| आर्थिक प्रभाव | वित्तीय समावेशन और विश्वास को बढ़ावा |





