NDC फ्रेमवर्क की पृष्ठभूमि
भारत ने वैश्विक जलवायु फ्रेमवर्क के तहत 2031 से 2035 की अवधि के लिए अपने अपडेटेड राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) को मंज़ूरी दे दी है। ये लक्ष्य जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) और पेरिस समझौते के तहत की गई प्रतिबद्धताओं का हिस्सा हैं।
NDCs राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजनाएँ हैं जिन्हें ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए हर पाँच साल में जमा किया जाता है। भारत ने पहली बार 2015 में अपना NDC जमा किया था और 2022 में इसे अपडेट किया, जो बदलती जलवायु प्रतिबद्धताओं को दर्शाता है।
स्टेटिक GK तथ्य: पेरिस समझौते (2015) का उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को औद्योगिक–पूर्व स्तरों से 2°C से काफी नीचे तक सीमित करना है।
भारत में कार्यान्वयन फ्रेमवर्क
भारत जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के माध्यम से अपने जलवायु लक्ष्यों को लागू करता है। इसमें नौ राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं, जिनमें सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और सतत कृषि शामिल हैं।
इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन पर राज्य कार्य योजनाएँ (SAPCC) स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करती हैं। यह विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण क्षेत्र–विशिष्ट जलवायु चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद करता है।
स्टेटिक GK टिप: NAPCC को 2008 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान लॉन्च किया गया था।
स्वच्छ ऊर्जा के लिए प्रमुख पहलें
भारत प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा की ओर अपने बदलाव को तेज़ कर रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाएँ रूफटॉप सौर ऊर्जा को अपनाने को बढ़ावा देती हैं। कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) के प्रयासों का भी विस्तार किया जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और Lead-IT पहल जैसे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रौद्योगिकी साझाकरण और औद्योगिक डीकार्बोनाइज़ेशन का समर्थन करते हैं।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि के मामले में शीर्ष देशों में से एक है।
जलवायु अनुकूलन रणनीतियाँ
भारत के NDCs शमन के साथ-साथ अनुकूलन पर भी ज़ोर देते हैं। सतत कृषि पर राष्ट्रीय मिशन जलवायु–लचीली खेती की पद्धतियों पर केंद्रित है।
MISHTI (मैंग्रोव पहल) जैसी पहलों का उद्देश्य तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और आजीविका की रक्षा करना है। ग्लेशियर निगरानी और हिमालयी स्थिरता के कार्यक्रमों को भी मज़बूत किया जा रहा है। ये उपाय बाढ़, सूखा और समुद्र के जलस्तर में वृद्धि जैसे जलवायु प्रभावों के प्रति संवेदनशीलता को कम करने में मदद करते हैं।
जन-केंद्रित जलवायु कार्रवाई
भारत के दृष्टिकोण का एक अनूठा पहलू ‘पर्यावरण के लिए जीवन शैली (LiFE) मिशन‘ के माध्यम से जनभागीदारी है। यह व्यक्तियों और समुदायों को सतत प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
कचरा कम करना, ऊर्जा बचाना और पर्यावरण–अनुकूल आदतों को बढ़ावा देना जैसे व्यवहारिक बदलाव दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने की कुंजी हैं।
नए NDCs का महत्व
2031–2035 के लिए अद्यतन NDCs विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। ये राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को संबोधित करते हुए वैश्विक प्रयासों के साथ तालमेल बिठाते हैं।
भारत का दृष्टिकोण आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश और पर्यावरण संरक्षण को एकीकृत करता है। यह एक जिम्मेदार वैश्विक जलवायु नेता के रूप में इसकी स्थिति को सुदृढ़ करता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| रूपरेखा | यूएनएफसीसीसी और पेरिस समझौता |
| एनडीसी चक्र | हर पाँच वर्ष |
| पहली प्रस्तुति | 2015 |
| नवीनतम अपडेट | 2022 |
| नया लक्ष्य अवधि | 2031–2035 |
| कार्यान्वयन योजना | एनएपीसीसी और एसएपीसीसी |
| प्रमुख मिशन | सौर, कृषि, ऊर्जा दक्षता |
| स्वच्छ ऊर्जा फोकस | ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा |
| अनुकूलन पहलें | मिश्टी, ग्लेशियर निगरानी |
| जन भागीदारी | लाइफ मिशन |





