चेन्नई में बहाली अभियान
तमिलनाडु वन विभाग ने चेन्नई में बड़े पैमाने पर मैंग्रोव बहाली कार्यक्रम शुरू किया है। तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए बकिंघम नहर के किनारे लगभग 20,000 मैंग्रोव के पौधे लगाए गए।
इस प्रयास का उद्देश्य जलवायु लचीलेपन में सुधार करना और तटीय खतरों के प्रभाव को कम करना है। मैंग्रोव चक्रवातों और बाढ़ के खिलाफ प्राकृतिक रक्षक (बफर) के रूप में कार्य करते हैं।
स्टेटिक GK तथ्य: बकिंघम नहर एक ऐतिहासिक नौकायन नहर है जो कोरोमंडल तट के समानांतर चलती है।
चरणबद्ध मैंग्रोव वृक्षारोपण योजना
बहाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है ताकि धीरे-धीरे एक मजबूत हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) बनाई जा सके। 2024–25 के दौरान, 20 हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव की छह प्रजातियों के लगभग 12,500 पौधे लगाए गए।
इन प्रजातियों में Rhizophora mucronata, Bruguiera cylindrica, Avicennia marina, Aegiceras corniculatum, Excoecaria agallocha, और Acanthus ilicifolius शामिल हैं। इन प्रजातियों को खारे वातावरण के प्रति उनकी अनुकूलन क्षमता के कारण चुना गया है।
अड्यार मुहाने पर विस्तार
दूसरे चरण में, अड्यार नदी के मुहाने पर स्थित ‘बैटल ऑफ़ अड्यार आइलैंड‘ में लगभग 5,000 मैंग्रोव के पौधे लगाए गए। इन प्रजातियों में Rhizophora mucronata, Rhizophora apiculata, Avicennia marina, और Excoecaria agallocha शामिल थीं।
मुहाने का पारिस्थितिकी तंत्र पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जलीय जीवन को सहारा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैंग्रोव तलछट को स्थिर करने और पानी की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करते हैं।
स्टेटिक GK टिप: मुहाने (Estuaries) वे क्षेत्र होते हैं जहाँ मीठा पानी समुद्र के पानी से मिलता है, जिससे पोषक तत्वों से भरपूर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होता है।
वृक्षारोपण का नवीनतम चरण
नवीनतम चरण में पाँच प्रमुख प्रजातियों—जैसे Avicennia marina, Avicennia officinalis, Rhizophora mucronata, Rhizophora apiculata, और Excoecaria agallocha—के 20,000 पौधे लगाना शामिल है।
यह कदम चेन्नई के समुद्र तट के किनारे मैंग्रोव आवरण की निरंतरता को मजबूत करता है। इसका मुख्य उद्देश्य एक सघन और टिकाऊ मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
पारिस्थितिक और रणनीतिक महत्व
मैंग्रोव लहरों की ऊर्जा को कम करके और समुद्र तट के कटाव को रोककर एक जीवित तटीय सुरक्षा कवच (बायोशील्ड) का काम करते हैं। वे मछली, पक्षियों और क्रस्टेशियंस सहित जैव विविधता को भी सहारा देते हैं।
यह पहल चेन्नई को समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और मौसम की चरम घटनाओं के अनुकूल बनने में मदद करती है। यह तटीय शहरों में जलवायु अनुकूलन की व्यापक रणनीतियों के अनुरूप है।
स्टेटिक GK तथ्य: मैंग्रोव ज़मीनी जंगलों की तुलना में तीन से पाँच गुना अधिक कार्बन जमा कर सकते हैं, जिससे वे कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाते हैं।
आगे की राह
इस पहल की सफलता के लिए निरंतर निगरानी और सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है। वैज्ञानिक प्रबंधन और समय–समय पर मूल्यांकन वृक्षारोपण के लंबे समय तक बने रहने को सुनिश्चित करेंगे।
इस तरह की बहाली परियोजनाओं का विस्तार चेन्नई को भारत में शहरी तटीय संरक्षण के लिए एक आदर्श बना सकता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| परियोजना स्थान | बकिंघम नहर और अड्यार मुहाना |
| कार्यान्वयन एजेंसी | तमिलनाडु वन विभाग |
| कुल पौधे | नवीनतम चरण में 20,000 |
| पूर्व रोपण | 20 हेक्टेयर में 12,500 पौधे |
| दूसरा चरण | अड्यार मुहाने पर 5,000 पौधे |
| प्रमुख प्रजातियाँ | राइजोफोरा, अविसेनिया, एक्सोकेरिया |
| उद्देश्य | तटीय संरक्षण और जैव विविधता |
| महत्व | जलवायु सहनशीलता और अपरदन नियंत्रण |





