एक आदिवासी बाजरा मेनू की शुरुआत
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मार्च 2026 में राज्य सचिवालय में आयोजित कलेक्टरों के सम्मेलन के दौरान, राज्य के पहले आदिवासी बाजरा–आधारित भोजन मेनू ‘अराकु कौनी‘ की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक आदिवासी आहार को राज्य की मुख्यधारा की भोजन संस्कृति में शामिल करना है।
यह मेनू अल्लूरी सीताराम राजू (ASR) ज़िले के आदिवासी समुदायों द्वारा तैयार किए गए प्रामाणिक व्यंजनों को प्रमुखता देता है। यह स्थानीय रूप से उगाए गए बाजरे के सेवन को प्रोत्साहित करके स्वस्थ खान–पान को भी बढ़ावा देता है। इस कार्यक्रम से आदिवासी भोजन परंपराओं की पहचान बढ़ने और स्थानीय कृषि प्रणालियों के मज़बूत होने की उम्मीद है।
स्टैटिक GK तथ्य: जलवायु–अनुकूल और पौष्टिक अनाजों को बढ़ावा देने के भारत के प्रस्ताव के बाद, संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष‘ घोषित किया था।
अराकु कौनी के पीछे की अवधारणा
अराकु कौनी एक विशेष रूप से तैयार किया गया मेनू है, जिसमें ऐसे पारंपरिक व्यंजन शामिल हैं जो अराकु घाटी क्षेत्र के मूल निवासी समुदायों में पीढ़ियों से चले आ रहे हैं। ये व्यंजन स्थानीय रूप से उगाए गए बाजरे, जैसे कि रागी, फॉक्सटेल बाजरा और लिटिल बाजरा का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य आदिवासी पाक–कला के ज्ञान को संरक्षित करना है, साथ ही टिकाऊ कृषि पद्धतियों को भी समर्थन देना है। पर्यटन केंद्रों और रेस्तरां में इन व्यंजनों को पेश करके, सरकार का लक्ष्य आदिवासी कृषि उत्पादों के लिए बाज़ार का विस्तार करना है।
स्टैटिक GK सुझाव: बाजरे को मोटे अनाज (coarse cereals) की श्रेणी में रखा जाता है, और इसमें ज्वार (sorghum), बाजरा (pearl millet) और रागी (finger millet) जैसी फ़सलें शामिल हैं।
मेनू में शामिल पारंपरिक आदिवासी व्यंजन
अराकु कौनी मेनू में बाजरे और स्थानीय रूप से प्राप्त सामग्री का उपयोग करके तैयार किए गए कई पारंपरिक व्यंजन शामिल हैं। ये व्यंजन वन और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की भोजन परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। मेनू में शामिल कुछ महत्वपूर्ण व्यंजन हैं:
• कोरा पायसम – फॉक्सटेल बाजरे से बनी एक मीठी डिश
• रागी चपाती – फिंगर बाजरे के आटे से बनी पौष्टिक रोटी
• समला पुलिहोरा – लिटिल बाजरे से बना इमली वाला चावल
• कांतला अम्बाली – बाजरे से बना एक पारंपरिक खमीरी पेय
• कॉर्न वड़ा – मक्का और मसालों से बने नमकीन पकौड़े
• तूर दाल करी – प्रोटीन से भरपूर दाल की डिश, जिसे बाजरे के व्यंजनों के साथ परोसा जाता है।
ये रेसिपी पूर्वी घाट क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों के खान–पान की पोषण संबंधी समृद्धि और पाक–कला की विविधता को दर्शाती हैं।
ASR ज़िला प्रशासन की भूमिका
इस प्रोजेक्ट की अगुवाई अल्लूरी सीताराम राजू ज़िला प्रशासन ने की, जिसने पारंपरिक रेसिपी को दस्तावेज़ित करने और उन्हें एक मानक मेनू में बदलने के लिए कई संस्थानों के साथ मिलकर काम किया।
सहयोग करने वाले प्रमुख संगठनों में आदिवासी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, इंडियन कलिनरी इंस्टीट्यूट और आंध्र प्रदेश पर्यटन विभाग शामिल थे। उनके सहयोग से स्थानीय समुदायों से पारंपरिक खान–पान से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने और उसे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त, एक व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करने में मदद मिली।
स्टैटिक GK तथ्य: अल्लूरी सीताराम राजू ज़िला, जिसका गठन 2022 में हुआ था, का नाम आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू के नाम पर रखा गया है। उन्होंने ही ब्रिटिश शासन के खिलाफ रम्पा विद्रोह (1922–1924) का नेतृत्व किया था।
आदिवासी अर्थव्यवस्था और फ़ूड टूरिज़्म को बढ़ावा देना
राज्य सरकार ‘अराकू कौनी‘ को आदिवासी कल्याण और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के एक साधन के रूप में देखती है। बाजरे के सेवन को प्रोत्साहित करने से आदिवासी किसानों द्वारा उगाई जाने वाली फसलों की मांग बढ़ सकती है।
यह पहल अराकू घाटी जैसे क्षेत्रों में फ़ूड टूरिज़्म को भी बढ़ावा देती है। यह क्षेत्र पहले से ही अपने कॉफी बागानों और मनमोहक दृश्यों के लिए जाना जाता है। स्थानीय खान–पान की परंपराओं को उजागर करके, इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को मज़बूत करना और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है।
स्टैटिक GK टिप: आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाट में स्थित अराकू घाटी, भारत के प्रमुख आदिवासी पर्यटन स्थलों में से एक है और यह अपनी जैविक कॉफी की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| पहल | अराकू कौनी जनजातीय बाजरा आधारित मेनू |
| लॉन्च किया | एन. चंद्रबाबू नायडू |
| राज्य | आंध्र प्रदेश |
| लॉन्च वर्ष | 2026 |
| प्रमुख क्षेत्र | अल्लूरी सीतारामा राजू जिला |
| मुख्य उद्देश्य | जनजातीय व्यंजनों और बाजरा उपभोग को बढ़ावा देना |
| प्रमुख व्यंजन | कोर्रा पायसम, रागी चपाती, समला पुलिहोरा |
| सहयोगी संस्थान | इंडियन कुलिनरी इंस्टीट्यूट, आंध्र प्रदेश पर्यटन विभाग |
| आर्थिक फोकस | जनजातीय किसानों को समर्थन और खाद्य पर्यटन को बढ़ावा |
| सांस्कृतिक महत्व | स्वदेशी पाक परंपराओं का संरक्षण |





