ब्लड स्क्रीनिंग पर सुप्रीम कोर्ट का रिव्यू
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह जांचने का फैसला किया है कि क्या देश भर के ब्लड बैंकों को डोनेट किए गए खून की स्क्रीनिंग के लिए न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) ज़रूरी तौर पर करना चाहिए। इस कदम का मकसद ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेफ्टी को मज़बूत करना और संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा कम करना है।
ब्लड बैंक अभी इन्फेक्शन का पता लगाने के लिए एंजाइम–लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट एसे (ELISA) जैसी स्क्रीनिंग टेक्नीक का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इस बात की चिंता जताई गई है कि पारंपरिक टेस्ट का इस्तेमाल करके शुरुआती स्टेज में कुछ इन्फेक्शन का पता नहीं चल पाता है।
कोर्ट का रिव्यू इस बात पर फोकस करता है कि क्या NAT को ज़रूरी टेस्ट के तौर पर लागू करने से भारत में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सेफ्टी में काफी सुधार होगा।
न्यूक्लिक एसिड टेस्ट क्या है
न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) एक बहुत सेंसिटिव मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक तकनीक है जिसका इस्तेमाल ब्लड सैंपल में वायरस के जेनेटिक मटीरियल का पता लगाने के लिए किया जाता है। एंटीबॉडी–बेस्ड टेस्ट के उलट, NAT सीधे ब्लड में मौजूद वायरल RNA या DNA का पता लगाकर इन्फेक्शन की पहचान करता है।
यह तकनीक वायरल न्यूक्लिक एसिड के टारगेटेड हिस्सों को बढ़ाकर काम करती है, जिससे वायरल जेनेटिक मटीरियल की बहुत कम मात्रा का भी पता लगाया जा सकता है। यह NAT को बहुत शुरुआती स्टेज में इन्फेक्शन की पहचान करने के लिए खास तौर पर उपयोगी बनाता है।
NAT का इस्तेमाल करके पता लगाए जाने वाले आम वायरस में ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) और हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C वायरस शामिल हैं, जो ट्रांसफ्यूजन से फैलने वाले इन्फेक्शन के मुख्य कारण हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: जीवित जीवों में जेनेटिक मटीरियल या तो DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) या RNA (राइबोन्यूक्लिक एसिड) होता है, जिसमें वंशानुगत जानकारी होती है।
NAT ब्लड सेफ्टी को कैसे बेहतर बनाता है
NAT-बेस्ड स्क्रीनिंग का एक बड़ा फायदा यह है कि यह इन्फेक्शन के “विंडो पीरियड“ को कम कर सकता है। विंडो पीरियड का मतलब है इन्फेक्शन और उस पल के बीच का समय जब लैब टेस्ट में वायरस का पता चलने लगता है।
ELISA जैसे पारंपरिक टेस्ट इम्यून सिस्टम से बनने वाली एंटीबॉडी का पता लगाते हैं। इन एंटीबॉडी को बनने में कई हफ़्ते लग सकते हैं, जिसका मतलब है कि इन्फेक्शन के शुरुआती स्टेज में कभी-कभी इन्फेक्टेड खून का पता नहीं चल पाता है।
दूसरी ओर, NAT वायरल जेनेटिक मटीरियल का ही पता लगाता है, जिससे इन्फेक्शन का पता बहुत पहले चल जाता है। इससे HIV और हेपेटाइटिस वायरस के ट्रांसफ्यूजन से जुड़े ट्रांसमिशन का खतरा बहुत कम हो जाता है।
स्टेटिक GK टिप: भारत की नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन पॉलिसी का मकसद रेगुलेटेड ब्लड बैंकों के ज़रिए सुरक्षित, सही और आसानी से मिलने वाली ब्लड सप्लाई पक्का करना है।
NAT बनाम ELISA टेस्टिंग
ELISA टेस्ट का इस्तेमाल ब्लड बैंकों में इसकी कम कीमत और इसे आसानी से लागू करने की वजह से बड़े पैमाने पर किया जाता रहा है। यह इन्फेक्शन के जवाब में इम्यून सिस्टम से बनने वाली एंटीबॉडी का पता लगाता है।
हालांकि, NAT ज़्यादा सेंसिटिविटी और जल्दी पता लगाने की सुविधा देता है, जिससे यह एक ज़्यादा एडवांस्ड टेक्नोलॉजी बन जाती है। कई डेवलप्ड देशों ने पहले ही NAT-बेस्ड ब्लड स्क्रीनिंग को अपने रूटीन ब्लड बैंक प्रोसीजर में शामिल कर लिया है।
इसके फ़ायदों के बावजूद, NAT के लिए एडवांस्ड लैबोरेटरी इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेंड लोगों और ज़्यादा ऑपरेशनल कॉस्ट की ज़रूरत होती है, जिससे कुछ इलाकों में इसे पूरी तरह अपनाने में देरी हुई है।
पब्लिक हेल्थ पर असर
अगर इसे ज़रूरी कर दिया जाए, तो ब्लड बैंकों में NAT स्क्रीनिंग भारत में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सेफ्टी को काफी बेहतर बना सकती है। इससे डोनेट किए गए खून से HIV, हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C जैसे गंभीर इन्फेक्शन को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी।
हालांकि, पॉलिसी बनाने वालों को पब्लिक हेल्थ के फ़ायदों और कॉस्ट के बीच बैलेंस बनाना होगा, क्योंकि NAT को पूरे देश में लागू करने के लिए मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत होगी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा चल रहा रिव्यू ब्लड स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल पर भविष्य की गाइडलाइंस पर असर डाल सकता है, जिससे भारत का ओवरऑल हेल्थकेयर सेफ्टी फ्रेमवर्क मज़बूत होगा।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| न्यूक्लिक एसिड टेस्ट | रक्त में वायरल आनुवंशिक सामग्री का पता लगाने के लिए उपयोग की जाने वाली आणविक निदान तकनीक |
| सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई | यह जांच कर रहा है कि क्या रक्त बैंकों में NAT को अनिवार्य किया जाना चाहिए |
| लक्षित रोग | एचआईवी, हेपेटाइटिस B, हेपेटाइटिस C |
| तकनीकी आधार | वायरल आरएनए या डीएनए का एम्प्लीफिकेशन |
| वैकल्पिक विधि | एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट असे (ELISA) |
| प्रमुख लाभ | विंडो पीरियड कम करके संक्रमण का जल्दी पता लगाना |
| सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व | रक्त आधान से होने वाले संक्रमणों को रोकना |
| नीति महत्व | राष्ट्रीय रक्त सुरक्षा मानकों को मजबूत कर सकता है |





