बायोटेक रिसर्च में बड़ी कामयाबी
इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IASST), असम के साइंटिस्ट्स ने घी को नेचुरल सबस्ट्रेट के तौर पर इस्तेमाल करके एक नया बायोसरफैक्टेंट बनाया है। यह इंस्टीट्यूट डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST), मिनिस्ट्री ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया के तहत काम करता है।
रिसर्च टीम को प्रो. आशीष के. मुखर्जी ने लीड किया, साथ में प्रो. एम. आर. खान और रिसर्च फेलो अनुश्री रॉय भी थे। यह खोज इको–फ्रेंडली इंडस्ट्रियल कंपाउंड बनाने में बायोटेक्नोलॉजी और प्रोबायोटिक माइक्रोऑर्गेनिज्म की बढ़ती भूमिका को दिखाती है।
स्टैटिक GK फैक्ट: डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) की स्थापना 1971 में भारत में साइंस और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।
प्रोबायोटिक बैक्टीरिया और घी की भूमिका
बायोसर्फैक्टेंट को प्रोबायोटिक बैक्टीरिया लैक्टोबैसिलस प्लांटारम JBC5 का इस्तेमाल करके बनाया गया था। रिसर्चर्स ने घी, जो एक लिपिड–रिच डेयरी प्रोडक्ट है और भारतीय खाने और पारंपरिक दवा में बहुत इस्तेमाल होता है, का उपयोग किया।
प्रोडक्शन एफिशिएंसी को रिस्पॉन्स सरफेस स्टैटिस्टिकल एनालिसिस का इस्तेमाल करके बेहतर बनाया गया, यह तरीका आमतौर पर बायोप्रोसेस ऑप्टिमाइज़ेशन में इस्तेमाल होता है। इस प्रोसेस से लिपोपेप्टाइड बायोसर्फैक्टेंट का कुशल सिंथेसिस मुमकिन हुआ, जो लिपिड और पेप्टाइड कॉम्पोनेंट को मिलाता है।
स्टडी दिखाती है कि पारंपरिक खाने-पीने की चीज़ों को मॉडर्न माइक्रोबियल बायोटेक्नोलॉजी के साथ मिलाकर सस्टेनेबल केमिकल कंपाउंड कैसे बनाए जा सकते हैं।
स्टेटिक GK टिप: लैक्टोबैसिलस प्लांटारम एक बहुत स्टडी किया गया प्रोबायोटिक बैक्टीरिया है जो दही, अचार और फर्मेंटेड सब्जियों जैसे फर्मेंटेड फूड में पाया जाता है।
मजबूत एंटीबैक्टीरियल गुण
लैबोरेटरी एक्सपेरिमेंट से पता चला कि बायोसर्फैक्टेंट स्टैफिलोकोकस ऑरियस के खिलाफ असरदार है, यह बैक्टीरिया आमतौर पर स्किन इन्फेक्शन, फोड़े और घाव के इन्फेक्शन के लिए ज़िम्मेदार होता है। जब बायोसरफैक्टेंट को कमर्शियल फेस वॉश के साथ मिलाया गया, तो इसने सफाई और दाग हटाने की क्षमता में काफी सुधार किया। यह कॉस्मेटिक और डर्मेटोलॉजिकल प्रोडक्ट्स में इसके संभावित इस्तेमाल को दिखाता है।
इस कंपाउंड ने खाने के तेलों के लिए लगभग 60 प्रतिशत का मैक्सिमम इमल्सीफिकेशन इंडेक्स दिखाया, जो मजबूत इमल्सीफाइंग क्षमता को दर्शाता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: स्टैफिलोकोकस ऑरियस एक ग्राम–पॉजिटिव बैक्टीरिया है जो अक्सर अस्पताल में होने वाले इन्फेक्शन और स्किन की बीमारियों से जुड़ा होता है।
हाई स्टेबिलिटी और परफॉर्मेंस
नए डेवलप किए गए बायोसरफैक्टेंट ने शानदार थर्मल और केमिकल स्टेबिलिटी भी दिखाई। यह 276°C तक के तापमान पर स्थिर रहा और अलग-अलग pH लेवल पर भी काम करता रहा।
एक और खास बात इसकी सरफेस टेंशन कम करने की क्षमता है, जो सफाई और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक सिंथेटिक सर्फेक्टेंट के बराबर है।
ऐसी प्रॉपर्टीज़ इस कंपाउंड को डिटर्जेंट, फार्मास्यूटिकल्स, कॉस्मेटिक्स और एनवायरनमेंटल रेमेडिएशन टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल के लिए सही बनाती हैं।
सस्टेनेबल सर्फेक्टेंट की ज़रूरत
सर्फेक्टेंट का इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, फूड प्रोसेसिंग और पेट्रोलियम एक्सट्रैक्शन जैसी कई इंडस्ट्रीज़ में इमल्सीफायर, डिस्पर्सेंट और लुब्रिकेंट के तौर पर बड़े पैमाने पर किया जाता है।
हालांकि, सिंथेटिक सर्फेक्टेंट अक्सर अपनी टॉक्सिसिटी और कम बायोडिग्रेडेबिलिटी के कारण एनवायरनमेंटल रिस्क पैदा करते हैं। माइक्रोऑर्गेनिज़्म से बनने वाले बायोसर्फेक्टेंट को एक सुरक्षित और बायोडिग्रेडेबल विकल्प माना जाता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: बायोसर्फेक्टेंट बैक्टीरिया, यीस्ट और फंगी से बनने वाले सरफेस–एक्टिव मॉलिक्यूल होते हैं, जिनकी इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी और ग्रीन केमिस्ट्री के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर स्टडी की गई है।
भविष्य की संभावनाएं और कमर्शियलाइज़ेशन
रिसर्चर्स अभी कंज्यूमर एप्लीकेशन के लिए कंपाउंड की सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए टॉक्सिसिटी टेस्टिंग और डोज़ स्टैंडर्डाइज़ेशन स्टडीज़ कर रहे हैं। प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए इंडस्ट्री कोलेबोरेशन की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं।
अगर इसे सफलतापूर्वक कमर्शियलाइज़ किया जाता है, तो घी से बना बायोसर्फेक्टेंट कॉस्मेटिक्स, पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स और फार्मास्यूटिकल फॉर्मूलेशन में नुकसानदायक केमिकल सर्फेक्टेंट की जगह ले सकता है, जिससे भारत में सस्टेनेबल बायोटेक्नोलॉजी सॉल्यूशन को बढ़ावा मिलेगा।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| अनुसंधान संस्थान | उन्नत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अध्ययन संस्थान (आईएएसएसटी), असम |
| मातृ विभाग | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय |
| प्रमुख खोज | घी का उपयोग कर नवीन बायोसर्फैक्टेंट का संश्लेषण |
| प्रयुक्त सूक्ष्मजीव | लैक्टोबैसिलस प्लांटारम जेबीसी5 |
| यौगिक का प्रकार | लिपोपेप्टाइड बायोसर्फैक्टेंट |
| प्रमुख जीवाणुरोधी लक्ष्य | स्टैफिलोकोकस ऑरियस |
| इमल्सीफिकेशन दक्षता | खाद्य तेलों के लिए लगभग 60 प्रतिशत |
| तापीय स्थिरता | लगभग 276°C तक स्थिर |
| औद्योगिक उपयोग | प्रसाधन सामग्री, औषधि, डिटर्जेंट, जैव-चिकित्सीय उत्पाद |
| पर्यावरणीय महत्व | सिंथेटिक सर्फैक्टेंट्स का जैव-अवक्रमणीय विकल्प |





