मार्च 2, 2026 7:44 अपराह्न

LIGO इंडिया ने ग्रेविटेशनल वेव एस्ट्रोनॉमी को मज़बूत किया

करंट अफेयर्स: LIGO-इंडिया, डिपार्टमेंट ऑफ़ एटॉमिक एनर्जी, ग्रेविटेशनल वेव्स, लार्सन एंड टूब्रो, औंधा हिंगोली महाराष्ट्र, लेज़र इंटरफेरोमेट्री, DAE-DST कोलैबोरेशन, NSF USA, VIRGO, KAGRA

LIGO India Strengthens Gravitational Wave Astronomy

LIGO क्या है

LIGO (लेज़र इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्ज़र्वेटरी) एक एडवांस्ड वैज्ञानिक सुविधा है, जिसे ग्रेविटेशनल वेव्स का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये वेव्स स्पेस-टाइम में बनने वाली बेहद सूक्ष्म लहरें हैं, जो ब्लैक होल के विलय या न्यूट्रॉन स्टार्स की टक्कर जैसी विशाल कॉस्मिक घटनाओं से उत्पन्न होती हैं।

1916 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी में इन वेव्स की भविष्यवाणी की थी। ये वेव्स प्रकाश की गति से चलती हैं और ब्रह्मांड की उत्पत्ति तथा गुरुत्वाकर्षण की प्रकृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं।

स्टैटिक GK फैक्ट: जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी 1915 में प्रकाशित हुई थी और इसने आधुनिक भौतिकी में क्रांतिकारी बदलाव किया।

LIGO कैसे काम करता है

LIGO लेज़र इंटरफेरोमेट्री के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें L-आकार की दो भुजाएँ होती हैं, प्रत्येक लगभग 4 किलोमीटर लंबी।

एक लेज़र बीम को दो हिस्सों में बाँटकर वैक्यूम टनल में भेजा जाता है। ये बीम दर्पणों से टकराकर वापस आती हैं और मिलकर एक इंटरफेरेंस पैटर्न बनाती हैं।

जब कोई ग्रेविटेशनल वेव गुजरती है, तो वह स्पेस-टाइम में सूक्ष्म खिंचाव या सिकुड़न पैदा करती है, जिससे इंटरफेरेंस पैटर्न में बदलाव होता है। यह बदलाव प्रोटॉन के व्यास से भी छोटा हो सकता है, जो इस उपकरण की अत्यधिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।

स्टैटिक GK टिप: ग्रेविटेशनल वेव का पहला प्रत्यक्ष पता 2015 में LIGO-USA द्वारा लगाया गया था।

LIGO-India प्रोजेक्ट

LIGO-India को भारत सरकार ने 2016 में मंजूरी दी। इसे महाराष्ट्र के हिंगोली ज़िले के औंधा में स्थापित किया जा रहा है।

इस परियोजना का निर्माण कार्य लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को सौंपा गया है। यह प्रोजेक्ट परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है।

यह परियोजना अमेरिका की नेशनल साइंस फ़ाउंडेशन (NSF) के साथ एक समझौते के तहत कार्य करती है।

इसमें शामिल प्रमुख भारतीय संस्थान हैं:
इंटरयूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिज़िक्स (IUCAA), पुणे
इंस्टिट्यूट ऑफ प्लाज़्मा रिसर्च (IPR), गांधीनगर
राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (RRCAT), इंदौर

स्टैटिक GK फैक्ट: परमाणु ऊर्जा विभाग सीधे भारत के प्रधानमंत्री के अधीन कार्य करता है।

ग्लोबल नेटवर्क का हिस्सा

LIGO-India वैश्विक ग्रेविटेशनल वेव नेटवर्क का हिस्सा बनेगा। अन्य प्रमुख वेधशालाओं में शामिल हैं:

  • LIGO (USA)
    VIRGO (इटली)
    KAGRA (जापान)

2015 में LIGO-USA द्वारा पहली ग्रेविटेशनल वेव डिटेक्शन ने लगभग एक सदी बाद आइंस्टीन की भविष्यवाणी को प्रमाणित किया।

स्टैटिक GK टिप: VIRGO इटली में पीसा के पास स्थित है, जबकि KAGRA जापान में भूमिगत बनाया गया है।

भारत के लिए महत्व

LIGO-India भारत को ग्रेविटेशनल वेव एस्ट्रोनॉमी और एडवांस्ड फिजिक्स में अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थापित करेगा।

यह परियोजना हाई-एंड टेक्नोलॉजी, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और वैक्यूम सिस्टम विशेषज्ञता को बढ़ावा देगी।

इसके माध्यम से भारत की वैज्ञानिक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा मजबूत होगी। साथ ही यह युवा वैज्ञानिकों को ऑप्टिक्स, डेटा साइंस और क्वांटम मापन तकनीक जैसे क्षेत्रों में अवसर प्रदान करेगी।

LIGO-India भारत के लिए फ्रंटियर साइंस में एक ऐतिहासिक और रणनीतिक कदम है।

Static Usthadian Current Affairs Table

विषय विवरण
परियोजना का नाम लाइगो-इंडिया
स्थान औंढा, हिंगोली ज़िला, महाराष्ट्र
स्वीकृति वर्ष 2016
कार्यान्वयन एजेंसियाँ परमाणु ऊर्जा विभाग तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
अंतरराष्ट्रीय साझेदार नेशनल साइंस फाउंडेशन, अमेरिका
निर्माण साझेदार लार्सन एंड टुब्रो
वैज्ञानिक उद्देश्य गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना
वैश्विक वेधशालाएँ लाइगो (अमेरिका), विर्गो (इटली), काग्रा (जापान)
गुरुत्वाकर्षण तरंगों की पहली खोज 2015
सैद्धांतिक पूर्वानुमान अल्बर्ट आइंस्टीन, 1916
LIGO India Strengthens Gravitational Wave Astronomy
  1. LIGO-इंडिया का मकसद कॉस्मिक ग्रेविटेशनल वेव्स का पता लगाना है।
  2. ग्रेविटेशनल वेव्स की भविष्यवाणी अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1916 में की थी।
  3. इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार ने 2016 में मंज़ूरी दी थी।
  4. यह फैसिलिटी महाराष्ट्र के हिंगोली ज़िले के औंधा में है।
  5. यह DAE और DST के बीच मिलकर काम करता है।
  6. यह प्रोजेक्ट नेशनल साइंस फ़ाउंडेशन (USA) के साथ पार्टनरशिप करता है।
  7. लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट मिला।
  8. LIGO 4-किलोमीटर आर्म्स के साथ लेज़र इंटरफेरोमेट्री का इस्तेमाल करता है।
  9. ग्रेविटेशनल वेव्स का पहला पता 2015 में चला था।
  10. LIGO-इंडिया, VIRGO और KAGRA समेत ग्लोबल नेटवर्क में शामिल होगा।
  11. यह ऑब्ज़र्वेटरी ग्लोबल सोर्स लोकलाइज़ेशन एक्यूरेसी को बढ़ाती है।
  12. यह प्रोजेक्ट भारत की एस्ट्रोफिजिक्स रिसर्च क्षमता को मजबूत करता है।
  13. यह हाईएंड प्रिसिजन इंजीनियरिंग डेवलपमेंट को बढ़ावा देता है।
  14. वैक्यूम सिस्टम और ऑप्टिक्स एक्सपर्टीज़ देश में बढ़ेगी।
  15. DAE सीधे भारत के प्रधानमंत्री के अंडर काम करता है।
  16. बड़े इंस्टीट्यूशन में IUCAA, IPR, और RRCAT शामिल हैं।
  17. यह प्रोजेक्ट दुनिया भर में भारत की साइंटिफिक डिप्लोमेसी को बढ़ावा देता है।
  18. यह डेटा साइंस और क्वांटम मेज़रमेंट में मौके बनाता है।
  19. यह फैसिलिटी भारत को एडवांस्ड रिसर्च देशों में शामिल करती है।
  20. LIGO-India फ्रंटियर फिजिक्स रिसर्च में एक मील का पत्थर है।

Q1. गुरुत्वाकर्षण तरंगों की भविष्यवाणी अल्बर्ट आइंस्टीन ने किस वर्ष की थी?


Q2. लाइगो किस वैज्ञानिक सिद्धांत पर कार्य करता है?


Q3. लाइगो-इंडिया का निर्माण किस राज्य में किया जा रहा है?


Q4. गुरुत्वाकर्षण तरंगों की पहली प्रत्यक्ष खोज किस वर्ष घोषित की गई थी?


Q5. लाइगो-इंडिया किस अमेरिकी एजेंसी के साथ सहयोग के अंतर्गत कार्य करता है?


Your Score: 0

Current Affairs PDF March 2

Descriptive CA PDF

One-Liner CA PDF

MCQ CA PDF​

CA PDF Tamil

Descriptive CA PDF Tamil

One-Liner CA PDF Tamil

MCQ CA PDF Tamil

CA PDF Hindi

Descriptive CA PDF Hindi

One-Liner CA PDF Hindi

MCQ CA PDF Hindi

News of the Day

Premium

National Tribal Health Conclave 2025: Advancing Inclusive Healthcare for Tribal India
New Client Special Offer

20% Off

Aenean leo ligulaconsequat vitae, eleifend acer neque sed ipsum. Nam quam nunc, blandit vel, tempus.