फ़रवरी 28, 2026 10:46 पूर्वाह्न

पवित्र मिठाइयों पर साइंटिफिक नज़र

करंट अफेयर्स: तिरुमाला मंदिर, ई-नोज़ टेक्नोलॉजी, ई-टंग सिस्टम, FSSAI, फ़ूड सेफ़्टी लैब, AI से चलने वाला एनालिसिस, घी में मिलावट, प्रसादम क्वालिटी कंट्रोल, आंध्र प्रदेश

Sacred Sweets Under Scientific Vigilance

मंदिर के किचन में टेक्नोलॉजी रही है

आंध्र प्रदेश का तिरुमाला मंदिर अपने पवित्र प्रसादम की क्वालिटी को सुरक्षित रखने के लिए ₹25 करोड़ की फ़ूड टेस्टिंग लैब बना रहा है। यह कदम तिरुमाला लड्डू बनाने से जुड़े 2024 के घी में मिलावट विवाद के बाद उठाया गया है।

फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) के सपोर्ट से, मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन घी, ड्राई फ्रूट्स और मसालों जैसे इंग्रीडिएंट्स की तेज़ी से स्क्रीनिंग के लिए नोज़ टेक्नोलॉजी और टंग सिस्टम लगाएगा।

स्टैटिक GK फैक्ट: तिरुमाला आंध्र प्रदेश के तिरुपति ज़िले में है, और मंदिर को तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) मैनेज करता है, जो दुनिया के सबसे अमीर धार्मिक संस्थानों में से एक है।

इलेक्ट्रॉनिक नोज़ को समझना

इलेक्ट्रॉनिक नोज़ (E-Nose) एक सेंसरबेस्ड डिवाइस है जिसे खाने की चीज़ों से निकलने वाले वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड (VOCs) का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह खुशबू के पैटर्न को कैप्चर करने के लिए कई गैस सेंसर का इस्तेमाल करता है।

किसी एक कंपाउंड की पहचान करने के बजाय, यह AI-बेस्ड पैटर्न रिकग्निशन का इस्तेमाल करके पूरे ओडर फिंगरप्रिंट को एनालाइज़ करता है। इससे खाने के तेल और डेयरी प्रोडक्ट में खराबी, कंटैमिनेशन या मिलावट का पता लगाने में मदद मिलती है।

यह डिवाइस केमिकल सिग्नल को इलेक्ट्रिकल रिस्पॉन्स में बदलता है और क्लासिफिकेशन के लिए स्टोर किए गए रेफरेंस डेटाबेस से उनकी तुलना करता है।

स्टैटिक GK टिप: VOCs कार्बन-बेस्ड केमिकल होते हैं जो कमरे के तापमान पर आसानी से उड़ जाते हैं और खाने की क्वालिटी टेस्टिंग में इंडिकेटर के तौर पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक टंग की भूमिका

इलेक्ट्रॉनिक टंग (E-Tongue) स्वाद से जुड़े केमिकल कॉम्पोनेंट का एनालिसिस करके लिक्विड सैंपल को जांचता है। यह मीठे, खट्टे, नमकीन और कड़वे प्रोफाइल के लिए ज़िम्मेदार घुले हुए पदार्थों का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर का इस्तेमाल करता है।

यह सिस्टम इलेक्ट्रिकल सिग्नल पैटर्न बनाता है और सही क्लासिफिकेशन के लिए मशीनलर्निंग एल्गोरिदम का इस्तेमाल करता है। इसका बड़े पैमाने पर खाने के तेल, ड्रिंक्स और डेयरी प्रोडक्ट की टेस्टिंग में इस्तेमाल किया जाता है। मंदिर के मामले में, E-Tongue घी की बनावट का पता लगाने और प्रसाद में स्वाद का एक जैसा होना पक्का करने में मदद करेगा।

कंबाइंड मल्टीसेंसर एडवांटेज

दोनों डिवाइस को एक साथ इस्तेमाल करने से पता लगाने की सटीकता बढ़ जाती है। E-Nose खुशबू और वोलाटाइल कंटैमिनेशन की पहचान करता है, जबकि E-Tongue घुले हुए केमिकल बदलावों का पता लगाता है।

यह मिला-जुला तरीका नॉनडिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग, तेज़ स्क्रीनिंग और कम से कम मैनुअल दखल को मुमकिन बनाता है। यह पक्का करता है कि बड़े पैमाने पर प्रसाद तैयार करने से सुरक्षा स्टैंडर्ड से कोई समझौता न हो।

इस पहल की वजह

यह तैनाती 2024 में पिछले राज्य प्रशासन के दौरान सप्लाई किए गए मिलावटी घी के आरोपों के बाद की गई है। एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, बीटाकैरोटीन, एसिटिक एसिड एस्टर और आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट के मिक्स होने की रिपोर्ट दी थी।

इस विवाद ने धार्मिक संस्थानों में खाने की चीज़ों की ईमानदारी को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कीं, जिससे राज्य सरकार ने मॉडर्न क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम को मंज़ूरी दी।

स्टेटिक GK फैक्ट: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत बनाया गया था, और यह मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के तहत काम करता है।

AI और डेटा प्रोसेसिंग

दोनों सिस्टम कम्प्यूटेशनल एनालिटिक्स पर निर्भर करते हैं। सेंसर आउटपुट को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदला जाता है, स्टैटिस्टिकली प्रोसेस किया जाता है, और प्रीफेड क्वालिटी स्टैंडर्ड से मैच किया जाता है।

लगातार डेटा इनपुट के साथ, AI मॉडल समय के साथ डिटेक्शन की सटीकता को बेहतर बनाते हैं। हालांकि, अधिकारी साफ करते हैं कि ये डिवाइस शुरुआती स्क्रीनिंग टूल के तौर पर काम करते हैं और पूरी लैब टेस्टिंग की जगह नहीं लेते हैं।

यह पहल पारंपरिक संस्थानों में टेक्नोलॉजी के बड़े इंटीग्रेशन को दिखाती है, जो साइंटिफिक वैलिडेशन के ज़रिए भरोसा मजबूत करती है।

स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स तालिका

विषय विवरण
मंदिर का स्थान तिरुमला, तिरुपति जिला, आंध्र प्रदेश
प्रबंधन निकाय तिरुमला तिरुपति देवस्थानम्
नियामक प्राधिकरण भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण
कानूनी ढांचा खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006
उपयोग की गई तकनीक इलेक्ट्रॉनिक नाक तथा इलेक्ट्रॉनिक जीभ
उद्देश्य मिलावट की पहचान और गुणवत्ता सुनिश्चित करना
निवेश ₹25 करोड़ की खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला
प्रमुख कारण 2024 का घी मिलावट विवाद
Sacred Sweets Under Scientific Vigilance
  1. तिरुमाला मंदिर25 करोड़ की खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित कर रहा है।
  2. यह कदम 2024 के घी मिलावट विवाद के बाद उठाया गया।
  3. इस पहल को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का समर्थन प्राप्त है।
  4. मंदिर सुगंध पहचान के लिए उन्नत नोज़ तकनीक का उपयोग करेगा।
  5. टंग प्रणाली तरल पदार्थों के स्वाद का वैज्ञानिक विश्लेषण करेगी।
  6. यह प्रयोगशाला प्रसादम की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को सुदृढ़ करेगी।
  7. मंदिर का प्रबंधन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम द्वारा किया जाता है।
  8. नोज़ प्रणाली खाद्य पदार्थों में वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों का पता लगाती है।
  9. कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पैटर्न पहचान गंध के विशिष्ट संकेतों को सटीक पहचानती है।
  10. टंग स्वाद विश्लेषण हेतु विद्युतरासायनिक सेंसर का उपयोग करता है।
  11. दोनों प्रणालियाँ अविनाशी खाद्य परीक्षण तकनीक प्रदान करती हैं।
  12. ये उपकरण गुणवत्ता आश्वासन के प्रारंभिक जाँच साधन के रूप में कार्य करते हैं।
  13. एक विशेष जाँच दल ने मिलावट के आरोपों की जाँच की।
  14. आरोपों में पाम तेल और कृत्रिम स्वाद पदार्थ शामिल बताए गए।
  15. यह प्रयोगशाला धार्मिक संस्थानों में वैज्ञानिक सत्यापन को प्रोत्साहित करती है।
  16. प्राधिकरण खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्य करता है।
  17. तिरुमाला आंध्र प्रदेश के तिरुपति ज़िले में स्थित है।
  18. यह संयुक्त प्रणाली जटिल खाद्य संरचना में पहचान क्षमता को बेहतर बनाती है।
  19. यह पहल कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण को खाद्य सुरक्षा में समाहित करती है।
  20. यह परियोजना पवित्र खाद्य अखंडता मानकों में जनता का विश्वास मजबूत करती है।

Q1. ₹25 करोड़ की खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला किस मंदिर में स्थापित की जा रही है?


Q2. तिरुमला में खाद्य परीक्षण पहल को कौन-सा नियामक निकाय समर्थन दे रहा है?


Q3. इलेक्ट्रॉनिक नोज़ (E-Nose) प्रणाली का मुख्य कार्य क्या है?


Q4. इलेक्ट्रॉनिक टंग (E-Tongue) मुख्यतः खाद्य नमूनों के किस पहलू का विश्लेषण करती है?


Q5. इस पहल को प्रेरित करने वाला 2024 का विवाद किस सामग्री में मिलावट से संबंधित था?


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