विवाद का बैकग्राउंड
Supreme Court of India ने हाल ही में तमिलनाडु की स्टेट यूनिवर्सिटी में वाइस-चांसलर की नियुक्ति से जुड़े Madras High Court के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने पहले एक बदले हुए प्रोविज़न पर रोक लगा दी थी, जो तमिलनाडु सरकार को सीधे वाइस-चांसलर नियुक्त करने की इजाज़त देता था।
यह मुद्दा राज्य सरकार और यूनिवर्सिटी अपॉइंटमेंट के तय तरीकों के बीच शक्तियों के बैलेंस पर है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी आखिरी फैसला लेने से पहले राज्य को अपनी दलीलें पेश करने का सही मौका दिया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश
मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा लाए गए बदले हुए प्रोविज़न के लागू होने पर रोक लगा दी थी। इस बदलाव ने सरकार को स्टेट यूनिवर्सिटी में वाइस-चांसलर नियुक्त करने में अहम भूमिका निभाने का अधिकार दिया।
ऐसे अंतरिम आदेश आखिरी फैसले तक मौजूदा स्थिति बनाए रखने के लिए जारी किए गए कुछ समय के निर्देश होते हैं। हाई कोर्ट के दखल से यूनिवर्सिटी की ऑटोनॉमी के बारे में ज़रूरी कॉन्स्टिट्यूशनल और एडमिनिस्ट्रेटिव सवाल उठे।
स्टैटिक GK फैक्ट: मद्रास हाई कोर्ट 1862 में बना था और यह बॉम्बे और कलकत्ता के साथ भारत के तीन सबसे पुराने हाई कोर्ट में से एक है।
सुप्रीम कोर्ट की बातें
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी, जिससे कुछ समय के लिए बदले हुए नियम का असरदार तरीके से लागू होना शुरू हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत पर ज़ोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार को अपने कानूनी काम का बचाव करने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए।
कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट को यह भी निर्देश दिया कि वह मामले का निपटारा छह हफ़्ते के अंदर करे, ताकि समय पर हल निकल सके। यह यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन में लंबे समय तक अनिश्चितता को रोकने की ज्यूडिशियरी की कोशिश को दिखाता है।
स्टैटिक GK टिप: भारत का सुप्रीम कोर्ट 1950 में कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 124 के तहत बना था और देश में सबसे बड़ी ज्यूडिशियल अथॉरिटी के तौर पर काम करता है।
कॉन्स्टिट्यूशनल और एडमिनिस्ट्रेटिव मतलब
वाइस-चांसलर यूनिवर्सिटी के एग्जीक्यूटिव हेड के तौर पर काम करते हैं और एकेडमिक और एडमिनिस्ट्रेटिव गवर्नेंस में अहम भूमिका निभाते हैं। अपॉइंटमेंट मैकेनिज्म में अक्सर सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटियां शामिल होती हैं, और University Grants Commission (UGC) के नियमों का पालन करना ज़रूरी है।
मौजूदा मामला फेडरल सिद्धांतों, यूनिवर्सिटी की ऑटोनॉमी और ज्यूडिशियल रिव्यू के दायरे से जुड़ा है। एजुकेशन सातवें शेड्यूल की कंकरेंट लिस्ट (लिस्ट III) में लिस्टेड है, जिससे केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की स्थापना 1956 में भारत में हायर एजुकेशन के स्टैंडर्ड को कोऑर्डिनेट करने, तय करने और बनाए रखने के लिए की गई थी।
यह मामला क्यों मायने रखता है
इस मामले का नतीजा इस बात पर असर डाल सकता है कि राज्य सरकारें यूनिवर्सिटी गवर्नेंस में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कैसे करती हैं। यह दूसरे राज्यों में इसी तरह के विवादों के लिए एक मिसाल भी बन सकता है।
एक सही सुनवाई पर ज़ोर देकर और एक सख्त टाइमलाइन तय करके, सुप्रीम कोर्ट ने प्रोसीजरल फेयरनेस और इंस्टीट्यूशनल बैलेंस के महत्व को हाईलाइट किया है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| प्रकरण का मुद्दा | तमिलनाडु राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति |
| उच्च न्यायालय की कार्रवाई | राज्य सरकार को नियुक्ति की अनुमति देने वाले संशोधित प्रावधान पर रोक |
| सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय | उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश पर स्थगन |
| दिया गया समय | मामले के निर्णय हेतु छह सप्ताह |
| संवैधानिक अनुच्छेद | अनुच्छेद 124 – सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना |
| शिक्षा की सूची | समवर्ती सूची (सूची III) |
| यूजीसी स्थापना वर्ष | 1956 |
| सबसे पुराने उच्च न्यायालय | Madras High Court, Bombay High Court, Calcutta High Court (1862) |





