S4C डैशबोर्ड का लॉन्च
हाल ही में Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) के तहत स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (S4C) डैशबोर्ड लॉन्च किया गया। यह पहल Ministry of Home Affairs (MHA) के मार्गदर्शन में की गई है।
यह डैशबोर्ड राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन, रियल–टाइम मॉनिटरिंग, डेटा शेयरिंग और एनालिटिकल सपोर्ट प्रदान करता है। इसका उद्देश्य साइबर अपराधों के खिलाफ त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
स्थापना और पृष्ठभूमि
I4C को वर्ष 2018 में मंज़ूरी दी गई और 2020 में इसे औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसका उद्देश्य साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड और कॉम्प्रिहेंसिव फ्रेमवर्क तैयार करना था।
यह केंद्र लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों (LEAs) को डेटा, एनालिसिस और कैपेसिटी बिल्डिंग के माध्यम से सहयोग देता है। I4C एक केंद्रीय हब के रूप में काम करता है, जो देशभर में साइबर अपराधों की रोकथाम और जांच को मजबूत बनाता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स भारत में इंटरनल सिक्योरिटी, बॉर्डर मैनेजमेंट और डिज़ास्टर रिस्पॉन्स के लिए जिम्मेदार है।
I4C के प्रमुख उद्देश्य
I4C का मुख्य लक्ष्य भारत में साइबर अपराध नियंत्रण के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करना है। यह राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।
विशेष फोकस महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध पर है। इसमें ऑनलाइन एक्सप्लॉइटेशन, फाइनेंशियल फ्रॉड और सोशल मीडिया अब्यूज़ की निगरानी शामिल है।
इसके अलावा, जनता को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार और रिपोर्टिंग तंत्र के बारे में जागरूक करने के लिए साइबर अवेयरनेस कैंपेन भी चलाए जाते हैं।
स्टैटिक GK टिप: भारत में साइबर अपराधों के मामले Information Technology Act 2000 और Indian Penal Code (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किए जाते हैं।
संस्थागत मैकेनिज्म
I4C कई वर्टिकल के माध्यम से कार्य करता है, जिनमें थ्रेट एनालिटिक्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, कैपेसिटी बिल्डिंग, और साइबर क्राइम रिपोर्टिंग शामिल हैं।
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल को I4C के फ्रेमवर्क से जोड़ा गया है, जिससे नागरिक ऑनलाइन साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
यह केंद्र पुलिस कर्मियों को डिजिटल फोरेंसिक, साइबर इन्वेस्टिगेशन, और डिजिटल एविडेंस प्रिज़र्वेशन में प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिससे जांच की गुणवत्ता और सज़ा दर में सुधार होता है।
नया S4C डैशबोर्ड राज्य-स्तरीय समन्वय को सशक्त बनाकर डेटा–ड्रिवन गवर्नेंस को बढ़ावा देता है। यह साइबर अपराधों के उभरते ट्रेंड, हॉटस्पॉट और कार्यप्रणाली की पहचान में सहायक है।
इंटरनल सिक्योरिटी के लिए महत्व
भारत में डिजिटल ट्रांज़ैक्शन, सोशल मीडिया उपयोग, और ऑनलाइन सेवाओं में तेज़ी से वृद्धि हुई है। इसके साथ ही साइबर खतरों का दायरा भी बढ़ा है।
I4C यह सुनिश्चित करता है कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए अलग-अलग प्रयासों के बजाय एक इंटीग्रेटेड और सिस्टमैटिक अप्रोच अपनाई जाए।
यह पहल डिजिटल इंडिया के व्यापक विज़न को समर्थन देती है, जिससे तकनीकी प्रगति के साथ मजबूत इंस्टीट्यूशनल सेफगार्ड्स भी सुनिश्चित हों और राष्ट्रीय सुरक्षा सुदृढ़ हो।
स्टैटिक उस्थादियन करंट अफेयर्स तालिका
| विषय | विवरण |
| संगठन | Indian Cyber Crime Coordination Centre |
| मूल मंत्रालय | Ministry of Home Affairs |
| योजना स्वीकृति वर्ष | 2018 |
| राष्ट्र को समर्पित | 2020 |
| प्रमुख लॉन्च | स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर डैशबोर्ड |
| मुख्य उद्देश्य | साइबर अपराध के विरुद्ध समन्वित और व्यापक कार्रवाई |
| फोकस क्षेत्र | महिला एवं बाल साइबर संरक्षण, जागरूकता, क्षमता निर्माण |
| विधिक समर्थन ढांचा | Information Technology Act 2000 |





