लॉन्च और संस्थागत ढांचा
भारत टैक्सी को भारत के पहले कोऑपरेटिव-आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया है, जो शहरी मोबिलिटी सेक्टर में एक स्ट्रक्चरल बदलाव है। इस पहल ने एक सफल पायलट चरण के बाद कमर्शियल ऑपरेशन शुरू किए।
इस प्लेटफॉर्म को आधिकारिक तौर पर अमित शाह ने विज्ञान भवन में लॉन्च किया, जो मजबूत संस्थागत समर्थन को दिखाता है। शुरुआती ऑपरेशन दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में शुरू हो गए हैं, और तीन साल के भीतर देश भर में विस्तार की योजना है।
स्टैटिक जीके तथ्य: मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 2002 भारत में एक से ज़्यादा राज्यों में काम करने वाली कोऑपरेटिव्स के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
कोऑपरेटिव ओनरशिप मॉडल
भारत टैक्सी की सबसे खास बात ड्राइवर ओनरशिप है। प्राइवेट एग्रीगेटर्स के उलट, ड्राइवरों को कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर नहीं, बल्कि कोऑपरेटिव ढांचे के अंदर स्टेकहोल्डर के तौर पर माना जाता है।
यह ओनरशिप मॉडल ड्राइवरों के लिए प्रॉफिट शेयरिंग, वित्तीय सम्मान और लंबे समय की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। सहकारिता मंत्रालय ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा ड्राइवर-ओन्ड मोबिलिटी प्लेटफॉर्म बताया है, जो इसके वैश्विक महत्व को मजबूत करता है।
मार्गदर्शक सिद्धांत और सामाजिक प्रभाव
भारत टैक्सी चार मुख्य सिद्धांतों पर काम करती है: ओनरशिप, सुरक्षा कवर, सम्मान और समावेशी विकास। इन सिद्धांतों का मकसद ऐप-आधारित गिग वर्क में मौजूद आय की असमानता को ठीक करना है।
ड्राइवरों को केंद्र में रखकर, यह प्लेटफॉर्म शोषण को कम करने और समान विकास को बढ़ावा देने की कोशिश करता है। कोऑपरेटिव तरीका भारत के लोगों पर केंद्रित आर्थिक मॉडल की तरफ बढ़ते कदम के साथ मेल खाता है।
स्टैटिक जीके टिप: भारत को अपने कोऑपरेटिव आंदोलन के लिए विश्व स्तर पर पहचाना जाता है, खासकर डेयरी, बैंकिंग और कृषि जैसे क्षेत्रों में।
कमीशन स्ट्रक्चर और कमाई
भारत टैक्सी का कमीशन मॉडल खास तौर पर ड्राइवरों के फायदे के लिए बनाया गया है। कमाए गए हर ₹100 में से, ₹80 सीधे ड्राइवर के खाते में जमा किए जाते हैं, जबकि प्लेटफॉर्म सिर्फ ₹20 रखता है।
यह प्लेटफॉर्म ज़ीरो-कमीशन और सर्ज-फ्री प्राइसिंग पॉलिसी को भी बढ़ावा देता है, जिससे ड्राइवरों और यात्रियों दोनों के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। बताया जाता है कि इससे प्राइवेट प्रतिस्पर्धियों पर कमीशन कम करने और बेहतर इंसेंटिव देने का दबाव पड़ा है।
सेवाएं और मोबिलिटी विकल्प
भारत टैक्सी मल्टी-मोबिलिटी सेवाएं प्रदान करती है, जिसमें कार, थ्री-व्हीलर और टू-व्हीलर शामिल हैं। यह लचीलापन इसे शहरी और अर्ध-शहरी परिवहन जरूरतों के लिए उपयुक्त बनाता है। किफायती किराया और सर्ज प्राइसिंग न होने के कारण यह रोज़ाना सफ़र करने वालों, ऑफिस जाने वालों और कम दूरी की यात्रा करने वालों के लिए आकर्षक है। कोऑपरेटिव स्ट्रक्चर सर्विस की विश्वसनीयता और सही व्यवहार सुनिश्चित करता है।
विस्तार का रोडमैप और शुरुआती अपनाना
इस प्लेटफॉर्म का लक्ष्य तीन साल के अंदर पूरे भारत में विस्तार करना है, जिसमें सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल होंगे। इस विज़न में कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक निर्बाध कनेक्टिविटी शामिल है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 2.5 लाख से ज़्यादा ड्राइवर पहले ही जुड़ चुके हैं, और 8.5 लाख से ज़्यादा यात्री रजिस्टर्ड हैं। आठ प्रमुख सहकारी संगठनों का समर्थन इसकी लंबी अवधि की व्यवहार्यता को मज़बूत करता है।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत में आठ लाख से ज़्यादा रजिस्टर्ड सहकारी समितियाँ हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में लाखों लोगों को रोज़गार देती हैं।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| प्लेटफ़ॉर्म का नाम | भारत टैक्सी |
| प्रकृति | सहकारी आधारित राइड-हेलिंग सेवा |
| लॉन्च स्थान | विज्ञान भवन, नई दिल्ली |
| कानूनी ढांचा | बहु-राज्य सहकारी समितियाँ अधिनियम, 2002 |
| प्रमुख विशेषता | ड्राइवर स्वामित्व और लाभ-साझेदारी |
| कमीशन मॉडल | 80% ड्राइवर को, 20% प्लेटफ़ॉर्म को |
| मूल्य निर्धारण नीति | सर्ज प्राइसिंग नहीं |
| प्रारंभिक क्षेत्र | दिल्ली-एनसीआर और गुजरात |
| विस्तार लक्ष्य | तीन वर्षों में पैन-इंडिया |
| जुड़े ड्राइवर | 2.5 लाख से अधिक |
| पंजीकृत यात्री | 8.5 लाख से अधिक |





