व्हाइट पेपर की पृष्ठभूमि
भारत ने 24 जनवरी 2026 को “टेक्नो-लीगल फ्रेमवर्क के माध्यम से AI गवर्नेंस को मजबूत करना” पर एक व्हाइट पेपर जारी किया। इसे प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय (OPSA) द्वारा जारी किया गया था, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कैसे रेगुलेट किया जाता है, इसमें एक बड़े पॉलिसी बदलाव का संकेत देता है।
यह दस्तावेज़ पारंपरिक कमांड-एंड-कंट्रोल रेगुलेशन से अलग हटता है। इसके बजाय, यह एक टेक्नो-लीगल मॉडल को बढ़ावा देता है जो कानून, नैतिकता और टेक्नोलॉजी को सीधे AI सिस्टम डिज़ाइन और डिप्लॉयमेंट में इंटीग्रेट करता है।
इस दृष्टिकोण का लक्ष्य भारत के डिजिटल परिवर्तन और AI इकोसिस्टम को धीमा किए बिना जिम्मेदार इनोवेशन सुनिश्चित करना है।
डिज़ाइन द्वारा गवर्नेंस
यह फ्रेमवर्क डिज़ाइन द्वारा गवर्नेंस पेश करता है, जहाँ कानूनी और नैतिक सुरक्षा उपायों को AI डिज़ाइन चरण में ही एम्बेड किया जाता है। कम्प्लायंस को डिप्लॉयमेंट के बाद की जाँच के रूप में नहीं, बल्कि एक बिल्ट-इन सिस्टम फीचर के रूप में माना जाता है।
यह दृष्टिकोण भारी बाहरी प्रवर्तन की आवश्यकता को कम करता है। यह जवाबदेही को केवल एक कानूनी दायित्व के बजाय AI सिस्टम की एक तकनीकी विशेषता भी बनाता है।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत के शुरुआती गवर्नेंस-बाय-डिज़ाइन मॉडल सबसे पहले आधार और UPI जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) सिस्टम में देखे गए थे।
जोखिम-आनुपातिक रेगुलेशन
यह मॉडल जोखिम-आनुपातिक नियंत्रणों का पालन करता है। गवर्नेंस की तीव्रता डिप्लॉयमेंट के पैमाने और AI सिस्टम के संभावित नुकसान पर निर्भर करती है।
स्वास्थ्य सेवा, सार्वजनिक सुरक्षा और कल्याण वितरण जैसे उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में मजबूत नियंत्रण लागू होते हैं। इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए कम जोखिम वाले अनुप्रयोगों को अधिक लचीलापन दिया जाता है।
यह संरचना सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए अत्यधिक रेगुलेशन को रोकती है।
मानवीय निगरानी तंत्र
यह फ्रेमवर्क महत्वपूर्ण निर्णय बिंदुओं पर मानवीय पर्यवेक्षण को अनिवार्य करता है। उच्च-प्रभाव वाले निर्णयों में AI सिस्टम पूरी तरह से स्वायत्त अधिकारियों के रूप में कार्य नहीं कर सकते हैं।
मानवीय निगरानी स्वचालित नुकसान, एल्गोरिथम पूर्वाग्रह और अनुचित बहिष्कार को रोकने के लिए एक फेल-सेफ परत के रूप में कार्य करती है।
स्टेटिक GK टिप: ह्यूमन-इन-द-लूप मॉडल को प्रमुख गवर्नेंस निकायों द्वारा वैश्विक स्तर पर एक मुख्य AI सुरक्षा सिद्धांत के रूप में मान्यता प्राप्त है।
लाइफसाइकिल-आधारित AI गवर्नेंस
गवर्नेंस पूरे AI लाइफसाइकिल में संचालित होता है। इसमें डेटा संग्रह, मॉडल प्रशिक्षण, डिप्लॉयमेंट और वास्तविक दुनिया में उपयोग शामिल है।
सुरक्षा उपाय निरंतर होते हैं, न कि एपिसोडिक। यह सुनिश्चित करता है कि डिप्लॉयमेंट के बाद उभरने वाले जोखिमों को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जाए।
लागू करने की चुनौतियाँ
एक बड़ी चुनौती प्राइवेसी बनाम परफॉर्मेंस है। बड़े पैमाने पर डेटा मिटाने से मॉडल की सटीकता कम हो सकती है, खासकर भाषाई और सांस्कृतिक रूप से कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों के लिए।
एक और मुद्दा AI उपयोगकर्ता-AI विषय का विभाजन है। भारतीय कल्याण प्रणालियों में, नागरिक अक्सर AI निर्णयों के विषय होते हैं, सक्रिय उपयोगकर्ता नहीं, जिससे परिणामों पर आपत्ति जताने की उनकी क्षमता सीमित हो जाती है।
सीमा पार AI मॉडल से नियामक जोखिम पैदा होते हैं। विदेशों में प्रशिक्षित मॉडल में भारतीय सुरक्षा उपाय शामिल नहीं हो सकते हैं, जिससे क्षेत्राधिकार शासन में कमियाँ पैदा होती हैं।
अनुपालन तंत्र भी सिस्टम की सटीकता को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे विनियमन और दक्षता के बीच तालमेल बिठाना पड़ता है।
संस्थागत वास्तुकला
श्वेत पत्र पूरे सरकारी दृष्टिकोण का प्रस्ताव करता है। यह अंतर-मंत्रालयी समन्वय के लिए AI गवर्नेंस ग्रुप (AIGG) जैसे समर्पित निकायों के निर्माण की सिफारिश करता है।
शासन में कानून, नीति, नैतिकता और AI सुरक्षा विशेषज्ञता को एकीकृत करने के लिए प्रौद्योगिकी और नीति विशेषज्ञ समिति (TPEC) का प्रस्ताव है।
यह खंडित विनियमन के बजाय संस्थागत सामंजस्य सुनिश्चित करता है।
तकनीकी प्रवर्तक
प्रमुख प्रौद्योगिकियाँ शासन कार्यान्वयन का समर्थन करेंगी। इनमें मिटाने के अधिकार के लिए मशीन अनलर्निंग और गोपनीयता संरक्षण के लिए सिंथेटिक डेटा शामिल हैं।
वॉटरमार्किंग और मेटाडेटा जैसे कंटेंट प्रोवेनेंस टूल डीपफेक और हेरफेर किए गए कंटेंट का पता लगाने में मदद करते हैं। आधार और UPI जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एकीकरण सत्यापन और विश्वास ढांचे को मजबूत करता है।
DEPA एकीकरण
यह ढांचा सहमति-संचालित डेटा साझाकरण के लिए डेटा सशक्तिकरण और संरक्षण वास्तुकला (DEPA) का उपयोग करता है। यह विश्वसनीय निष्पादन वातावरण और उपयोगकर्ता-नियंत्रित डेटा प्रवाह को सक्षम बनाता है।
यह सुनिश्चित करता है कि AI विकास डेटा संप्रभुता और व्यक्तिगत सहमति मॉडल के अनुरूप हो।
स्टेटिक GK तथ्य: DEPA भारत की सहमति-आधारित डेटा-साझाकरण वास्तुकला है जो डेटा फिड्यूशरी और सहमति प्रबंधकों का समर्थन करती है।
स्थिर उस्थादियन समसामयिक मामले तालिका
| विषय | विवरण |
| श्वेत पत्र जारीकर्ता | प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय |
| प्रस्तावित मॉडल | तकनीकी-कानूनी एआई शासन ढांचा |
| मुख्य सिद्धांत | डिज़ाइन के माध्यम से शासन (Governance by Design) |
| विनियमन दृष्टिकोण | जोखिम-अनुपातिक और लचीला |
| निगरानी तंत्र | अनिवार्य मानव पर्यवेक्षण |
| शासन का दायरा | एआई का संपूर्ण जीवन-चक्र |
| संस्थागत निकाय | AIGG और TPEC |
| गोपनीयता उपकरण | मशीन अनलर्निंग और सिंथेटिक डेटा |
| अवसंरचना संबंध | DPI एकीकरण |
| डेटा ढांचा | DEPA-आधारित सहमति वास्तुकला |





