AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रिलायंस और मेटा ने मिलाया हाथ
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और मेटा प्लेटफॉर्म्स ने गुजरात के जामनगर में AI-इनेबल्ड हाइपरस्केल डेटा सेंटर बनाने के लिए पार्टनरशिप की है। इस आने वाली फैसिलिटी की शुरुआती क्षमता 168 MW होगी, जो इसे भारत के सबसे बड़े AI-केंद्रित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक बनाती है।
यह प्रोजेक्ट मेटा के ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्कलोड, क्लाउड कंप्यूटिंग ऑपरेशन्स और डेटा प्रोसेसिंग की जरूरतों को पूरा करेगा। यह नेक्स्ट-जेनरेशन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट के लिए भारत के एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के तौर पर उभरने को भी दिखाता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) की स्थापना 1973 में धीरूभाई अंबानी ने की थी और इसका हेडक्वार्टर मुंबई, महाराष्ट्र में है।
मेटा के लिए भारत का पहला ‘बिल्ट-टू-सूट’ AI डेटा सेंटर
जामनगर फैसिलिटी भारत में मेटा का पहला ‘बिल्ट–टू–सूट‘ डेटा सेंटर होगा। ‘बिल्ट-टू-सूट’ फैसिलिटी को खास तौर पर किसी खास क्लाइंट की ऑपरेशनल और टेक्निकल जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
इस प्रोजेक्ट के दो साल के अंदर पूरा होने की उम्मीद है। यह AI मॉडल ट्रेनिंग, क्लाउड सर्विसेज़ और बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग के लिए ज़रूरी एडवांस्ड कंप्यूटिंग क्षमता प्रदान करेगा।
स्टैटिक GK टिप: मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. का हेडक्वार्टर मेनलो पार्क, कैलिफोर्निया, USA में है और यह Facebook, Instagram, WhatsApp और Threads जैसे प्लेटफॉर्म्स की मालिक कंपनी है।
जामनगर को क्यों चुना गया
जामनगर कई रणनीतिक फायदे देता है जो इसे हाइपरस्केल AI डेटा सेंटर के लिए उपयुक्त बनाते हैं। यह क्षेत्र इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी रिसोर्स और हाई–स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी तक पहुंच प्रदान करता है।
यह लोकेशन भारत के पश्चिमी सबमरीन केबल लैंडिंग स्टेशनों के भी करीब है, जिससे बेहतर ग्लोबल इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित होती है। Jio के फाइबर नेटवर्क के साथ इंटीग्रेशन डेटा ट्रांसमिशन क्षमताओं को और मजबूत करेगा।
स्टैटिक GK फैक्ट: जामनगर गुजरात में स्थित है, जो भारत का सबसे बड़ा तटीय राज्य है और इसकी तटरेखा लगभग 1,600 km लंबी है।
सस्टेनेबिलिटी पर खास ध्यान
यह प्रोजेक्ट पर्यावरण के अनुकूल ऑपरेशन्स पर बहुत जोर देता है। डेटा सेंटर मुख्य रूप से रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल करके चलेगा, जिससे पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। इसमें कूलिंग के लिए खारे पानी को मीठे पानी में बदलकर (डीसेलिनेटेड) इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे मीठे पानी की खपत कम होगी और एनर्जी एफिशिएंसी बेहतर होगी। उम्मीद है कि इन उपायों से इस सुविधा (फैसिलिटी) का कुल कार्बन फुटप्रिंट कम होगा।
स्टैटिक GK टिप: डेटा सेंटरों को एडवांस्ड कूलिंग सिस्टम की ज़रूरत होती है क्योंकि लगातार कंप्यूटिंग ऑपरेशन के दौरान सर्वर बहुत ज़्यादा गर्मी पैदा करते हैं।
इस प्रोजेक्ट में रिलायंस की भूमिका
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर के तौर पर काम करेगी और इस सुविधा के पूरे लाइफ़साइकल को मैनेज करेगी। इसकी ज़िम्मेदारियों में डेटा सेंटर का डिज़ाइन और निर्माण, रिन्यूएबल पावर की सप्लाई, नेटवर्क कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना और ऑपरेशन व मेंटेनेंस संभालना शामिल है।
इस सहयोग से भारत के AI इकोसिस्टम के मज़बूत होने, ग्लोबल टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करने और देश के एक प्रमुख डिजिटल इनोवेशन हब बनने की प्रक्रिया में तेज़ी आने की उम्मीद है।
उस्तादियन समसामयिकी स्थायी तथ्य तालिका
| तथ्य | विवरण |
| परियोजना | एआई-सक्षम हाइपरस्केल डेटा सेंटर |
| साझेदार | रिलायंस इंडस्ट्रीज और मेटा प्लेटफॉर्म्स |
| स्थान | जामनगर, गुजरात |
| प्रारंभिक क्षमता | 168 मेगावाट |
| महत्व | मेटा के लिए भारत का पहला आवश्यकताओं के अनुरूप निर्मित एआई डेटा सेंटर |
| प्रमुख उद्देश्य | एआई कंप्यूटिंग, क्लाउड सेवाएँ और डेटा प्रोसेसिंग |
| सततता संबंधी विशेषताएँ | नवीकरणीय ऊर्जा और विलवणीकृत समुद्री जल से शीतलन |
| रिलायंस की भूमिका | बुनियादी ढाँचे का विकास, विद्युत आपूर्ति, कनेक्टिविटी और संचालन |
| मेटा की भूमिका | एआई अवसंरचना और कंप्यूटिंग क्षमता का उपयोग |
| राष्ट्रीय महत्व | वैश्विक एआई अवसंरचना केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना |





