राष्ट्रीय पोषण माह 2026 की शुरुआत
9वां राष्ट्रीय पोषण माह 9 सितंबर, 2026 को “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी“ थीम के साथ शुरू हुआ। महीने भर चलने वाले इस अभियान का मकसद पोषण, बच्चों की देखभाल और बचपन के शुरुआती विकास में समुदाय की भागीदारी को मजबूत करना है।
2026 के अभियान में आहार में विविधता, प्रोटीन से भरपूर भोजन, पौष्टिक गर्म पका हुआ खाना, सामुदायिक जवाबदेही और बचपन में शुरुआती प्रोत्साहन पर खास जोर दिया गया है। यह साल प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के 10 साल पूरे होने का भी प्रतीक है।
राष्ट्रीय पोषण माह क्या है?
राष्ट्रीय पोषण माह हर साल सितंबर में एक राष्ट्रव्यापी अभियान के तौर पर मनाया जाता है, जिसका मकसद पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाना और व्यवहार में बदलाव को बढ़ावा देना है।
इसके मुख्य लाभार्थियों में गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, बच्चे, किशोर और परिवार शामिल हैं। पहले के अभियानों में मां के पोषण, शिशु और छोटे बच्चों के खान–पान, विकास की निगरानी, स्वच्छता और स्वस्थ खान–पान की आदतों पर ध्यान दिया गया था।
यह अभियान ‘मिशन पोषण 2.0′ के तहत चलाया जाता है, जो कुपोषण से निपटने और पोषण सेवाओं को मजबूत करने के लिए भारत का एक व्यापक ढांचा है।
स्टैटिक GK फैक्ट: POSHAN का मतलब है ‘प्राइम मिनिस्टर्स ओवरआर्चिंग स्कीम फॉर होलिस्टिक नरिशमेंट‘ (समग्र पोषण के लिए प्रधानमंत्री की व्यापक योजना)।
2026 की थीम में आंगनवाड़ियों को केंद्र में रखा गया है
“हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी“ थीम आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, बच्चों की देखभाल और बचपन के शुरुआती विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए समुदाय-स्तर का मुख्य मंच बनाती है।
2026 के अभियान में पांच मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है।
1. आहार में विविधता और प्रोटीन से भरपूर भोजन
यह अभियान संतुलित आहार को बढ़ावा देता है जिसमें अनाज और मोटे अनाज (मिलेट्स), दालें, फल और सब्जियां, नट्स और बीज, दूध और दूध से बने उत्पाद और अंडे शामिल हैं। पोषण मेले, हेल्दी रेसिपी का डेमो और प्रोटीन से भरपूर खाने को बढ़ावा देने जैसी गतिविधियां परिवारों को अलग-अलग तरह का खाना अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगी। पोषण वाटिकाओं से मिलने वाली उपज भी पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगी।
2. ताज़ा और पौष्टिक गर्म पका हुआ खाना
आंगनवाड़ी केंद्र ‘सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन प्रोग्राम‘ के तहत ताज़ा और अलग-अलग तरह का गर्म पका हुआ खाना (HCM) उपलब्ध कराएंगे।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साप्ताहिक मेनू बदलने, स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल करने और खाने की क्वालिटी व साफ़–सफ़ाई को बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया‘ (FSSAI) के साथ मिलकर HCM की क्वालिटी की देशव्यापी जांच करना भी इस योजना का हिस्सा है।
3. समुदाय की भागीदारी और जवाबदेही
इस अभियान का मकसद समुदाय की भागीदारी और निगरानी में आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों (AMCs) की भूमिका को मज़बूत करना है।
AMC के लिए गाइडलाइंस 23 जून, 2026 को जारी की गई थीं। ये समितियां समुदायों को पोषण संबंधी गतिविधियों की निगरानी करने और आंगनवाड़ी केंद्रों पर जवाबदेही बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।
‘सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन प्रोग्राम‘ के मेनू बोर्ड पर रोज़ का मेनू और लाभार्थियों को मिलने वाली सुविधाएं भी दिखाई जाएंगी, जिससे परिवारों तक जानकारी आसानी से पहुँच सकेगी।
पोषण और बचपन का शुरुआती विकास
चौथा फ़ोकस एरिया पोषण, शुरुआती प्रोत्साहन और दिमागी विकास को जोड़ता है।
बच्चे के विकास के लिए ज़िंदगी के शुरुआती 1,000 दिन बहुत अहम होते हैं। 0-3 साल के बच्चों के विकास के 34 पड़ावों (माइलस्टोन्स) वाला एक नया ‘होम विज़िट शेड्यूलर‘ बनाया गया है, ताकि आंगनवाड़ी वर्कर सही तरीके से सलाह और फ़ॉलो-अप दे सकें।
यह अभियान विकास में देरी वाले बच्चों की पहचान और उन्हें सही जगह भेजने (रेफ़रल) की प्रक्रिया को भी मज़बूत करेगा और सही पोषण व बचपन के शुरुआती विकास के बीच संबंध के बारे में जागरूकता बढ़ाएगा।
PMMVY के 10 साल पूरे
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) 2026 में 10 साल पूरे कर रही है। यह योजना गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण में मदद के लिए उन्हें नकद प्रोत्साहन के रूप में मातृत्व लाभ देती है।
‘पोषण माह 2026′ के दौरान, बड़े पैमाने पर चलाए जाने वाले अभियानों में योग्य लाभार्थियों की पहचान करने, लंबित मामलों को सुलझाने और योजना के फ़ायदों व आवेदन प्रक्रिया के बारे में जागरूकता फैलाने पर ध्यान दिया जाएगा।
स्टैटिक GK टिप: PMMVY को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मातृत्व लाभ कार्यक्रम के तौर पर लागू किया जाता है।
पोषण अभियान से मिशन पोषण 2.0 तक
सरकार ने मार्च 2018 में पोषण अभियान शुरू किया था। यह अलग-अलग मंत्रालयों के बीच तालमेल, टेक्नोलॉजी और व्यवहार में बदलाव के ज़रिए कुपोषण की समस्या को दूर करने की एक पहल थी।
केंद्रीय बजट 2021–22 के तहत, पोषण से जुड़े कार्यक्रमों को ‘मिशन पोषण 2.0′ के तहत फिर से व्यवस्थित किया गया। इस ढांचे ने पोषण अभियान, आंगनवाड़ी सेवाओं और किशोर लड़कियों के लिए बनी योजना को एक साथ लाया।
इसकी कुल मिलाकर रणनीति में टेक्नोलॉजी–आधारित निगरानी और ‘जन आंदोलन‘ के ज़रिए समुदाय को एकजुट करना शामिल है।
पोषण ट्रैकर डिजिटल निगरानी को मज़बूत बनाता है
1 मार्च 2021 को शुरू किया गया ‘पोषण ट्रैकर‘, आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी के लिए एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर काम करता है।
और पोषण से जुड़ी सेवाओं की डिलीवरी पर नज़र रखना।
31 जुलाई, 2026 तक, भारत में लगभग 13.99 लाख आंगनवाड़ी केंद्र थे, जिन्हें करीब 13.30 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता चला रहे थे और इनसे लगभग 8.94 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिल रहा था।
छह महीने से छह साल की उम्र के बच्चों की संख्या लगभग 7.2 करोड़ थी, जबकि गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की कुल संख्या लगभग 1.1 करोड़ थी।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय पोषण माह 2026, भारत की कम्युनिटी–बेस्ड (समुदाय–आधारित) पोषण रणनीति में आंगनवाड़ी केंद्रों को मुख्य भूमिका में रखता है। खान–पान में विविधता, पौष्टिक भोजन, माताओं के लिए लाभ, बच्चों के शुरुआती विकास और डिजिटल मॉनिटरिंग को मिलाकर, यह अभियान सेवा वितरण और सामुदायिक ज़िम्मेदारी, दोनों को मज़बूत करना चाहता है।
“हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी“ थीम इस बात पर ज़ोर देती है कि पोषण के बेहतर नतीजे पाने के लिए न केवल सरकारी कार्यक्रमों की ज़रूरत है, बल्कि परिवारों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी ज़रूरी है।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| फ़ैक्ट | विवरण |
| राष्ट्रीय पोषण माह 2026 | 9वां संस्करण |
| अभियान की अवधि | सितंबर 2026 |
| शुरू होने की तारीख | 9 सितंबर, 2026 |
| थीम | “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी” |
| थीम का अर्थ | हमारी आंगनवाड़ी, हमारी ज़िम्मेदारी |
| मुख्य फ़ोकस | पोषण, बच्चों की देखभाल और शुरुआती बचपन का विकास |
| पांच प्राथमिकताएं | आहार में विविधता, गर्म पका हुआ भोजन (HCM), सामुदायिक जवाबदेही, शुरुआती विकास और PMMVY पर फ़ोकस |
| PMMVY माइलस्टोन | 2026 में 10 साल पूरे |
| पोषण अभियान | मार्च 2018 में शुरू किया गया |
| मिशन पोषण 2.0 | बजट 2021–22 के तहत पोषण फ़्रेमवर्क पेश किया गया |
| पोषण ट्रैकर | 1 मार्च, 2021 को शुरू किया गया |
| आंगनवाड़ी केंद्र | 31 जुलाई, 2026 तक लगभग 13.99 लाख |
| आंगनवाड़ी कार्यकर्ता | लगभग 13.30 लाख |
| कुल लाभार्थी | लगभग 8.94 करोड़ |
| बच्चे लाभार्थी | लगभग 7.2 करोड़ |
| गर्भवती और स्तनपान कराने वाली लाभार्थी | लगभग 1.1 करोड़ |
| शुरुआती बचपन पर फ़ोकस | पहले 1,000 दिन |
| होम विज़िट शेड्यूलर | 0-3 साल के बच्चों के लिए विकास के 34 पड़ाव (माइलस्टोन) |
| HCM | सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन प्रोग्राम के तहत गर्म पका हुआ भोजन |
| मुख्य खाद्य-सुरक्षा संस्थान | FSSAI |
| सामुदायिक तंत्र | आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियां |





