बंदरगाह सुरक्षा के लिए नई शीर्ष संस्था
भारत सरकार ने देश के बंदरगाहों, जहाजों और समुद्री बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के तहत ‘ब्यूरो ऑफ़ पोर्ट सिक्योरिटी‘ (BoPS) की स्थापना की है। यह ब्यूरो समुद्री सुरक्षा के लिए शीर्ष नियामक संस्था के रूप में काम करेगा और साइबर खतरों व डिजिटल कमज़ोरियों जैसी उभरती चुनौतियों से निपटेगा।
शुरुआत में, अपने ट्रांज़िशन (बदलाव) के दौर में BoPS, समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (DGMA) के तहत काम करेगा, जिसे पहले जहाजरानी महानिदेशालय के नाम से जाना जाता था।
स्टैटिक GK तथ्य: भारत की तटरेखा लगभग 7,516 किलोमीटर लंबी है और यहाँ 13 प्रमुख बंदरगाह हैं, जिनमें वधावन में निर्माणाधीन एक बंदरगाह भी शामिल है।
ब्यूरो के उद्देश्य
BoPS का गठन भारत के समुद्री व्यापार के तेज़ी से विस्तार, आधुनिक बंदरगाह बुनियादी ढांचे और डिजिटल तकनीकों पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए किया गया है। ब्यूरो का लक्ष्य एकसमान सुरक्षा मानक स्थापित करना और समुद्री सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर बनाना है।
इसके मुख्य उद्देश्यों में बंदरगाह सुरक्षा बढ़ाना, जहाज सुरक्षा को मज़बूत करना, अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना, आपातकालीन तैयारियों में सुधार करना और महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे को साइबर हमलों से बचाना शामिल है।
BoPS के मुख्य कार्य
ब्यूरो ऑफ़ पोर्ट सिक्योरिटी देश भर के बंदरगाहों और जहाजों पर सुरक्षा उपायों को विनियमित और मॉनिटर करेगा। यह राष्ट्रीय सुरक्षा मानक तैयार करेगा, निरीक्षण करेगा, सुरक्षा ऑडिट करेगा और समुद्री नियमों के पालन की निगरानी करेगा।
ब्यूरो सुरक्षा से जुड़ी खुफिया जानकारी इकट्ठा करेगा, उसका विश्लेषण करेगा और उसे साझा करेगा ताकि खतरों का आकलन बेहतर हो सके और सुरक्षा जोखिमों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
स्टैटिक GK टिप: वैश्विक समुद्री सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) द्वारा ‘इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी‘ (ISPS) कोड अपनाया गया था।
साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान
चूंकि बंदरगाह कार्गो हैंडलिंग, लॉजिस्टिक्स और जहाज़ प्रबंधन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेज़ी से निर्भर हो रहे हैं, इसलिए साइबर सुरक्षा एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन गई है। BoPS बंदरगाह के सूचना प्रौद्योगिकी सिस्टम और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए एक समर्पित साइबर सुरक्षा डिवीजन स्थापित करेगा।
ब्यूरो रैंसमवेयर हमलों को रोकने, साइबर लचीलापन (resilience) बढ़ाने, समुद्री संचार नेटवर्क को सुरक्षित करने और बंदरगाह के कामकाज को बिना रुकावट जारी रखने के लिए काम करेगा।
CISF बंदरगाहों की सुरक्षा बढ़ाएगा
सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) को भारतीय बंदरगाह सुविधाओं के लिए ‘मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन‘ (RSO) के तौर पर चुना गया है। यह सुरक्षा का आकलन करेगा, बंदरगाह सुविधा सुरक्षा योजनाएं तैयार करेगा, कमियों की पहचान करेगा और सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय सुझाएगा।
इसके अलावा, CISF बंदरगाहों पर काम करने वाली लाइसेंस प्राप्त प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों (PSAs) के कर्मचारियों को ट्रेनिंग देगा, जिससे एक जैसे स्टैंडर्ड और प्रोफेशनल सुरक्षा मैनेजमेंट को बढ़ावा मिलेगा।
स्टैटिक GK फैक्ट: CISF की स्थापना 1969 में हुई थी और यह पूरे भारत में अहम इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय के तहत काम करता है।
DGMA के तहत बदलाव का दौर
शुरुआती एक साल के बदलाव के दौर में, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन (DGMA) BoPS के कामकाज की देखरेख करेगा। DGMA ऑपरेशनल प्रक्रियाएं तैयार करेगा, संस्थागत क्षमता बढ़ाएगा और ब्यूरो को आसानी से लागू करने में मदद करेगा।
बदलाव के दौर के बाद, BoPS का नेतृत्व पे लेवल 15 के इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) अधिकारी करेंगे, जिससे समुद्री सुरक्षा प्रशासन में खास लीडरशिप सुनिश्चित होगी।
भारत के समुद्री सेक्टर के लिए महत्व
BoPS की स्थापना भारत के समुद्री सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। फिजिकल सिक्योरिटी, साइबर सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और रेगुलेटरी निगरानी को एक साथ लाकर, यह ब्यूरो बंदरगाहों की सुरक्षा बढ़ाएगा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मदद करेगा और देश के आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।
उस्तादियन समसामयिकी स्थायी तथ्य तालिका
| तथ्य | विवरण |
| संगठन | बंदरगाह सुरक्षा ब्यूरो (BoPS) |
| मंत्रालय | पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय |
| उद्देश्य | समुद्री और बंदरगाह सुरक्षा का विनियमन एवं सुदृढ़ीकरण |
| संक्रमण प्राधिकरण | समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (DGMA) |
| DGMA का पूर्व नाम | नौवहन महानिदेशालय |
| मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन | केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) |
| प्रमुख केंद्रित क्षेत्र | बंदरगाह सुरक्षा, जहाज सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और अनुपालन |
| अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानक | अंतरराष्ट्रीय जहाज और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा (ISPS) संहिता |
| भावी नेतृत्व | भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी — वेतन स्तर 15 |





