अगस्त 24, 2026 6:28 अपराह्न

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम रोकने के लिए नियम कड़े किए

करंट अफेयर्स: सुप्रीम कोर्ट, डिजिटल अरेस्ट स्कैम, साइबर फ्रॉड, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI), म्यूल अकाउंट्स, ई-ज़ीरो FIR, इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C), साइबर फ्रॉड शिकायत निवारण मॉड्यूल, मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, साइबर RMS, MeitY, दूरसंचार विभाग (DoT)

Supreme Court Tightens Rules to Curb Digital Arrest Scams

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम से निपटने के लिए नियम कड़े किए

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम और साइबर वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए देश की प्रतिक्रिया को मज़बूत करने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) को म्यूल अकाउंट्स से निपटने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया, ज़ीरो FIR को पूरे देश में लागू करने को कहा, और राज्यों को साइबर फ्रॉड की शिकायतों के निवारण और पीड़ितों को मुआवज़ा देने के सिस्टम को मज़बूत करने का आदेश दिया।

स्टैटिक GK फैक्ट: संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत भारत का सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है।
सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश क्यों जारी किए?
कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम की बढ़ती घटनाओं का स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया, जिसमें धोखेबाज़ पुलिस अधिकारी, CBI अधिकारी, जज या अन्य सरकारी अधिकारियों का रूप धरकर पीड़ितों को मानसिक रूप से प्रभावित करते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

ये निर्देश एक बेंच द्वारा जारी किए गए जिसमें शामिल थे:

  • चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सूर्य कांत
    जस्टिस जॉयमाल्य बागची
    जस्टिस वी. मोहन

यह कार्यवाही इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की चौथी रिपोर्ट पर आधारित थी, जिसे गृह मंत्रालय (MHA) को सौंपा गया था।

हालांकि साइबर फ्रॉड की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन कोर्ट ने देखा कि साइबर अपराध के बदलते तरीकों से निपटने के लिए मज़बूत संस्थागत सिस्टम की ज़रूरत है।

RBI म्यूल अकाउंट्स के लिए SOP तैयार करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) को म्यूल अकाउंट्स को संभालने के लिए चार हफ़्ते के भीतर एक व्यापक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने और उसे जारी करने का निर्देश दिया।

म्यूल अकाउंट क्या है?

म्यूल अकाउंट एक ऐसा बैंक अकाउंट होता है जिसका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड और अन्य गैर-कानूनी वित्तीय गतिविधियों से प्राप्त पैसे को प्राप्त करने, ट्रांसफर करने या लॉन्डर करने (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए किया जाता है। प्रस्तावित SOP इन कामों के लिए एक जैसी प्रक्रियाएँ तय करेगा:

  • म्यूल अकाउंट्स (mule accounts) की पहचान करना
    संदिग्ध अकाउंट्स को फ्रीज़ करना
    • जांच करना
    • ऐसे अकाउंट्स को मैनेज और मॉनिटर करना

RBI सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को यह SOP भेजेगा।

देशव्यापी साइबर फ्रॉड शिकायत निवारण प्रणाली

कोर्ट ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को तुरंत ये सिस्टम शुरू करने का निर्देश दिया:

  • साइबर फ्रॉड शिकायत निवारण मॉड्यूल
    मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (पैसे की वापसी का मॉड्यूल)

ये मॉड्यूल गृह मंत्रालय की 2 जनवरी 2026 की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत शुरू किए गए थे।

ये मॉड्यूल इनके साथ मिलकर काम करते हैं:

  • नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल
    साइबर RMS (रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम)

इनके उद्देश्यों में शामिल हैं:

  • साइबर फ्रॉड की तुरंत रिपोर्टिंग
    तेज़ी से जांच
    पीड़ितों के पैसे की जल्द वापसी

कोर्ट ने सरकारों को साइबर फ्रॉड की समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया।

e-Zero FIR का देश भर में लागू होना

सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि:

  • e-Zero FIR को केवल 19 राज्यों में लागू किया गया है।
    • केवल 14 राज्यों ने स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र) स्थापित किए हैं।

इसके अनुसार, कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे:

  • चार सप्ताह के भीतर स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की सूचना दें
    I4C के साथ मिलकर e-Zero FIR सिस्टम लागू करें
    • साइबर अपराध की जांच करने वाली एजेंसियों के बीच सहयोग बेहतर करें

e-Zero FIR क्या है?

e-Zero FIR पीड़ितों को बिना पुलिस स्टेशन जाए इलेक्ट्रॉनिक रूप से साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करने की सुविधा देती है, जिससे रजिस्ट्रेशन और जांच तेज़ी से हो पाती है।

तकनीकी “किल स्विच” का प्रस्ताव

कोर्ट ने देखा कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम में अक्सर कई घंटों तक चलने वाली वीडियो कॉल शामिल होती हैं।

कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट एन.एस. नप्पिनाई (एमिकस क्यूरी) से तकनीकी सुरक्षा उपायों के बारे में सुझाव मांगे, जैसे:

  • असामान्य रूप से लंबी संदिग्ध वीडियो कॉल को अपने आप बंद करना
    • लंबे समय तक चलने वाली कॉल के दौरान चेतावनी अलर्ट जारी करना
    • यूज़र्स को संभावित साइबर धोखाधड़ी के बारे में सूचित करना

कोर्ट ने निम्नलिखित संगठनों को ऐसे सुरक्षा उपायों की व्यवहार्यता (feasibility) की जांच करने का निर्देश दिया:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
    दूरसंचार विभाग (DoT)
    इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C)
    टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म

इन एजेंसियों से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

साझा जवाबदेही और पीड़ित मुआवज़ा ढांचा

सुप्रीम कोर्ट ने इंटरडिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) को डिजिटल अरेस्ट स्कैम के लिए साझा जवाबदेही और पीड़ित मुआवज़ा ढांचे की जांच करने का निर्देश दिया।

प्रस्तावित ढांचे का उद्देश्य है:

  • पीड़ितों को समय पर आर्थिक राहत देना
    • बैंकों की ज़िम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना
    • टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करना
    • साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों के लिए कानूनी उपायों को मज़बूत करना

साइबर धोखाधड़ी रिकवरी में अधिक पारदर्शिता

कोर्ट ने निर्देश दिया कि भविष्य की स्टेटस रिपोर्ट में ये बातें शामिल होनी चाहिए:

  • राज्यवार साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें
    बैंकों द्वारा रिपोर्ट की गई शिकायतें
    • जारी किए गए बहाली (restoration) आदेशों की संख्या
    • वापस की गई धनराशि
    • सुलझाए गए मामलों की संख्या

इससे भारत के साइबर धोखाधड़ी रिकवरी सिस्टम की निगरानी बेहतर होगी और जवाबदेही बढ़ेगी।

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के बारे में

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) गृह मंत्रालय (MHA) की एक पहल है, जिसे साइबर अपराध से समन्वित तरीके से निपटने के लिए स्थापित किया गया है। इसके मुख्य कार्यों में शामिल हैं:

  • साइबर अपराध की जांच में तालमेल बिठाना
    • राज्य पुलिस बलों की मदद करना
    नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का प्रबंधन करना
    • साइबर अपराध की जांच के लिए टूल विकसित करना
    • साइबर जागरूकता और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना

स्टैटिक GK फैक्ट: नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल नागरिकों को राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन साइबर अपराधों की रिपोर्ट करने की सुविधा देता है।

उस्तादियन समसामयिकी स्थायी तथ्य तालिका

तथ्य विवरण
घटना डिजिटल अरेस्ट घोटालों पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
जारी करने वाली संस्था भारत का सर्वोच्च न्यायालय
मुख्य फोकस साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम और धन की वसूली को मजबूत करना
RBI को निर्देश म्यूल खातों के लिए 4 सप्ताह के भीतर SOP तैयार करना
म्यूल खाता साइबर अपराध से प्राप्त धन को वैध दिखाने या स्थानांतरित करने के लिए उपयोग किया जाने वाला बैंक खाता
साइबर मॉड्यूल साइबर फ्रॉड शिकायत निवारण मॉड्यूल और धन पुनर्स्थापन मॉड्यूल
कार्यान्वयन मंत्रालय गृह मंत्रालय (MHA)
राष्ट्रीय पोर्टल राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल
जांच प्रणाली Cyber RMS
e-Zero FIR साइबर अपराध FIR का इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण
e-Zero FIR वाले राज्य 19 — आदेश के समय
साइबर अपराध समन्वय केंद्र वाले राज्य 14
प्रस्तावित सुरक्षा उपाय संदिग्ध लंबी वीडियो कॉल के लिए तकनीकी “किल स्विच”
सुरक्षा उपायों का अध्ययन करने वाली एजेंसियाँ MeitY, DoT, I4C और प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म
पीड़ित राहत साझा दायित्व और मुआवजा ढांचा
नियुक्त समिति अंतर-विभागीय समिति (IDC)
प्रमुख संस्था भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C)
प्रशासकीय मंत्रालय गृह मंत्रालय (MHA)
Supreme Court Tightens Rules to Curb Digital Arrest Scams
  1. भारत के सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम और साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड को रोकने के लिए निर्देश जारी किए।
  2. कोर्ट ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) को चार हफ़्ते के अंदर म्यूल अकाउंट्स’ (mule accounts) के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया।
  3. म्यूल अकाउंट एक ऐसा बैंक अकाउंट होता है जिसका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड से मिले पैसे को लेने, ट्रांसफर करने या लॉन्डर करने के लिए किया जाता है।
  4. RBI की SOP में म्यूल अकाउंट्स की पहचान, उन्हें फ्रीज़ करना, उनकी जांच और निगरानी शामिल होगी।
  5. यह SOP हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी जाएगी।
  6. कोर्ट नेसाइबर फ्रॉड शिकायत निवारण मॉड्यूल’ और ‘मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल’ को पूरे देश में लागू करने का आदेश दिया।
  7. ये मॉड्यूल गृह मंत्रालय (MHA) की 2 जनवरी 2026 की SOP के तहत शुरू किए गए थे।
  8. ये मॉड्यूल नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर RMS (रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम) के साथ मिलकर काम करते हैं।
  9. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों कोई-ज़ीरो FIR’ सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया।
  10. ई-ज़ीरो FIR से पीड़ित लोग बिना पुलिस स्टेशन जाए इलेक्ट्रॉनिक रूप से साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
  11. आदेश के समय, 19 राज्यों ने ई-ज़ीरो FIR लागू कर दिया था।
  12. केवल14 राज्यों ने ‘स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ स्थापित किए थे।
  13. कोर्ट ने राज्यों से चार हफ़्ते के अंदरस्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ को नोटिफाई करने को कहा।
  14. इस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच में चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन शामिल थे।
  15. ये निर्देश इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की चौथी रिपोर्ट पर आधारित थे, जो गृह मंत्रालय (MHA) को सौंपी गई थी।
  16. कोर्ट ने संदिग्ध लंबी अवधि वाली वीडियो कॉल को खत्म करने के लिए तकनीकीकिल स्विच” (kill switch) की जांच करने का प्रस्ताव दिया।
  17. MeitY, DoT, I4C और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म से प्रस्तावित सुरक्षा उपायों की व्यवहार्यता (feasibility) का अध्ययन करने को कहा गया।
  18. इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) को साझा दायित्व और पीड़ित मुआवजा फ्रेमवर्क’ की जांच करने का काम सौंपा गया।
  19. कोर्ट ने निर्देश दिया कि भविष्य की रिपोर्ट में राज्य-वार साइबर फ्रॉड की शिकायतें, बहाली के आदेश और रिकवर किए गए पैसे की जानकारी शामिल हो।
  20. इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) गृह मंत्रालय (MHA) के तहत काम करता है। इसका काम साइबर अपराध की जांच में तालमेल बिठाना और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल को मैनेज करना है।

Q1. Mule Accounts से निपटने के लिए Standard Operating Procedure (SOP) तैयार करने का निर्देश RBI को किस संस्था ने दिया?


Q2. Mule Account क्या होता है?


Q3. e-Zero FIR प्रणाली का मुख्य उद्देश्य क्या है?


Q4. Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) किस मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है?


Q5. डिजिटल अरेस्ट घोटालों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने किस तकनीकी सुरक्षा उपाय की व्यवहार्यता की जांच करने को कहा?


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